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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

भारत एक ऐसा विशाल और प्राचीन देश जो अपने आप में ना जाने कितनी घटनाओं को समेटे हुए है और जब यह देश इनता प्राचीन है तो इसकी कुछ कहानियां ऐसी भी है जो आज तक पहेली बनी हुई हैं और कुछ घटनाएं ऐसी भी है जिनका विज्ञान के पास कोई जवाब नहीं । आइये जानते है ऐसी ही कुछ रहस्यों के बारे में:-

द कोंग्का ला दर्रा

दुनिया के सबसे रहस्यमयी इलाको में से एक है लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा जिसके बारे में कहा जाता है की यहां अंतरिक्ष जीवों का गुप्त स्थल है और इसी कारण यहां पर युएफओ का दिखाई देना आम बात है और स्थानीय नागरिक भी इन बातों की पुष्टि करते है और तो और साल 2006 के जून में गूगल के सैटेलाईट ने भी इस जगह की कुछ ऐसी तस्वीरे ली थी जिसमें रहस्यमयी यूएफओ दिखाई देने का जिक्र है । लेकिन इस जगह जाना सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि यह बहुत ही बर्फीला और दुर्गम क्षेत्र है और सबसे बड़ी बात यह की यह जगह भारत-चीन की विवादित जगह भी है, जहां पर दोनों नजर तो रखते है लेकिन कोई पेट्रोलिंग नहीं करता।

क्या ताजमहल, तेजोमहालय है ?

यह आधुनिक इतिहासकारों के बीच का सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है और सबसे बड़े एतिहासिक रहस्यों में से भी एक बन चुका है की क्या वास्तव में ताजमहल ही तेजोमहालय है? अगर दिल्ली के प्रोफेसर और इतिहासकार पी.एन. ओक की लिखी पुस्तक पर यकीन माने तो यह महान इमारत जयपुर के राजा के अधीन थी और जब शाहजहां ने इसे जबरन अपने अधीन किया तो इसमें कुछ बदलाव कर इसे एक मकबरे की शक्ल दे दी गयी और आजाद भारत के इतिहासकारों ने बिना कुछ सोचे समझे इसे ज्यो का त्यों इतिहास में शामिल कर लिया । इसके अलावा कुछ और इतिहासकारों ने कुछ और भी साक्ष्य पेश किये है कि तब के किसी भी लेख में ताजमहल के बनने का उल्लेख क्यों नहीं है और ताजमहल की कार्बन डेटिंग भी कुछ और ही कहानी बयां करती है । बहरहाल जब तक सरकार खुद आगे आ कर इस रहस्य पर से पर्दा नहीं हटाती तब तक यह एक रहस्य ही रहेगा।

प्रहलाद जानी

प्रहलाद जॉनी को दुनिया का सबसे ज्यादा रहस्यमयी इंसान माना जाता है, और इन्हें कुछ लोग सुपरह्यूमन भी कहते है । कहा जाता है कि प्रहलाद जॉनी ने 70 सालों से कुछ भी नहीं खाया है और उनके इसी दावे की सत्यता को परखने के लिए उनपर चौबीसों घंटे की 15 दिनों की निगरानी भी रखी गयी थी लेकिन अंत में हर कोई आश्चर्यचकित था की इन्होने इस दौरान अन्न का एक दाना भी नहीं खाया था और इनके किसी भी प्रकार की बिमारी और कमजोरी के कोई लक्षण भी नहीं थे प्रहलाद जॉनी इस बात का श्रेय अपनी आराध्य मां भगवती जगदम्बा को देते है जिनके आशीर्वाद के कारण ही इनको ऐसी अवस्था प्राप्त हुई ।

अशोक की लाट

दिल्ली में कुतुबमीनार के पास ही सैंकड़ों साल से “अशोक की लाट” शान से खड़ी है और आज तक इस पर जंग भी नहीं लगा । कई देशों के वैज्ञानिक इस पर अनेक बार अध्यन कर चुके है लेकिन आज तक कोई इसका रहस्य नहीं जान पाया और वह इस बात पर हैरान हैं कि आखिर हज़ारों साल पहले क्या भारत में वास्तव में इतनी उन्नत तकनीक थी जो ऐसी धातु बना सकते थे और जिस तरह इस लाट को प्रदर्शन हेतु स्थापित किया गया है उससे तो पता लगता है की वास्तव में प्राचीन भारतीय आधुनिक विज्ञान से भी कही ज्यादा आगे थे और इस लाट के कारण ‘9 लोगो की संस्था’ सिद्धांत को भी बल मिला।

सम्राट अशोक के रहस्यमयी 9 लोगो की संस्था

सम्राट अशोक के रहस्यमयी 9 लोगो का दल भी भारत के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है, जिनके बारे में कहा जाता है कि कलिंग की लड़ाई के बाद सम्राट अशोक ने तब के सबसे और बुद्धिमान लोगो को लेकर एक संस्था का निर्माण किया था जिनके पास ज्ञान का अदभुत खजाना था और यह 9 लोग अपनी अपनी 9 विद्याओं में परांगत थे और इस संस्था का वास्तविक उद्देश्य इस ज्ञान को गलत हाथो में जाने से रोकना था और तभी से यह लोग इन विद्याओं की रक्षा करते आ रहे है जिनकी संख्या हमेशा से ही 9 रही है ।

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