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खाओ और खिलाओ...लखनऊ फूडीज



 
दि राइजिंग न्यूज

सुबह की चाय के बाद जैसे ही मोबाइल उठायाएक लजीज डिश आपके सामने आ गई। सिर्फ सुबह ही नहींदोपहर-शाम-रात अगर बढ़िया-बढ़िया पकवान आपकी नजरों के सामने आते जाएं तो कैसा हो। लखनऊ फूडीज कुछ ऐसा ही कर रहा है।


लखनऊ के साथ नवाब और कबाब का नाम स्‍वत: ही जुड़ा हुआ है। दुनियाभर में हमारी पहचान इसी से होती है। अबइस विरासत को संभालने का काम लखनऊ फूडीज कर रहा है। लखनऊ फूडीज फेसबुक पर बना एक ग्रुप है जिसे तीन साल पहले बनाया गया था। यह ग्रुप लखनऊ का जायका फैलाने के उद्देश्‍य से बनाया गया था और अब यह इतनी दूर-दूर तक फैल चुका है कि भारत के कोने-कोने के स्‍वाद के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। फेसबुक पर दिनभर लाजवाब भोजन की थाली पोस्‍ट होती रहती हैंऔर साथ में उसे बनाने की विधि भी। 

कुछ इसी तरह से सोशल प्‍लैटफार्म पर दुनियाभर के लोगों को अवधी और लखनवी पकवान से जोड़ने का काम कर रहा है लखनऊ फूडीज। खाना खाने के शौकीन व बनाने में रुचि रखने वालों में खासा लोकप्रिय है। अब तो लखनऊ फूडीज सोशल वर्क में भी आगे आ रहा है। ‍भविष्य में आपदा वाले क्षेत्रों में लोगों को पकवान का पैकेट भी भिजवाने का प्लान है। ग्रुप की एकमात्र महिला एडमिन आयशा अयाज ने लखनऊ फूडीज की खास-ओ-खासियत से दि राइजिंग न्यूज के कार्यालय में आकर रूबरू कराया। खाना और खजाना के बारे में जमकर बातें की।


व्‍हाट एन आइडिया 

लखनऊ के रहने वाले मोहम्‍मद कैफी का हैदराबाद में बिजनेस है। काफी समय से वहां रह रहे कैफी लखनऊ के जायके को बहुत मिस करते थे। उनके मन में आया कि नवाबी शहर के खाने का स्‍वाद सभी जगह फैलाते हैं। इसी सोच के साथ 2013 में उन्‍होंने लखनऊ फूडीज ग्रुप क्रिएट किया। फेसबुक के जरिए उन्होंने लोगों को लखनऊ और लखनवी खाने के बारे में बताना शुरू ‍किया। तब उन्‍हें अंदाजा ही नहीं था कि तीन साल में यह ग्रुप इतना मशहूर हो जाएगा। धीरे-धीरे इसमें लोगों का जुड़ाव होने लगा।‍ अब तो सेलेक्टेड लोगों को ही इससे जुड़ने का मौका ‍मिल रहा है। मौजूदा समय में 42000 से ज्यादा लोग इसके साथ जुड़े हुए हैं। एक छोटा सा आइडिया आज इतने बड़े ग्रुप में बदल जाएगा उन्‍होंने खुद भी नहीं सोचा था।

हर कोई है यहां

ग्रुप में हर उम्र और हर वर्ग के लोग मेंबर हैं। स्‍कूली बच्‍चेग्रहिणीएंट्रप्रिन्‍योर्स आदि। यानि जो भी खाने और खिलाने के शौकीन हैंइस ग्रुप में जरूर दिखेंगे।  

खाने पर चर्चा

फेसबुक वर्चुअल वर्ल्‍ड हैलेकिन लखनऊ फूडीज को हम वर्चुअल कतई नहीं कह सकते। यह केवल इंटरनेट और आपके कंप्‍यूटर/मोबाइल पर दिखने वाला आंखों का धोखा नहीं है। लखनऊ फूडीज अपने मेंबर्स को आपस में मिलने और बात करने का भी पूरा मौका देता है। समय-समय पर मीटिंग्‍स ऑर्ग्रेनाइज होती रहती हैं। सेलेक्टिड मेंबर्स मिलकर अपनी डिश प्रेजेंट करते हैं और जायकों के बारे में चर्चा करते हैं। ग्रुप ईदबकरीदहोलीदिवाली पर विभिन्न आयोजन करके लखनवी खाने को प्रमोट करता हैं। इसके साथ ही लोगों को खाने के जरिये जोड़ने का काम भी किया जाता है। हाल ही में फ्रेंडशिप डे पर भी जमकर पार्टी हुई। देखें फोटो-






नामी शेफ के साथ कुछ अलग करने वाले

लखनऊ फूडीज एक्‍पेरिमेंट करने पर भरोसा करता है। यहां पर वे सभी लोग मिल जाएंगे जो स्वादिष्‍ट पकवान बनाते हैं या खिलाने में इंटरेस्ट लेते हैं। नामी शेफ तो हैं ही साथ ही कुछ ऐेसे लोग भी है जो मल्टी नेशनल कम्पनियों में काम करते थे और अब अपने स्टोर खोल कर लाखों कमाते हैं। इनसे प्रेरणा लेकर कोई भी अपना काम शुरू कर सकता है।

स्‍ट्रीट फूड को प्रमोट

एडमिन आयशा अयाज कहती हैं किहम लोग उन लोगों भी प्रमोट करते हैं जो कहीं गली व स्ट्रीट पर अपना स्टाल लगाते हैं और स्वाद में बड़े-बड़ों को मात देते हैं। उनको हम सपोर्ट करते हैं। इसके साथ ही जो लोग भी लखनवी खाने के बारे में जानना या बनाना चाहते हैं वे लखनऊ फूडीज पर सर्च करके बना सकते हैं।





आपदा में खाना बाटेंगे

आयशा अयाज ने बताया ‍किभविष्य में हम यह भी प्लान कर रहे हैं किलखनऊ के आस-पास कहीं भी जब बाढ़ या किसी प्रकार की आपदा आए तो हम फूड पैकेड बांटे। हमारी चाहत है किग्रुप के जरिए अगर हम खाना बनाने व खिलाने के साथ कुछ समाज के लिए भी कुछ ज्यादा कर पाए तो बहुत खुशी होगी।


इनके हाथों हैं लखनऊ फूडीज

लखनऊ फूडीज के एडमिन-

फाउंडर-मोहम्‍मद कैफी

आशुतोष

आयशा आयाज

अंजुम

नजीब अज़ीज़

कृपांशु प्रताप

 

 

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