Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।  


नए वादों का जो डाला है वो जाल अच्छा है, दिल के बहलाने को गालिब यह ख्याल अच्छा है .  . 

देश के सबसे बड़े सूबे का जो बजट मंगलवार को आया, वह लुभावना भी है और हर वर्ग को बजट में शामिल किया गया है। इस काऱण से बजट की आकार पिछले बजट के मुकाबले करीब 12 फीसद बड़ा हो गया। सरकार ने भी दावा कर दिया कि फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाकर सारा फंड एकत्र कर लिया जाएगा लेकिन गुजरे तीन महीनों को देखें तो यह काफी चुनौती पूर्ण नजर आता है।


मुख्यमंत्री योगी की सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को प्रदेश का बजट पेश किया। कुल बजट 3.84 लाख करोड़ का था जबकि पिछला बजट करीब 3.40 लाख करोड़ का था। लिहाजा इस बार बजट करीब 12 फीसद ज्यादा है। यह बात भी दीगर है कि सरकार ने भी प्रदेश को बड़ा सूबा करार देते हुए बजट को बड़ा करने की बात साफ कर दी थी।


अब जरा बजट को देखें, तो सबसे ज्यादा खर्च किसानों के ऋणमाफी पर किया जाएगा यानी 36000 हजार करोड़ रुपये की ऋण माफी। अब सवाल यह उठता है कि इसके लिए पैसा कहां से मिलेगा। खैर यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। खास बात यह है कि ऋण माफी की घोषणा प्रदेश सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कर दी थी लेकिन उसके बाद भी किसानों का ऋण अभी तक माफ नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि बैंक द्वारा नोटिस न भेजने के संबंध में मुख्यमंत्री ने आदेश जरूर जारी कर दिए हैं लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि आखिर यह पैसा लाया कहां से जाएगा।


इसी तरह से सरकार ने सवर्ण वोट बैंक व आस्था को भी खासा ध्यान में रखा है। यही वजह कि पूर्वांचल एक्सप्रेस के जरिए काशी विश्वनाथ और अयोध्या को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसी तरह से रामायण सर्किट में चित्रकूटधाम स्थित कादमगिरी पर्वत की परिक्रमा के मार्ग के जीर्णोद्धार का काम भी शामिल कर लिया गया है। रोजगार के नाम पर सरकार पुलिस में भर्ती को हरी झंडी देने जा रही है और इस बहाने रोजगार प्रदान करने का वादा भी पूरा होता नजर आ रहा है। 


बजट में कई शहरों में मेट्रो रेल का प्रावधान हैं तो सड़कों के रखरखाव, महिला –बाल कल्याण, मिड डे मील, सर्वशिक्षा अभियान तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए धन आवांटित किया गया है लेकिन, सवाल यह है कि तंग हाल सरकारी खजाने से इन योजनाओं और कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ, अन्नपूर्णा भोजनालय और राज्यकर्मचारियों के बकाया एरियर के भुगतान की राह कैसे निकलेगी।


ये बनेंगे अड़ेंगे


सरकार की राह में बड़ी चुनौती केंद्र सरकार द्वारा लागू गुड्स एंड सर्विस टैक्स ही बनने जा रहा है। कारण है कि 15 सितंबर तक सरकार ने प्रवर्तन कार्यों पर रोक लगा दी है। इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ना ही है। इसी तरह से राष्ट्रीय राजमार्गों से शराब की दुकानें हटाए जाने से आबकारी राजस्व में भी कमी आई है। जबकि ये दोनों सरकार के राजस्व संग्रह के मुख्य स्रोत हैं। 


गुड्स एंड सर्विस टैक्स के नाम पर पूरे प्रदेश में धड़ल्ले से कालाबाजारी चल रही है जबकि बड़े कारोबारी जीएसटी जटिलताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार अपना राजस्व लक्ष्य कैसे पूरा करेगी, यह अपने आप में सवाल है। यही नहीं, वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी लागू होने के साथ राज्य व केंद्रीय कैडर की लड़ाई भी खुलकर सामने आ गई है। अधिकारी भी आंदोलन की राह पर हैं। किसान भी सरकार से रवैये से नाराज दिख रहे हैं तो कर्मचारी भी हड़ताल की तैयारी में है।


हताश हैं किसान


भारतीय किसान यूनियन के नेता हरनाम सिंह वर्मा के मुताबिक चुनाव के वक्त भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहीं नहीं कहा था कि केवल सीमांत व लघु किसानों का ऋण माफ किया जाएगा। अगर यह विकल्प दे दिया गया होता तो शायद फैसला भी कुछ अलग होता। जिन किसानों का ऋण माफ होना भी है, फिलहाल उन्हें राहत नहीं है। गन्ना किसानों का भी करीब 2800 करोड़ बकाया ही है। किसान सरकार से बहुत उम्मीद लगाए बैठे हैं और आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है।


विपक्ष ने बताया कोरा स्टंट


समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस के नेताओं ने प्रदेश सरकार के बजट के प्रावधानों की तारीफ की है लेकिन उसे पूरा करने के दावों को महज स्टंट करार दिया है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कहना है कि सरकार किसानों का कर्ज कैसे माफ कर पाएगी, यही अपने आप में सवाल है क्योंकि बजट में आय के सीमित स्रोत बताए गए हैं और केंद्र सरकार पहले ही इसमें किसी तरह की मदद देने से इंकार कर चुकी है।


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