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युद्ध आसान नहीं बहुत खर्च होता है : ओमपुरी



 

दि राइजिंग न्‍यूज

अनुराग शुक्‍ल

हिंदी फिल्मों के अभिनय प्रवीण चरित्र अभिनेता ओमपुरी कश्‍मीर में आतंकी हमले को लेकर बेहद गमगीन हैं। वे बदला चाहते हैं। ओमपुरी अपने शहीद सैनिकों के सिर के बदले सिर की मांग कर रहे हैं। वे एक संवेदनशील कालाकार भी हैं लिहाजा पाकिस्‍तानी कलाकारों पर बैन लगाने के सवाल से ही भड़क उठते हैं। राजधानी लखनऊ में वे अपनी फिल्म गांधीगिरी को लेकर बहुत उत्साहित थे। उनसे जब पाकिस्तान के कलाकारों को देश से बाहर निकालने पर सवाल पूछा गया तो वे भड़क उठे। कहने लगे कि कलाकारों पर पाबंदी लगाना गलत है। अगर कुछ करना है तो सेना से कहो जहां से आतंकवादी आए थे, वहीं से पाक में घुस जाएं और उनके‍ 17 ‍सिर लेकर आएं। इस मामले को लेकर जब दि राइजिंग न्यूज ने और कुरेदा तो ओमपुरी बहुत खरी-खरी बात बोल गए। उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। प्रस्तुत है अंश---खरी-खरी




शिवसेना व मनसे के पाक विरोधी बयान पर आप का क्या है कहना है?

कहना क्या है। मेरा तो मानना है ‍कि ये मुट्ठी भर लोग देश को बदनाम कर रहे हैं। शिवसेना हो या मनसे। दोनों का यही काम है। कलाकार तो बहुत ही इनोसेंट होता है। उससे आतंकवाद या धार्मिक उन्माद से कोई मतलब नहीं होता। कलाकारों का धर्म तो इंसानियत है। भाई तो क्यों उनके पीछे पड़े हो। पूरा महाराष्ट्र पड़ा है। बस मुम्बई में ही यह सब होता है। मुम्बई में हमें चैन से जीने दो।

 



जब कोई बात होती है तब कलाकारों को निशाना बनाया जाता है?

हां भाई हर बार यही होता है। मुम्बई में अटैक या राजस्थान में। अब उरी में। इसमें पाक कलाकारों का कहां से कनैक्शन हो गया है भाई। अगर करना है तो शिवसेना के लोग जाएं अपने शरीर में बम बांधकर, वहां के आतंकवादियों को मारे, तब पता चलेगा।


पाकिस्तानी अभिनेता मार्क अनवर के भारतीयों पर किए गए नस्‍ली कमेंट पर क्‍या कहेंगे

(चुप रहते हैं), धीरे-धीरे कहते हैं, अच्‍छे-बुरे लोग हर जगह रहते हैं हालांकि उन्‍होंने माफी मांग ली है पर उनका कहना ठीक नहीं था।


सरकार को अब क्या हमला कर देना चाहिए?

देखिए, हमला करना इतना आसान नहीं है। बहुत खर्चे बढ़ जाते हैं। जो टैक्स हम दे रहे हैं वह दो गुना हो जाएगा। आर्थिक व्यवस्था खराब हो जाएगी। लेकिन हमारे सैनिकों की जान गई तो सरकार कहे सैनिकों से कि अन्दर घुसकर उनके 17 सैनिकों के सिर लेकर आओ। फिर देखा जाएगा कि क्या होता है।


आरक्षण पर आपकी क्या राय है?

आरक्षण तो पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। क्या ब्राह्मण का लड़का गरीब नहीं हो सकता है। ज्यादा गरीबी ब्राह्मणों में है। अब देखिए जाट और पटेल भी आरक्षण मांग रहे हैं जबकि इनसे ज्यादा सम्पन्न कौन है। जहां तक छात्रों की बात है तो एक बच्चा 40 नम्बर पाकर एडमीशन या नौकरी पा जाता है। दूसरा बच्चा 75 नम्बर पा कर भी छंट जाता है। भाई कहां का न्याय है। हम समाज को क्या दे रहे हैं। इस कारण आरक्षण पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए। यह पॉलिसी बिल्कुल गलत है। अगर बनानी है तो सिर्फ अमीर और गरीब दो कटेगिरी बनाओ। अन्यथा खत्म कर दो आरक्षण।


आप की फिल्म गांधीगिरी के बारे क्या कहना है?

यह फिल्म बड़े स्टारों की नहीं है। आमिर खान की फिल्म दंगल के अभी रिलीज होने की तारीख भी तय नहीं हो पायी लेकिन प्रचार शुरू हो गया है। हमारी गांधीगिरी तो कम पैसे में बनी है। हमारे पास तो बहुत पैसा नहीं है, लेकिन कन्टेंट है। एक बार कोई सिनेमाहॉल में जाएगा तो कहेगा कि, हां आज भी गांधी प्रासंगिक हैं। इस कारण गांधीगिरी बहुत प्रभावशाली फिल्म साबित हो सकती है।

 

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