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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क

 

इसके बारे में पढ़कर ऐसा लगता है जैसे यह कोई कहानी हो। 1518 में गर्मी के दिनों में शहर स्ट्रासबर्ग में एक महिला ने सड़क पर भयानक तरीके से नाचना शुरू कर दिया था। दिन से रात हो जाती और रात से दिन पर उसका नाचना बंद नहीं होता। एक सप्ताह के भीतर ही 34 अन्य महिलाओं ने भी उसके साथ नाचना शुरू कर दिया। उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कि उनके अंदर किसी आत्मा का वास हो गया हो। नाचने की ना तो कोई वजह थी और ना ही कोई खास मौका। एक महीने के अंदर नाचने वाली महिलाओं की संख्या 400 पहुंच गई। धार्मिक पुरोहितों और लोगों को स्थिति पर नियंत्रण लाने के लिए बुलाया गया। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को भी बुलाया गया।

कई महिलाओं की हालत खराब होने लगी। यहां तक कि कई महिलाओं की नाचते-नाचते मौत हो गईं। इसके बाद उनके लिए लकड़ी के स्टेज बनाए गए और अलग से हॉल बनाए गए। लोगों का ऐसा मानना था कि डांस कर रही महिलाओं की स्थिति तभी सुधर पाएगी जब वे रात-दिन नाचेंगी। इस घटना के पीछे कई थ्योरी दी गई। जहर, एपिलेप्सी, सामूहिक मानसिक बीमारी कई वजहें बताई गईं और कई तरीके आजमाए गए लेकिन इस ऐतिहासिक घटना का आज तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है।

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