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दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ।

 

जांच के दौरान अगर आपके पास वाहन का पंजीयन प्रमाणपत्र, प्रदूषण प्रमाणपत्र, लाइसेंस आदि नहीं है तो अब आपका उपलब्ध दस्तावेज जमा नहीं कराया जाएगा बल्कि केवल ई चालान किया जाएगा। चालान होने के साथ ही वह सीधे सॉफ्टवेर पर इंडोर्स हो जाएगा। यानी वाहन कोई रसीद नहीं मिलेगी बल्कि केवल ऑनलाइन वाहन रिकार्ड पर दर्ज हो जाएगा। उसके बाद वाहन स्वामी अपने चालान का शमन व प्रपत्र आनलाइन ही वैरीफाई कराकर रिलीज आर्डर पा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इसमें मामूली धाराओं में होने वाले चालान वाहन स्वामी को आरटीओ दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

 

दरअसल हेलमेट –सीट बेल्ट, दोषपूर्ण नंबर प्लेट, ब्लैक फिल्म आदि के प्रकरणों में चालान राशि बहुत कम होती है। इन नियम उल्लंघन में मौके पर ही शमन का भी प्रावधान है लेकिन कई बार मौके पर शमन न होने पर वाहन के दस्तावेज प्रवर्तन अधिकारी द्वारा रख लिए जाते हैं। चालान भुगतने के बाद कागज वापस मिलते हैं और कई बार इसमें कई दिन लग जाते हैं। इसी को देखते हुए अब ई चालान को प्रोत्साहित करने के साथ ही चालान प्रक्रिया को पेपरलेस करने की शुरुआत की जा रही है।

अप्रैल तक सभी दफ्तरों में वाहन साफ्टवेयर

परिवहन विभाग के संभागीय परिवहन अधिकारी (आईटी) संजयनाथ झा के मुताबिक प्रदेश में सभी 76 परिवहन दफ्तर अप्रैल तक वाहन चार साफ्टवेयर से जुड़ जाएंगे। ई चालान होने पर इस साफ्टवेयर पर यह वाहन के रिकार्ड पर अपने आप दर्ज हो जाएगा। यानी वाहन के रिकार्ड पर जब चालान समाप्त नहीं होगा, यह परिलक्षित होता रहेगा।

 

सभी आरटीओ व प्रवर्तन अधिकारियों को मिले टैबलेट

परिवहन आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में सभी आरटीओ (प्रशासन व प्रवर्तन) सहित प्रवर्तन अधिकारियों को ई टैबलेट मिल गए हैं। जोनल अधिकारियों को भी विभाग द्वारा ई चालान के लिए टैबलेट दिए गए हैं और इनकी रिपोर्ट भी तैयार हो रही है। यानी कौन अधिकारी कहां और कितना प्रवर्तन कार्य कर रहा है, इसकी भी निगरानी शुरू हो गई। इसका मकसद पेपरलेस चालान व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के साथ ही अधिकारियों को नियमित जांच के लिए प्रेरित करना है।  

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