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कमीशनखोरी के चक्‍कर में सरकारी अस्‍पताल बदहाल : रविदास मेहरोत्रा

            

exclusive interview of ravidas malhotra

दि राइजिंग न्‍यूज

अजय दयाल

इस बात में दो राय नहीं कि अखिलेश सरकार में परिवार एव कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने जब से स्‍वास्‍थ्‍य महकमे की कमान संभाली है विभाग में खलबली मची हुई है। आए दिन किसी न किसी अस्‍पताल का दौरा, प्रमुख सचिव चिकित्‍सा स्‍वास्थ्‍य से लेकर अस्‍पताल और अधीक्षकों से जवाब-तलब और इतना ही नहीं लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करना उनकी आदत में शुमार है। 


नतीजन स्‍वास्‍थ्‍य महकमे में हलचल दिखना स्‍वाभाविक ही है। दि राइजिंग न्‍यूज के खरी-खरी कॉलम के तहत हुई बातचीत में कई बातें, भावी योजनाएं, व्‍यवस्‍थाएं स्‍वास्‍थ्‍य महकमे की हकीकत सामने आईं जिसे यहां हम अपने पाठकों के साथ साझा कर रहे हैं।


सवाल- इस वक्‍त आप परिवार कल्‍याण,मातृ एवं शिशु कल्‍याण विभाग के मुखिया हैं...क्‍या सुधार करने की मंशा रखते हैं?

जवाब- डॉक्‍टर्स कमीशनखोरी के चक्‍कर में प्राइवेट अस्‍पतालों को फायदा पहुंचाते हैं, इसी परम्‍परा को मैं सबसे पहले सुधारना चाहता हूं।


सवाल - इस परम्‍परा से आपने अपने विभाग को अपने काम से कैसे प्रभावित किया ?

जवाब - एक उदाहरण देता हूं। ठाकुरगंज लखनऊ के एक अस्‍पताल में बीते पौने दो सालों से एक भी प्रसव नहीं हुआ। जबकि एक पूरा प्रसव वार्ड है वहां। सीधा कारण है अस्‍पताल में आने वाली गर्भवतियों को अस्‍पताल की खामियां गिनाकर प्राइवेट नर्सिंग होमों में भेज दिया जाता है।


सवाल - तो क्‍या कार्रवाई की आपने?

जवाब - मैंने विभागीय समीक्षा बैठक में उस अस्‍पताल के अधीक्षक को बुलाकर न केवल फटकार लगाई है बल्कि कारण बताओ नोटिस भी थमाया है। जवाब आते ही आगे की कार्रवाई करूंगा।


सवाल - अस्‍पतालों का दौरा कर क्‍या देखा आपने?

जवाब - कही चादरें गंदी हैं तो कहीं मशीनें खराब पड़ी हैं। बेड, स्‍ट्रेचर होते हुए भी कबाड़ में पड़े हैं। डॉक्‍टर्स, स्‍टाफ टाइम से अस्‍पताल नहीं पहुंचते...मेरे दौरों से सुधार हुआ है।


सवाल - अस्‍पतालों में स्‍टाफ की कमी भी तो बहुत है?

जवाब - हां, मैंने तत्‍काल स्‍टाफ की कमी को पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। महिला और पुरुष कार्यकताओं की भर्ती के अतिरिक्‍त, आशा बहुओं की कमी को पूरा करने पर कार्यवाही शुरु हो गई है।


सवाल - पिछले दिनों एक प्रशंसनीय आदेश हुआ कि सरकारी अस्‍पतालों में मरीज की मत्‍यु के बाद उनके परिजनों को शव वाहन की सेवा फ्री मिलेगी। क्‍या हुआ आदेश का?

जवाब - चालीस जनपदों में नए शव वाहनों की खरीददारी सरकार ने कर ली है। बाकी जनपदों में भी ऐसा किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि मरीज की मौत से दुखी परिजनों को नि:शुल्‍क सेवा उसके प्रिय के शव को घर पहुंचाने की की जाए।


सवाल - अगर लखनऊ से सटे दूसरे जनपदों का कोई मरीज जिसकी लखनऊ के अस्‍पताल में मौत हो जाय तो?

जवाब उदाहरण लीजिए अगर बाराबंकी या सीतापुर से आए। किसी मरीज की मौत लखनऊ के किसी अस्‍पताल में हो जाए तो अस्‍पताल का शव-वाहन उसे उसके घर तक नि:शुल्‍क पहुंचाकर आएगा। अगर उस मरीज के जनपद में कोई शव-वाहनखाली है तो यहां का वाहन बॉर्डर तक पहुंचाएगा, जहां से उसे दूसरा वाहन अपनी सेवा देगा।


सवाल - चुनाव सिर पर है। स्‍वास्‍थ्‍य महकमे की भर्तियां और योजनाओं पर चुनावी आचार संहिता का अंकुश लग जाएगा?

जवाब - मुझे नहीं लगता कि जन स्‍वास्थ्‍य की दृष्ट‍ि से स्‍वास्‍थ्‍य महकमे की सार्थक प्रक्रियाएं प्रभावित होनी चाहिए। 

 

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