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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

लोकसभा चुनाव की नजदीक आने के साथ साथ देश –प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर की गूंज भी तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा नेता मंदिर निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता रहे हैं तो संत समाज ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। लिहाजा मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

 

अब जरा गौर करें। मुख्यमंत्री बनने बाद योगी आदित्यनाथ पांच बार अयोध्या हो गए। हर बार राम मंदिर के प्रति अपनी आस्था भी जताते रहें मगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ही मंदिर निर्माण का वकालत करते रहे हैं। मगर संत समाज इससे सहमत नहीं है। संत समाज भाजपा के खिलाफ दिखने लगा है। सोमवार को मंहत नृत्यगोपाल दास ने तो सुप्रीम कोर्ट को दरकिनार कर मंदिर के निर्माण की बात कही। उन्होंने बाबरी विध्वंस और बाबर द्वारा मंदिर ध्वस्त करने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उस वक्त कौन से कोर्ट से निर्णय आया था। लिहाजा मंदिर का निर्माण भी उसी तरह से होगा जिस तरह से विवादित ढांचा नेस्तनाबूद कर दिया गया था। यह सारी बात उन्होंने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ही अपने मंच से कहीं।

 बात केवल इतनी सी नहीं है। इसके पहले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी और समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुए बुक्कल नवाब को तो मंदिर के चढ़ावा तक चढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं। वसीम रिजवी ने तो दो दिन पहले दस हजार रुपये चंदा भी मंदिर के निर्माण के लिए दे दिया। यानी की यह बयानबाजी से लेकर राम मंदिर की सियासत को बहुत ही सुनियोजित तरीके से गर्म किया जा रहा है। लिहाजा आगामी लोकसभा चुनावों में राम मंदिर एक बार फिर मुद्दा बनने के पूरे आसार है और भाजपा भी इसके जरिए मतों के ध्रुवीकरण को लेकर फूंक फूंक कर आगे बढ़ रही है। बात यह है कि इस पूरे मामले को हवा देने भाजपा के केंद्रीय मंत्री व सांसद भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

 

प्रवीण तोगड़िया की इंट्री से असहज हुई भाजपा

राम मंदिर के जरिए लोकसभा चुनाव की नैया पार करने की तरतीब में जुटी भाजपा के लिए प्रवीण तोगड़िया की इंट्री असहज करने वाली है। तोगड़िया ने भाजपा पर विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए अक्टूबर तक करोड़ों हिंदुओं के हस्ताक्षर का ज्ञापन देने की रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में वह मंगलवार को अयोध्या भी पहुंच गए। अब यह देखने वाली बात है कि प्रवीण तोगड़िया के फैसले के बाद भाजपा माहौल कितना अपने पक्ष में कर पाती है। खास बात यह है कि प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष पद से हटाए जाने अब वह अंतराष्ट्रीय हिंदू परिषद बनाकर मैदान में आ गए हैं।

सियासत हुई गर्म

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर चल रही बयानबाजी को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस तथा बहुजन समाज पार्टी इसे भाजपा का सांप्रदायिक कार्ड करार दे रही है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज यादव के मुताबिक प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार के पास जनता को बताने के लिए कुछ नहीं है। इसी कारण वह सांप्रदायिकता का कार्ड खेलती है। इसके पहले उपचुनाव के दौरान अचानक जिन्ना विवाद सामने आया और चुनाव गुजरते ही वह मामला शांत हो गया। भाजपा लोगों को गुमराह करने के लिए इस तरह के पैंतरे अजमाती रही है और वही कर रही है। हालांकि अब जनता भी इस सारे हथकंडों को समझ रही है और भाजपा की दाल गलने वाली नहीं है।

 

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