Actress katrina Kaif and Mouni Roy Visited Durga Puja Pandal

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

आज हम आपको एक ऐसे ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सांप दोस्त बनकर रहते हैं। न उन्हें मारा जाता है और न ही सांपों के काटने से कोई मरता है। चौंक गए न जानकर, पर ये सच है। दरअसल ये गांव हैं हरियाणा में रोहतक जिले में और इसका नाम है रोहेड़ा की। इस गांव में पिछले 300 सालों से एक परंपरा चली आ रही है। यहां सांप मारना बहुत बड़ा पाप समझा जाता है। आज तक यहां सांप के काटने से किसी की मौत नहीं हुई है। अकसर सांप आकर लोगों को काटते रहते हैं, लेकिन उन्हें मारा नहीं जाता।

इस अनोखी बात के पीछे की कहानी बताते हुए गांव के सरपंच कहते हैं कि करीब तीन सौ साल पहले की बात है, कुंडू गौत्र के बुजुर्ग, घोघड़िया से आकर यहां बसे थे। उन्हीं में से एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम लखमीर रखा गया। कहा जाता है कि उसी महिला की कोख से बच्चे के साथ एक सांप ने भी जन्म लिया था। उस महिला ने सांप का पालन पोषण भी अपनी औलाद की तरह किया।

भाद्र मास की चौथ के दिन वह महिला खेतों में काम करने गई थी। इस दौरान उसने अपने बेटे और सांप को एक पालने में साथ-साथ सुला दिया। इस बीच उस महिला का भाई अचानक गांव आया और अपनी बहन को घर में न पाकर वह भी उसी खेत चला गया। महिला के भाई ने देखा कि उसके भांजे के साथ पालने में एक सांप लेटा हुआ है। खतरा जानकर उसने सांप को मार दिया, जिसके तुरंत बाद उस बच्चे की भी मौत हो गई।

यह देखकर महिला आग बबूला हो गई और उसने रोते हुए अपने भाई से कहा कि तूने सांप के साथ मेरे बेटे को भी मार डाला है। उसने अपने भाई से कहा कि तू भविष्य में इस दिन कभी भी मेरे घर मत आना, क्योंकि इस दिन तुझे मेरे घर से अन्न, जल तक नहीं दिया जाएगा। तब से लेकर आज तक जिस दिन सांप किसी को काट लेता है तो उस दिन कुंडू गोत्र के लोग किसी मेहमान, आगंतुक अथवा भिखारी को भी खाना नहीं देते।

उसी दिन से कुंडू गौत्र में परंपरा बनी कि कोई भी व्यक्ति सांप को नहीं मारेगा। ऐसी मान्यता है कि सांप के काटने से यहां कुंडू गौत्र के लोगों की मौत नहीं होती। यदि कोई सांप किसी व्यक्ति को काट भी लेता है तो उसे घर में ही जमीन पर लेटाकर महिलाओं द्वारा गीत गाकर उसका उपचार किया जाता है। इसके बाद व्यक्ति स्वस्थ हो उठता है। ठीक होने पर उसे नाग देव के मंदिर में ले जाकर दर्शन कराए जाते हैं।

सरपंच कुंडू बताते हैं कि 300 साल का इतिहास गवाह है कि सांप के काटने से यहां किसी की मृत्यु नहीं हुई है। नाग देव के मंदिर पर हर तीन साल के बाद भाद्र मास की पंचम को विशाल भंडारा लगाया जाता है, जिसमें उस दौरान पैदा हुए बच्चों को शामिल किया जाता है। अब तो यहां सांप लोगों के दोस्त बनकर रहते हैं। लोग उन्हें बच्चों की तरह पालते हैं।

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