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समय के साथ आई है प्रोफेशन की समझ



 

दि राइजिंग न्‍यूज

 

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्‍म से धमाकेदार एंट्री देने वाली दमदार अदाकारा हुमा कुरैशी ऐसी अभिनेत्री हैं, जिन्‍होंने अपने अभी तक के करियर में बेहद यूनीक रोल चुने हैं। गैंग्‍स ऑफ वासेपुर के बाद उनकी फिल्म बदलापुर में उनके किरदार को बहुत तारीफ मिली। इन दिनों हुमा साउथ इंडियन फिल्‍म और बॉलीवुड फिल्‍म जॉली एलएलबी-2 की शूटिंग के सिलसिले में लखनऊ में व्‍यस्‍त हैं। वह जितनी बेहतरीन अदाकारा हैं उतनी ही बढ़िया इंसान भी। उन्‍होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बारे में बहुत सी बातें की-


सोहेल खान मेरे भाई हैं


मुझे अपने फैन्स के साथ सीधे कांटेक्‍ट बनाकर रखना पसंद है। इसके लिए मैं सोशल मीडिया या ट्विटर का सहारा लेती हूं। मैंने इस मुद्दे पर भी ट्वीट किया था कि वह (सोहेल) मेरे बड़े भाई जैसे हैं और मीडिया को लिखने से पहले अपने फैक्ट्स चेक करने चाहिए। वैसे अब मैं चीजों को हैंडल करना सीख गई हूं। हालांकि, ये इतना आसान नहीं होता। इसका सीधा तरीका है कि आप सीधे अपने फैन्स के संपर्क में रहो और ट्विटर से उन्हें स्पष्ट करो।


भाई साकिब और मेरे बीच बहुत बांडिंग है


हम भाई-बहन की बहुत बांडिंग है। बचपन में मैं बहुत ही शरारती थी और साकिब टीनेज होने तक बहुत ही भोंदू था। मैं हमेशा शरारतें करती और मम्‍मी से सुनना उसको पड़ता था। एक बार हम लोग मां के साथ उनकी फैमिली फ्रेंड के घर गए। साकिब तो उनके घर जाने के बाद थोड़ी देर में सो गया। आंटी के कमरे में दुनिया भर की कॉस्मेटिक्स और परफ्यूम्स रखे हुए थे। मुझे कारस्तानी सूझी। मैंने उनकी कॉस्मेटिक्स और परफ्यूम्स बर्बाद करके रख दिए। मैंने उनका सारा परफ्यूम कमोड में बहा लिया और सब कुछ बिखराकर मैं चुपचाप मम्मी के पास आकर बैठ गई। थोड़ी देर बाद जब आंटी को पता चला तो पूछताछ हुई और मैं साफ मुकर गई। मां तो बहुत गुस्से में थीं, क्योंकि उन्हें लगा कि ये हम दोनों में से किसी एक ने किया है। बहरहाल हम घर आ गए। मां चिढ़ी हुई थीं और गुस्से में बड़बड़ा रही थीं। पापा भी बहुत गुस्से में थे। साकिब जब सोकर उठा तो उनसे पूछा गया और उसने नींद में कह दिया कि वह सारा कारनामा उसने किया था। असल में साकिब को नींद से उठने के बाद बहुत देर तक कुछ समझ में नहीं आता। उसकी यह आदत अब भी है। उससे मां-पापा ने सॉरी भी बुलवाई। यह राज सालों तक राज ही रहा। अभी तीन साल पहले घर में बातों-बातों में यह राज खुला कि वह शरारत साकिब ने नहीं, मैंने की थी।



