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बुलंद ही रहेगी व्यापारियों की आवाज

  • सपा जीते न जीते, साथ नहीं छोड़ूंगा



 

 

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

11 सितंबर, लखनऊ।

व्यापारी की आवाज और व्यापार मंडल को तीखे तेवर देने वाले व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल की हनक में कुछ कमी जरूर आई है। सूबे की सत्‍ता में रहना और चलना उनकी आदतों में शुमार है। ऐसे में, प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। प्रदेश की मौजूदा सत्‍ता के साथ उनकी गहरी छनती है पर अब कंछल  आगे किसी दल के साथ होंगे, यह चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल,उनके समर्थक इसका कारण कंछल की राजनैतिक महत्वाकांक्षा को मानते हैं । पिछले तीन चुनावों को देखते हुए कंछल किस पार्टी की तरफ खड़े दिखेंगे, यह व्यापारियों में चर्चा का विषय है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों पर नजर डाले तो हर बार कंछल पाला बदलते मिले। पहले भाजपा से सपा, फिर सपा से बसपा और फिर भाजपा में रहते हुए सपा में वापसी। एक तरफ जीएसटी, इनकमटैक्स और ट्रेड टैक्स विरोध तो दूसरी तरफ राजनैतिक आकांक्षा। बावजूद इसके देश के सबसे बड़े व्यापार मंडल की कमान उनके हाथ ही है। लेकिन, अब बनवारी लाल कंछल का रूख क्या होगा, इसे लेकर उन्‍होंने  दि राइजिंग न्यूज के साथ खरी खरी बात की ...।

 

क्या आप फिर पार्टी बदलेंगे या सपा में ही रहेंगे

मैं समाजवादी पार्टी जुड़ा हूं और जुड़ा भी रहूंगा। भले वह सत्ता में आए या न आए। किसी राजनैतिक दल का नेता होने से पहले मैं व्यापारी नेता हूं और व्यापार मंडल सर्वोपरि है। सत्तारूढ़ दल में रहूं या फिर विपक्षी मगर व्यापारियों की आवाज बुलंद ही रहेगी। व्यापारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए यह प्रयास लगातार जारी रहेगा।

 

अब आपके वे तीखे तेवर नहीं दिखते, जिसके लिए कंछल को जाना जाता था।

ऐसा कतई नहीं है। इनकम टैक्स हो या फिर वाणिज्यकर उत्पीड़न, हर स्तर पर विरोध हो रहा है। व्यापार मंडल की आवाज ज्यादा बुलंद हुई है। केंद्र सरकार ने काला धन घोषित करने के लिए तीस सितंबर तक समय दिया है लेकिन पूरे देश में इनकम टैक्स विभाग व्यापारियों के यहां छापेमारी कर रही है। इसका राष्ट्रीय स्तर पर विरोध हो रहा है।

 

प्रदेश सरकार भी जीएसटी बिल पास कर दे देगी तो . .

गुड्स एंड सर्विस टैक्स तो लगना है। जीएसटी के प्रावधानों का हम विरोध कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने सबसे बेहतर काम किया है। मंडल स्तर पर सेमिनार कराए जा रहे हैं और व्यापारियों की बात को सुना जा रहा है। वर्ना केंद्र सरकार तो कुछ पिछल्गू संगठनों के साथ मीटिंग कर रही है। आम व्यापारी की सुनने को तैयार ही नहीं है।

 

प्रदेश सरकार से आप कितना संतुष्ट हैं।

दूसरे राज्यों व केंद्र सरकार की तुलना में प्रदेश सरकार का कामकाज कहीं बेहतर है। व्यापारियों को सुना जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री व्यापारियों के मामलों को गंभीरता से ले रहे है। व्यापारियों की जायज मांगों पर कार्रवाई भी होती है। पिछले उत्पीड़न की नीयत से व्यापारियों को निशाना बनाने वाले वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान इकाई के कई अधिकारी हटाए गए। यह सरकार के सकारात्मक रुख के चलते हुआ।

 

अधिकारी हटे लेकिन लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं प्रांतीय इकाई के उपाध्यक्ष के परिवार के प्रतिष्ठानों पर ही छापे पड़ गए।

हम इसका लगातार विरोध करते रहे हैं। दफ्तरों का घेराव किया जाता है। प्रदर्शन होता है। अब अगर किसी के यहां के गड़बड़ी होने के कारण जांच-छापा मारा भी गया तो अगर उत्पीड़न का मामला निकला तो व्यापार मंडल इसका मुखर विरोध करेगा।

 

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