Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

आपने कहावत जरूर सुनी होगी, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग - - ।

 

यह मिसाल प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और सरकार के दावों पर एकदम सटीक बैठती है। एक दिन पहले सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। सरकार भी लगाम लगाने की डींगे हांकने लगी मगर हकीकत यह है कि अधिसंख्य स्कूलों बच्चों की फीस जमा हो चुकी। अभिभावक कापी-किताब ड्रेस खरीद चुके हैं। अब क्या होगा। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। प्राइवेट स्कूलों ने भी पंद्रह से बीस फीसद तक फीस बढ़ा ही नहीं ली बल्कि वसूल भी लीं। ऐसे में सवाल यह है कि सरकार फैसला लागू कैसे होगा। क्या अभिभावकों को बढ़ी हुई फीस वापस होगी।

 

दरअसल निजी स्कूलों पर मनमानी पर अंकुश लगाने का दावा विगत वर्ष भाजपा की सरकार बनने के बाद किया गया था। मगर करीब दस महीने तक इस मुद्दे पर सरकार खामोश बैठी रहीं। उधर, स्कूलों में फीस बढ़ाने से लेकर कापी-किताब में कमीशनखोरी धंधा फलता फूलता रहा। राष्ट्रीय राजधानी के नाम वाले एक नामचीन स्कूलों में  जानकीपुरम, शहीदपथ और गोमतीनगर परिसर से ही बच्चों की कापी किताब बेची गईं। राजधानी में सबसे ज्यादा शाखाओं वाले स्कूल तथा कई चैनलों पर एक घंटे तक विज्ञापन करने वाले स्कूल में भी कापी किताब से लेकर ड्रेस का गोरखधंधा जमकर हुआ। पिछले साल व सर्दियों में यहां पर ड्रेस बदली जा चुकी है। स्कूल के अलावा महज चंद हजार रुपये की संपत्ति के मालिकाना हक का दावा करने वाला स्कूल प्रबंधन पिछले दस महीनों में स्कली वार्षिक आय व्यय का ब्यौरा नहीं दे सका है। इसकी जांच डिप्टी रजिस्टार के पास लंबित है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा के निर्देश पर शुरू हुई जांच नतीजे तक तो नहीं पहुंची, दाखिल दफ्तर जरूर हो गई।

माध्यमिक शिक्षक संघ के नेताओं के मुताबिक दरअसल प्राइवेट स्कूल अब नेताओं और पूंजीपतियों के लिए इंडस्ट्री का रूप ले चुके हैं। सरकार इनकी मनमानी पर लगाम लगाने के लिए नियम बना रही है, यह स्वागत योग्य है लेकिन सवाल यह है कि जिन स्कूलों ने अपनी फीस पहले बढ़ा ली है, उनका क्या होगा। क्या स्कूल प्रबंधन से उनकी फीस वापस कराई जाएगी। अगर फीस वापस कराई जाएगी तो उसके लिए अभिभावक को क्या करना होगा। माध्यमिक शिक्षक संघ के आरपी मिश्र कहते हैं कि सरकार की पहल स्वागत योग्य है लेकिन सवाल यह है कि इसका इंप्लीमेंट कैसे होगा। बिना दृढ़ इच्छा इस काम होना आसान नहीं है।

 

अभी तो शासनादेश का इंतजार

कैबिनेट ने स्कूल में मनमानी फीस वसूली की शिकायत पर मान्यता रद करने तक का प्रावधान कर दिया है। स्कूलों को अधिकतम पांच फीसद तक फीस वृद्धि करने की छूट दी है लेकिन उसे अपनी आय-व्यय का विवरण वेबसाइट पर जारी करना होगा। इसके अलावा पांच साल से पहले कोई स्कूल अपनी ड्रेस नहीं बदल सकेगा। स्कूलों अभिभावकों को किसी एक-दो दुकान से कापी-किताब खरीदने के लिए भी बाध्य नहीं कर सकेंगे। सरकार ने तमाम फैसले तो लिए हैं लेकिन इस संबंध में कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है।

तो वापस कराई जाएगी फीस

सेंट जोजेफ ग्रुप आफ स्कूल के प्रबंध निदेशक अनिल अग्रवाल के मुताबिक सरकार ने स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्याल (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश 2018 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस संबंध में अध्यादेश व शासनादेश जारी होना बाकी है। उसका अध्ययन किया जा रहा है। शिक्षण के क्षेत्र में जो लोग काम कर रहे हैं, उनके पांच से सात फीसद तक वार्षिक फीस इजाफा ठीक है। रही बात नए सत्र में ज्यादा फीस वसूली की तो सरकार द्वारा तय प्रावधान के मुताबिक अभिभावकों को फीस की वापसी की जाएगी। हालांकि इसकी प्रक्रिया क्या होगी, यह अभी तय नहीं है। कापी-किताब स्टेशनरी की स्कूल परिसर या फिर चुनींदा दुकानों से बिक्री कराने वाले अंकुश लगाने का काम शासन –प्रशासन का है।  

 

 

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