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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर के निर्माण के लिए हिंदू मुस्लिम वर्ग के संयुक्त प्रयास से आपसी भाईचारे और शांति का संदेश देने का कार्यक्रम सियासत की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को आयोजन के कुछ समय पहले सरयू तट पर बेरीकेडिंग कर दी गई। सरयू तट पर मुस्लिम लोगों को वुजू के लिए जाने पर रोक लगा दी। खास बात यह रही भाजपा के तमाम नेता इससे इंकार करते रहे लेकिन नमाज अयोध्या में ही दूसरे स्थान पर अदा की गई। इस आयोजन के अचानक बदल जाने के बाद सियासत फिर गर्मा गई।

 

दरअसल मुस्लिम एकता मंच ने राम मंदिर के निर्माण के लिए नमाज अता करने का कार्यक्रम तय किया था। इसे प्रशासन व शासन की सहमति भी मिली हुई थीं। नमाज के लिए आसपास के कई जिलों में बड़ी संख्या में मौलव–मदरसों के बच्चे भी पहुंच गए लेकिन दोपहर में अचानक ही सरयू तट पर बेरीकेडिंग लगा दी। शाम होते होते नमाज का स्थान बदल दिया गया। आयोजन के टलने के साथ ही सिसायत भी गर्म हो गई। कुछ घंटे पहले इसे हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल करार देने वाले तमाम नेता व संयोजक इंद्रेश कुमार तो कार्यक्रम के बहाने सपा –बसपा पर दंगा भड़काने की साजिश तक बताने लगे।

दरअसल सरयू तट पर आयोजन मीडिया में पिछले दो दिन से सुर्खियों में था। हालांकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने खुद को पूरे आयोजन से अलग बताया था। इस संबंध में आरएसएस नेता का एक ट्वीट भी बुधवार शाम को आया और आय़ोजन पर आपत्ति जाहिर की गई थी। यही से मसला तूल पकड़ने लगा। सुबह तक आयोजन की अनुमति दिए जाने की बात स्वीकर करने वाले प्रशासन के अधिकारी एकदम से उलटा बोलते दिखे। सूत्रों के मुताबिक इस आयोजन को लेकर आरएसएस द्वारा इस संबंध में पीएमओ को भी सूचित किया था और उसके बाद ही कार्यक्रम में फेरबदल कर दिया गया।

 

सरय़ू तट बन गया सियासत का केंद्र

अयोध्या के कई संतों ने मुस्लिम समाज के लोगों के सरयू में वुजू करने से नदी के अपवित्र होने की बात कहते हुए जलसमाधि लेने की चेतावनी दे दी थी। इसका कार्यक्रम को लेकर संत समाज कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था जबकि प्रदेश सरकार के मंत्री व प्रशासन इसे एक अच्छी पहल करार देते नहीं थक रहे थे। अचानक ही सारा कार्यक्रम बदल जाने के बाद अब सियासत ही दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व विधायक रविदास मेहरोत्रा ने इसे भाजपा की दंगा कराने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव के मद्देनजर गदंगा भड़काना चाहती है। इसी वजह ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ कार्यकर्म के संयोजक इंद्रेश इसे विपक्षी दलों की साजिश करार दे रहे हैं। बहरहाल सरयू तट पर नमाज हुई न राम मंदिर के लिए दुआ मांगी गई लेकिन सियासत को जरूर कुछ हवा मिल गई।

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