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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

भारत का इतिहास दुनिया के सबसे समृद्ध देशों के इतिहासों में से एक माना जाता है। भारत के इतिहास में अनेकों ऐसी घटनाएं हुई हैं जो कि एक रहस्य बनकर रह गईं हैं। इन रहस्यों में से कई अभी तक अनसुलझे ही हैं।

भारत के इतिहास के कुछ अनसुलझे रहस्य जानिये

भगत सिंह और गांधी जी

कई आमजनों और इतिहासकरों का मानना है कि भगत सिंह की फांसी की सजा रोकी जा सकती थी, अगर महात्मा गांधी अंग्रेजों के ऊपर कुछ दबाव डालते। लोगों का ऐसा मानना था कि महात्मा गांधी ने भगत सिंह को जानबूझकर नहीं बचाया क्योंकि भगत सिंह का आक्रामक तरीका उनकी अहिंसा की विचाराधारा से कुछ अलग था।

सुभाषचंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की हत्या का शक

कई लोगों का ऐसा मानना होता है कि सुभाष चंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुख्रर्जी की मौत के पीछे भारत के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू का हाथ था। इतिहासकारों के अनुसार नेहरू को सुभाष चंद्र बोस के द्वारा अपनी सत्ता के छीने जाने का डर था, इसलिए नेहरू ने उनकी मौत को अंजाम दिलवाया। हालांकि यह अभी तक एक रहस्य बना हुआ है। साल 2004 में अटल बिहारी बाजपेई ने श्यामा फ्रसाद मुखर्जी की मौत को नेहरू षड्यंत्र बताया था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पेनिसिलिन से एलर्जी थी और डॉक्टरों को इस बात की जानकारी दिये बिना इन्हें पेनिसिलिन लगवा दी गई।

संजय गांधी की मौत

संजय गांधी की मौत को एक हादसा बताया जाता है लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो कि संजय गांधी की मौत को इंदिरा गांधी का षड्यंत्र बताते रहे हैं। हालांकि इस तरह के कभी भी कोई सबूत नहीं मिले हैं।

जोधपुर में एलियंस

साल 2012 दिसंबर में जोधपुर में देर रात एक बहुत जोर का शोर सुनाई दिया। लोगों ने इस वायुसेना का प्रयोग समझा लेकिन वायुसेना ने तत्काल प्रभाव से इसे नकार दिया। बाद में एक ऑनलाइन वेबसाइट ने बताया कि उस दिन ऐसी जोरों की आवाज यूएसए और यूके में भी एक साथ सुनाई दी थी। कुछ लोगों की मान्यता थी की यह एलियंस की लैंडिंग भी हो सकती थी।

राइट बंधु का विमान

विमान के आविष्कार का श्रेय राइट बंधु को दिया जाता है। लेकिन एक थ्योरी यह भी है कि साल 1895 में शिवकर बापूजी तलपाडे नामक भारतीय युवक ने मानवरहित प्लेन बनाया था। इस प्लेन का नाम मारुतसखा रखा गया था। ब्रिटिश सरकार की तरफ से रिले ब्रदर्स की कंपनी ने तलपाडे से भेंट करके जहाज के डिजाइन एवं नोट्स देने को कहा। इसके बदले में सरकार ने उन्हें आर्थिक मदद देने को भी कहा।

नंदा देवी और सीआईए

साल 1965 में सीआईए की एक टीम नें नंदा देवी की चोटी पर एक सेंसिंग डिवाइस लगाया, य़ह चीन के न्यूक्लियर टेस्ट की जासूसी के लिए लगाया गया था। अचानक तेज बर्फीला तूफान आने के बाद सीआईए की टीम को वह जगह छोड़कर जानी पड़ी। मई साल 1966 में टीम जब वहां वापस आई तो वहां फिर कुछ नहीं मिला था।

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