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भ्रष्टाचार का स्पेशल ऑडिट

Rising At 8am | 06-Jul-2017 | Posted by - Admin

  • जनेश्वर मिश्र पार्क, हेरीटेज जोन और रिवर फ्रंट में खर्च का होगा आडिट
  • जनता के धन लूट पर सरकारी जांच का मुलम्मा

   
Yogi Government Audit of Samajwadi Gvt Expenses in Various Schemes

दि राइजिंग न्यूज


संजय शुक्ल

लखनऊ।

सरकारी विभागों में अनाप-शनाप खर्च और अनियमितता का ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा होने की बात अक्सर सामने आती रही है लेकिन प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार का ऑडिट बहुत कम देखने को मिलता है। खास बात यह है कि ये तमाम घोटाले 25 अरब से ज्यादा के हैं लेकिन सरकार फिलहाल कार्रवाई से बचती ही दिखाई दे रही है। जी हां, प्रदेश की योगी सरकार रिवर फ्रंट, जनेश्वर मिश्र पार्क तथा हेरीटेज जोन में हुए घोटालों की शिकायतों व व्यय का ऑडिट कराएगी। इसकी तैयारी भी पूरी कर ली गई है लेकिन भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद सरकार का यह यू टर्न गले नहीं उतरता है। तमाम अधिकारी इसके पीछे की वजह राजनैतिक दोस्ताना मानते हैं और इस कारण से इसे पूरे प्रकरण को अब जैसे तैसे ठिकाने लगाने की तैयारी चल रही है।



दरअसल ड्रीम प्रोजेक्ट के नाम पर पूर्ववर्ती सरकार ने बड़े पैमाने पर जनता के धन की बरबादी की। जनेश्वर मिश्र पार्क में नौ करोड़ रुपये से सांप पकड़वाए गए तो करोडों रुपये की गंडोला नावें व पैडल बोट मंगवाई गई। विदेशों से मंगाई गई इन नावों की क्वालिटी ऐसी थी कि अब इनमें आधी से ज्यादा खराब हो चुकी हैं। इनकी मरम्मत से कार्यदायी एजेंसी भी हाथ खड़े कर चुकी है। 



यही हाल हुसैनाबाद हेरीटेज जोन में भी है। करीब तीन हजार रुपये वर्ग मीटर के दाम से बिछवाए गए काबल स्टोन पहली बारिश के बाद उखड़ने लगे। खुद आवास मंत्री सुरेश पासी ने जांच में पाया कि काबल स्टोन लगाने के लिए कंक्रीट के स्थान पर केवल बालू डाली गई थी। मगर कार्रवाई कुछ न हुई। तमाम अधिकारी-अभियंता जिनके संरक्षण में काम हुआ, वे स्थानांतरित होकर दूसरे शहर पहुंच चुके हैं और सरकार की जांच जारी है। इतना जरूर है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को सबक सिखाने व दंडित करने के नेताओं के जुमले लगातार सुनने को मिल रहे हैं। 


गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है। इसके निर्माण के दौरान ध्वस्त हुए गोमती बैराज की मरम्मत नौ महीने बाद भी नहीं हो सकी है। न ही किसी की जिम्मेदारी फिक्स हुई है। इसका खामियाजा आम लोग जरूर भुगत रहे हैं जिन्हें अब गोमतीनगर से आने जाने के लिए समता मूलक चौराहे से 1090 चौराहे तक चक्कर काटना पड़ रहा है। इसी तरह से गोमती के तमाम बैरल भी बंद है और सुरेंद्र नगर, पटेल नगर में कालोनियों में नाव चल रहीं है। जल निकासी की व्यवस्था ध्वस्त हो गई है लेकिन सरकार सख्ती के साथ लोगों को हित में काम करने का दम भरते नहीं थक रही है।


सिर्फ जांच पर जांच

दरअसल पूर्व सरकार में हुए घोटालों के लिए सरकार भले ही सख्त रुख दिखाती रही हों लेकिन हकीकत में इसमें केवल जांच ही हो रही है। एक जांच रिपोर्ट आती है और दूसरी शुरू हो जाती है। पहले आवास मंत्री सुरेश पासी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी। उसके बाद नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में बनी समिति ने। मगर कार्रवाई नहीं हुई अलबत्ता अब सारे घोटालों का आडिट कराने की तैयारी जरूर शुरू हो गई। यानी जनता के धन की लूट के आरोपियों को फिर संजीवनी मिल गई है।


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