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अनपढ़ हैं बसपा सुप्रीमो मायावती : ब्रजेश पाठक

  • पूर्व सांसद ने कहा- बसपा में भगदड़ मचना तो अभी बाकी
  • मोदी बड़े दिल के नेता, दुनिया की निगाहें उन्‍हीं पर टिकीं



 


दि राइजिंग न्‍यूज ब्‍यूरो

कमल दुबे

03 सितंबर, लखनऊ।

कुछ दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए पूर्व सांसद बृजेश पाठक बसपा सुप्रीमो मायावती की दलित और अपरकास्ट की उस सोशल इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा रहे हैं, जिसके दम पर बसपा ने 2007 में उत्तर प्रदेश में बहुमत की सरकार बनाकर इतिहास रचा था। करीब डेढ़ दशक तक हाथी पर सवारी करने के बाद इस ब्राह्मण नेता ने बसपा प्रमुख मायावती को जोर का झटका धीरे से दिया है। आगरा की रैली के महज दूसरे दिन ब्रजेश पाठक ने मायावती को आईना दिखा दिया।

 

बसपा से अलग होने के बाद भी पाठक को मायावती से कोई शिकायत नहीं है लेकिन उन्हें देश को विकास के रास्ते पर ले जाने की उम्मीद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में ही नजर आने लगी है। बसपाई माहौल में सालों से जुड़े रहे बृजेश पाठक के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के अनुशासित कल्चर में खुद को ढा़लने की है। आगे की नई सियासी पारी और हाथी की सवारी के पुराने अनुभव पर पाठक ने दि राइजिंग न्यूज के साथ लंबी बातचीत की। इस बातचीत में वे खुलकर बोले और अपनी बात को बेबाक तरीके से सामने रखा।


सवाल : बसपा और भाजपा के कल्चर में बड़ा फर्क है। आप लम्बे समय तक बसपा में रहे। भाजपा में कैसा लग रहा है।

जवाब : भाजपा में आना काफी सुखद अनुभव है। बसपा में रहकर भी सभी दलों के लोगों के साथ मेरे मधुर रिश्‍ते रहे हैं। मुझे एकदम नहीं लगता कि मैं किसी दूसरे दल में आया हूं। सभी लोग अपने जैसे लगते हैं और उनका प्यार मिल रहा है। इसके अलावा भाजपा की राजनीति पूरी तरह मानवीय प्रगति पर आधारित है जबकि बसपा में पूरी राजनीति निजी हितों पर केन्द्रित है। लम्बे राजनीतिक सफर के बाद मुझे अब लगता है कि, अपने बारे में कम और देश के बारे में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। 


सवाल : बसपा में आपकी तो स्‍थित काफी ठीक थी और विधानसभा चुनाव में बसपा को सत्ता के मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में बसपा छोड़ने का फैसला क्यों।

जवाब : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काम करने का तरीके ने मुझे बुरी तरह झकझोर दिया है। केन्द्र में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद मोदी जी ने देश में विकास की जो पटकथा लिखी है उससे दुनियां भर की नजरें उन पर है। प्रधानमंत्री के काम के अन्दाज से प्रभावित होकर मैने भी भाजपा का हाथ पकड़ कर देश हित की राजनीति करने का फैसला लिया है।


सवाल : मायावती ने आपके बसपा छोड़ने का कारण परिवार के तमाम सदस्यों को टिकट न दिया जाना बताया है। आप कुछ कहेंगे।

जवाब : देखिये मायावती को निजी तौर पर मैं जितना जानता हूं उसके हिसाब से उन्हें न तो लिखना आता है और न ही राजनीति। पार्टी में पहले से लिखा-लिखाया फारमेट मौजूद रहता है। जिसमें पार्टी छोड़ने वाले नेता का सिर्फ नाम बदलकर बयान जारी कर दिया जाता है। सभी पर एक जैसे आरोप होते हैं।


सवाल : आपको मिलाकर बसपा के तमाम नेता भाजपा में आ चुके हैं। अभी अन्य बसपा के नेताओं के भी भाजपा में आने की उम्मीद है।

जवाब : देखते जाइए। अभी तो यह शुरुआत है और भगदड़ मचनी तो बाकी है। जब मैं बसपा में आया था तो वहां ब्राह्मणों की पूछ थी लेकिन अब एकदम नहीं है। वर्ष 2007 में 86 तथा वर्ष 2012 में 69 ब्राह्मणों को बसपा ने टिकट दिया था लेकिन इस बार बहुत कम ब्राह्मणों को टिकट मिलेगा। मायावती के ब्राह्मण विरोधी रणनीति के चलते तमाम नेता डरे हुए हैं। पार्टी से उन्हें हटाने का कब फरमान जारी हो जाए इसका कोई भरोसा नहीं। ऐसे में आने वाले दिनों में बसपा को अलविदा कहेंगे।


सवाल : भाजपा के तमाम नेता इस बात से सशंकित हैं कि, कहीं उनके टिकट न कट जाएं। दबी जुबान विरोध के सुर उठ रहे है। अपने आपको समायोजित करने में आपको कोई कठिनाई तो नहीं आ रही है।

जवाब : नहीं बिल्कुल नहीं। सभी का भरपूर प्यार और सहयोग मिल रहा है। देश हित की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों को और मजबूत करने के लिये भाजपा में आया हूं। ऐसे में टिकट या अन्य पद का कोई लालच नहीं है। सभी के साथ तालमेल अच्छा है और आगे पार्टी जो काम देगी उसे पूरा करूंगा।


सवाल : बसपा से ब्राह्मणों को जोड़ने का काम आपने किया लेकिन सारा श्रेय सतीश चन्द्र मिश्र उनके परिवार को गया। मिश्रा जी के बारे में आपका क्या नजरिया है।

जवाब : मुझे न तो मायावती और न ही सतीश चन्द्र मिश्र से कोई शिकायत है। श्री मिश्र मेरे बड़े भाई है और भाजपा में रहकर भी मै उनका सम्मान करता रहूंगा।


सवाल : आपके हिसाब से विधानसभा चुनाव बाद प्रदेश में किसकी सरकार होगी।

जवाब : भाजपा की सरकार बनना तय है। माहौल कुछ भी हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के मंच पर भारत को जो सम्मान दिलाया है उससे देश और प्रदेश की जनता खुश है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में नतीजे चौंकाने वाले होंगे और भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।

 

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