Kajol Says SRK is Giving Me The Tips of Acting

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

दलित वोटों के सहारे 2019 में चुनावी नैया पार लगाने की जुगत में लगी भारतीय जनता पार्टी पदोन्नति में आरक्षण कार्ड को लेकर रार बढ़ती दिख रही है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के आदेश के बाद आरक्षण विरोधी के तेवर तल्ख हो गए हैं। इसके लिए आपात बैठक बुलाने के साथ ही 18 लाख कर्मचारियों-अधिकारियों द्वारा बड़े आंदोलन को शुरू करने की चेतावनी भी दे दी गई है।

उल्लेखनीय है कि पदोन्नति में आरक्षण को लेकर आरक्षण समर्थक काफी समय से सरकार के खिलाफ थे। 2019 लोकसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी भी दलित वोटों के लिए लगातार मशक्कत कर रही थी और इसी के मद्देनजर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को दोबारा लागू करने की बात कही गई थी। हालांकि सरकार के इस कदम के बाद से आरक्षण विरोधी लगातार विरोध कर रहे थे। इसे लेकर आरक्षण समर्थक व विरोधी के बीच रार बढ़ने लगी थी।

शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में पदोन्नति में आरक्षण लागू करने आदेश के बाद अब यह रार एकदम से तेज हो गई है। इसके पहले आरक्षण का विरोध कर रही सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ रविवार 17 जून को देश भर में चेतावनी दौड़ की घोषणा की थी। वहीं आरक्षण का समर्थन करने वाले संगठन में भी 17 जून को मार्च करने की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार के फैसले के बाद आरक्षण विरोधी समिति ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के संयोजक ई. शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण को कई राज्यों में समाप्त किया जा चुका है मगर वोटों की खातिर इसे लागू कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रदेश के 18 लाख कर्मचारी अधिकारी आक्रोशित हैं। अब केंद्र सरकार ने इसका आदेश जारी कर दिया है, लिहाजा अब आरपार की लड़ाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश की गलत व्यख्या की जा रही है और इसके खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए आपात बैठक बुलाई गई है।

उल्टा पड़ सकता है दांव

पदोन्नति में आरक्षण का मामला भारतीय जनता पार्टी के लिए दोधारी तलवार सरीखा हो चुका है। दरअसल दलित वोटों की खातिर सरकार पदोन्नति में आरक्षण की बात कर रही है जबकि इसके प्रभावित सामान्य वर्ग हो रहा है। इसके पहले मायावती सरकार के दौरान पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था लाग की गई थी जिसका जबरदस्त विरोध हुआ था। बाद में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को सत्ता में आयी समाजवादी पार्टी ने समाप्त कर दिया था। परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर प्रोन्नति पाने वाले अधिकारियों को भी पदावनत किया गया। अब एक बार फिर से इस फिर वहीं मुद्दा सामने आ रहा है। सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के सदस्यों का कहना है कि इसका परिणाम केंद्र की सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

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