समय के साथ आई प्रोफेशन में समझ



मुझे समय के साथ इस करियर में समझ आई है। पहले मैंने डीडे जैसे किरदार किए, उसके बाद एक थी डायन में चुनौतीपूर्ण अभिनय किया। मुश्किल किरदार मुझे बहुत जबरदस्त किक देते हैं। बदलापुर मेरे करियर का सबसे कठिन किरदार था। मुझे कैरक्टर को लेकर नाइटमेयर आया करते थे। मुझे लगता है कि श्रीराम राघवन अगर उस फिल्म को निर्देशित न कर रहे होते, तो शायद मैं वह किरदार कर भी न पाती। उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट सुनाते हुए पहले ही दिन बता दिया था कि जब ऑडियंस थिएटर से बाहर निकलें, तो इस किरदार के लिए उनके मन में जरूर तरस आना चाहिए, क्योंकि बाकी हर किरदार इसमें सेल्फिश हैं। मैंने अपने किरदार के साथ न्याय करने की कोशिश की। मुझे मेरे पैरंट्स ने सिखाया है कि कोई भी काम डर कर मत करो। वे हमेशा कहते हैं कि फ्रंट फुट पर खेलो। मेरा डेब्यू भी अनकन्वेंशनल था। कई लोगों ने कहा भी कि मुझे गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्म से शुरुआत नहीं करनी चाहिए। मुझ जैसा डेब्यू करने से पहले कोई हजार बार सोचेगा। मैं अगर मेन स्ट्रीम रोल का इंतजार करती, तो शायद यहां तक न पहुंची होती। मैंने किरदार देखा और उसकी ताकत परखी।




सख्‍त हैं गुरिंदर

इस फिल्म से पहले मैंने अपने भाई के साथ दोबारा की शूटिंग की थी लंदन में। उसके बाद मैंने गुरिंदर चड्ढा की फिल्म की शूटिंग की जोधपुर में और फिर मैं वापस लंदन आ गई थी वाइट की शूटिंग के लिए। गुरिंदर की हॉलिवुड की शूटिंग के लिए एक अलग तरह के प्रफेशनलिज्म और पाबंदी का अहसास हुआ। अगर उनका कॉल टाइम साढ़े सात बजे है, तो आपको सेट पर सात पच्चीस पर पहुंचना होता है। उनका शेड्यूल तो अजब ही होता है। जैसे साढ़े सात बजे मेकअप चेयर, आठ बजे आउट ऑफ मेकअप चेयर। आठ बज कर पांच मिनट पर वैनिटी वैन की तरफ जैसी छोटी-छोटी डिटेलिंग शेड्यूल में लिखी होती हैं और सभी उसका पालन करते हैं। उनकी पाबंदी इतनी ज्यादा होती है कि आपको लगता है कि 12 घंटे के लिए आपको गुलाम बना लिया गया है।



इंग्लिश फिल्‍म ओरक्‍यूलेस का रीमेक है दोबारा

दोबारा इंग्लिश फिल्म ओरक्यूलेस की रीमेक है। हमारे पास जब इस फिल्म के राइट्स आए, तो हमें लगा कि इस पर हम फिल्म बना सकते हैं। यह भाई-बहन की कहानी है, जो बहुत ही अनयूजवल-सी सिचुएशन में पड़ जाते हैं। साकिब मुझसे दो साल छोटा है और हमारे बीच भाई-बहन के साथ-साथ दोस्तों जैसा भी रिश्ता है। इस एज गैप में भाई-बहन का रिश्ता ऐसा होता है कि आप कई चीजों में क्राइम पार्टनर भी होते हैं।

वे एक-दूसरे को बहुत ही बेहतरीन तरीके से जानते हैं, तो एक ऐसे ऐक्टर के साथ काम करना, जो आपको इतने अच्छे तरीके से जानता हो, जो आपका भाई हो, तो ऐसा अनुभव यादगार ही होगा। मेरे लिए यह एक्सपीरियंस अलग इसलिए भी था कि मैं साकिब से ज्यादा छिपा नहीं पाती। फिर सेट पर एक सेन्स ऑफ सपोर्ट भी रहता है कि कुछ कम ज्यादा होगा, तो वह संभाल लेगा। मगर कॉम्पिटिशन भी कम नहीं होता हमारे बीच। बड़ा मजेदार था, उसके साथ काम करना।

 

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