Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

अब तो अपनी है सरकार अब डर काहे का ...  गाने की लाइनें राजधानी में प्रदूषण को लेकर जारी आदेशों और नियमों पर सटीक साबित हो रही है। प्रदूषण को देखते हुए पिछले दिनों डीएम ने आतिशबाजी को प्रतिबंधित कर रखा है। धारा 144 प्रभावी होने का दम भी भरा गया मगर शुक्रवार को नगर निगम के चुनावी नतीजे आने के बाद सारे नियम कानून दरकिनार हो गए। खास बात यह है कि जिस सदन (विधानसभा) में बैठकर नियम कायदे तय किए जाते हैं उसी के सामने जमकर आतिशबाजी हुई और इसका जश्‍न मनाने में सरकार भी पीछे नहीं थी।

 

भले ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने निकाय चुनाव की जीत पर पार्टी कार्यालय में जमकर आतिशबाजी की हो और समाचार पत्रों से लेकर टीवी चैनलों में इसकी फोटो और वीडियो भी खूब दिखाए गए हों लेकिन प्रशासनिक अधिकारी अभी तक मामले से अंजान बने हुए हैं। इतना ही नहीं प्रतिबंध की आड़ में पुलिस ने भी कमाई का नया जरिया खोज लिया और शादी समारोहों में आधे घंटे की मोहलत के नाम पर वसूलने होने लगी। हालांकि आतिशबाजी के नोडल अधिकारी एडीएम पश्‍चिम संतोष कुमार वैश्‍य ने मामले पर साफ तौर पर कह दिया कि उन्‍हें ऐसी कोई जानकारी ही नहीं है तो कार्रवाई कैसे करें। उल्‍लेखनीय है कि बीते दिनों प्रदूषण के बढ़ते स्‍तर को देखते हुए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शादी-समारोहों में आतिशबाजी करने पर प्रतिबंध लगा दिया। इतना ही धारा 144 लागू करते हुए तुंरत कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए थे।

भाजपा वालों को सत्‍ता का खुमार ऐसा चढ़ा कि ना तो उन्‍हें शहर का प्रदूषण दिखाई दे रहा है और ना ही जिला प्रशासन का कानून। यही कारण है कि कई थानों की फोर्स की मौजूदगी में जीत के बाद बंपर आतिशबाजी हुई। उन्‍हें रोकने की हिम्‍मत ना तो पुलिस वाले जुटा पाए और ना ही प्रशासन ने नोटिस भेजना जरूरी समझा। सरकार भी अपनी और कानून भी अपना इसी तर्ज पर भाजपा वालों ने घंटों तक आतिशबाजी की। जहां इनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही तो वहीं शादी समारोहों में भी स्‍थानीय पुलिस कमाई करते हुए आधे घंटे तक आतिशबाजी करने की छूट दे रही है। हालांकि यह सब चोरी छिपे ही चल रहा है क्‍योंकि बीते दिनों चौक, ठाकुरगंज, इंदिरानगर जैसी जगहों पर खूब पटाखे फोड़े गए हैं।

 

जबकि आतिशबाजी के फुटकर विक्रेता दुकानदार विवाह समारोहों में आतिशबाजी करने की अनुमति लेने जिला प्रशासन पहुंचे थे वहां पर एडीएम ने नीतिगत मामला बताते हुए बैरंग कर दिया था। दुकानदारों ने एडीएम से बताया कि कर्ज लेकर इस आस में आतिशबाजी खरीदी थी कि इन समारोहों से चंद पैसे कमाकर परिवार का पेट पाल लेंगे लेकिन प्रतिबंध ने उनकी कमर तोड़ दी। हालांकि अभी तक जिलाधिकारी ने भले ही अनुमति ना दी हो लेकिन पुलिस के साथ सेटिंग करते हुए आतिशबाजी तो होने ही लगी है।

 

प्रतिबंध बना कमाई का जरिया-

 

बढ़ते प्रदूषण पर जिलाधिकारी ने भले ही आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन यही प्रतिबंध अब पुलिस के लिए कमाई का जरिया बन गया है। चौक, ठाकुरगंज, इंदिरानगर जैसी जगहों में शादी के दौरान पुलिस वाले आधे घंटे की आतिशबाजी के लिए मोटी कमाई कर रहे हैं। यही कारण है कि शादी के दौरान रात में जमकर आतिशबाजी हो रही है और पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है।

 

“शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में जीत के बाद आतिशबाजी होने की कोई जानकारी ही नहीं है। इसलिए कार्यवाई करने का कोई अर्थ ही नहीं बनता है।“

संतोष कुमार वैश्‍य

एडीएम नोडल अधिकारी आयुध

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Loading...

Public Poll