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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

परिवहन विभाग में फार्च्यूनर गाड़ी के पंजीयन व टैक्स की फर्जी रसीद जिस कंप्यूटर से काटी गई थी, उसकी कंप्यूटर आईपी परिवहन विभाग को मिल गई है। इसके जरिए अब कंप्यूटर स्वामी का पता किया जा रहा है। इसके लिए आईपी को दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को भेजकर उनसे इसका विवरण मांगा गया है। फर्जी रसीद का मामला पिछले सप्ताह शुक्रवार को पकड़ा गया था। उसके बाद से ही रसीद लाने वाला एजेंट फरार है जबकि विभागीय जांच चल रही है।

 

दरअसल पिछले सप्ताह शुक्रवार को फार्च्यूनर गाड़ी के लिए फैंसी नंबर बुक कराने वाली एक शख्स की फाइल आरटीओ दफ्तर में रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंची थी। अपरान्ह 3.55 बजे काटी गई यह रसीद फर्जी थी जबकि रसीद लेकर पहुंचा एजेंट कई घंटे तक वाहन के पंजीयन के लिए मशक्कत करता रहा। वाहन का पंजीयन तो नहीं हो पाया लेकिन कैश के मिलान के दौरान यह ढाई लाख की रसीद जरूर पकड़ में आ गई। शाम करीब पौने सात बजे इस रसीद को रद कर दिया गया। रसीद जिस कर्मचारी के पासवर्ड से जारी हुई थी, उससे जब बताया राशि मांगी गई तो उसने इंकार कर दिया। तभी इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। दफ्तर में यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। उसके बाद इसकी जांच के आदेश दिए गए थे। यहां खास बात यह है कि रसीद को लेकर एजेंट लगातार दफ्तर में सक्रिय था और येन केन प्रकारेण वाहन का पंजीयन कराने की जुगत में लगा था। यानी इस फर्जीवाड़े की तमाम तैयारियां पहले ही की जा चुकी थीं।   

दरअसल जिस तरह से एक कर्मचारी का पासवर्ड इस्तेमाल किया था, उसे मालूम ही नहीं है कि पासवर्ड कैसे लीक हुआ और कब लीक हुआ। जबकि पिछले शुक्रवार को अपरान्ह करीब 3.55 बजे रसीद काटी गई थी। इससे कम से कम यह बात साफ है कि पासवर्ड लीक उससे काफी पहले हो चुका था। अब इसका इस्तेमाल पहले हुआ या नहीं, इसकी तस्दीक होना बाकी है।

 

कंप्यूटर आईपी के जरिए तलाश

प्रकरण की जांच कर रहे परिवहन अधिकारियों का कहना है कि कंप्यूटर आईपी के जरिए रसीद काटने वाली तलाश की जा रही है। रसीद कटने का समय व कंप्यूटर आईपी मिल चुकी है और इससे अब उस कंप्यूटर का पता भी चल सकेगा कि रसीद किस कंप्यूटर से काटी गई। रसीद को दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को भेजा गया है ताकि इससे कंप्यूटर आपरेटर का पता लगाया जा सकें।

"जिस कंप्यूटर से रसीद काटी गई, उसकी आईपी मिल गई है। अब कंप्यूटर व आपरेटर की तलाश की जा रही है। यह जानकारी मिलने के बाद दोषी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही जिस कर्मचारी आनंद वर्मा के पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया है, उसका बयान लिया जा चुका है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।"

अशोक कुमार सिंह

संभागीय परिवहन अधिकारी

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