Neha Kakkar First Time Respond On Question Of Ex Boyfriend Himansh Kohli

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

वैसे तो दुनिया बेहद खूबसूरत जगहों से भरी पड़ी है। लेकिन दुनिया में कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो बेहद खूबसूरत होने के बवाजूद आज तक वीरान पड़े हैं। जी हां, प्रकृति ने इन जगहों को इतना सुंदर बनाया है उसके बावजूद यहां कोई आता जाता नहीं। आज हम आपको दुनिया की कुछ ऐसी ही पांच जगहों से रूबरू कराएंगे।

डरावनी गुड़ियों का आइलैंड

मैक्सिको सिटी के बाहरी इलाके में मौजूद आइलैंड ऑफ दी डॉल्स हजारों टूटी फूटी और डरावनी गुड़ियों का घर है जो वहां पेड़ों और दीवारों पर टंगी हुई है। इन गुड़ियों के यूं टंगे होने के पीछे एक बेहद रहस्यमयी कहानी है। कहा जाता है कि आइलैंड की देखभाल करने वाले एक आदमी ने इन गुड़ियों को यहां टांगा था।

उसे इस आइलैंड की लहर पर एक छोटी लड़की अजीब सी हालत में मरी हुई मिली थी। साथ ही उसे लड़की की लाश के पास एक गुड़िया भी मिली थी। उसने उस लड़की को दफना कर सम्मान देने के लिए उस गुड़िया को एक पेड़ पर टांग दिया। थोड़े समय बाद उस आदमी को मरी हुई लड़की की आवाज और डरावने सपने आने लगे। और इसके बाद उसने अपनी जिंदगी के अगले 50 साल उस आइलैंड पर इस तरह की हजारों गुड़ियों को टांगने में लगा दिए। अगर आपको ये बात अजीब नहीं लगती तो इससे भी रहस्यमयी घटना उस आदमी की मौत होने पर हुई। जी हां , उस शख्स का शव उसी स्थान पर मिला जहां उसने उस लड़की को दफनाया

हाउस ऑफ द बल्गेरियन कम्यूनिस्ट पार्टी

1981 में बनी ये जगह सोवियत युग के दौरान कभी बल्गेरियन कम्यूनिस्ट पार्टी का केंद्र हुआ करती थी। लेकिन एक दशक से भी कम समय में सोवियत संघ के सदस्य देश और गैर सदस्य देशों के बीच की सीमा आयरन करटेन टूट जाने की वजह से ये बिल्डिंग सोवियत युग के अंत का प्रतीक बन गई। इसके बाद इस बिल्डिंग की हालत जर्जर हो गई। इसकी कई चीजे देखरेख न होने के कारण टूटकर गिर गई तो काफी चीजें चोरी हो गई। इस कारण इस जगह ने एक खण्डहर का रूप ले लिया। बाद में इस जगह को टूरिज्म के लिए रिस्टोर करने की कोशिश की गई लेकिन इसे फिर से जिंदा करने की अनुमानित लागत बहुत ज्यादा है इसलिए ये जगह यूं ही वीरान पड़ी है।

मार्लबोरो साइक्राइट्रिक अस्पताल

यह अस्पताल अमेरिका में अपने काले इतिहास के लिए जाना जाता है। 1931 में खुले इस अस्पताल में अगले 65 साल में अजीबोगरीब वारदातें हुई जिसमें मरीजों का रहस्यमयी ढंग से गायब होना, आत्महत्या और दम घुटकर मरने जैसी घटनाएं शामिल थी। ये घटनाएं इतनी ज्यादा हो गई कि इसकी सरकारा द्वारा गोपनिय रूप से जांच कराई गई। सेनिटर रिचर्ड जे कोडी को अपने अंडर कवर ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में एक कर्मचारी की हैसियत से एंट्री मिल गई। कोडी को बाहरी कोटेज में काम करने के लिए कहा गया। कोडी का बैकग्राउंड किसी ने चैक नहीं किया। कोडी ने चुपके-चुपके अपनी जांच में पता लगाया कि इस अस्पताल में मरीजों पर पिछले 60 साल से मरीजों का शोषण और गैरकानूनी मेडिकल एक्सपेरीमेंट किए जा रहे थे। इसके बाद अस्पताल पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

कोलमैन स्कोप नामीबिया

20 वीं शताब्दी की शुरुआत में जर्मन उपनिवेशों द्वारा बसाया गया कोलमैन स्कोप का ये शहर नामीब मरुस्थल में 1950 के बाद से वीरान पड़ा है। यहां जर्मन हीरे-जवाहरात की खौज में यहां आए थे। अपना काम पूरा हो जाने के बाद वे यहां से चले गए। उनके बाद कोई यहां नहीं आया। अब यहां महज लकड़ी से बनी इमारते ही बची हैं जो धीरे-धीरे ढहती जा रही हैं। कई जगहों पर तो यहां मरुस्थल का रेत भर गया है। इस वजह से अब ये जगह और भी डरावनी लगने लगी है। शायद यही वजह है कि लोग यहां आकर रहना नहीं चाहते। बस तब से लेकर आजतक यह स्थान वीरान पड़ा है।

प्रिपेयत शहर, यूक्रेन

यह 1986 में अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट त्रासदी के लिए जाना जाता है। प्रिपेयत के करीब चेरनोबिल 26 अप्रैल 1986 की रात को अचानक तेज धमाके साथ सुर्खियों में छा गया। वहां स्थित परमाणु रिएक्टर में बिजली की मात्रा में बढ़ोतरी से पैदा हुई अत्यधिक गर्मी से चार मंजिला इमारत फट पड़ी और परमाणु रेडिएशन ने उत्तरी मध्य यूरोप को भी अपने आगोश में ले लिया।

कुल 31 मौतें हुई और चार साल में लगभग चार लाख लोगों को यहां से विस्थापित होना पड़ा। अब भी कैंसर और विक्लांगता से  यहां लोग जूझ रहे हैं। विकिरण इतना भयंकर था कि उसे रोकने के प्रयास आज भी किए जा रहे हैं। ये शहर अब वीरान पड़ा है। जिंदगी की बची कुछ निशानियां अब भी यहां देखी जा सकती है। परमाणु विकिरण से ग्रसित ये शहर अब पूरी तरह से खाली है। 

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