Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

सरकारी देशी शराब की दुकानों पर जहरीली शराब कैसे बिकती रही, कानपुर में जहरीली शराब कांड के बाद यक्ष प्रश्न है। इस पूरी घटना में दस से ज्यादा लोगों की मौत के बाद यह बात साफ हो गई है कि देशी शराब सरकारी ठेके पर बिक रही थी और इसके पीछे पूरा सिंडीकेट काम कर रहा था। खास बात यह है कि कानपुर में जहरीली शराब कांड कोई पहला नहीं है। इसके पहले लखनऊ, आजमगढ़ सहित कई शहरों में इस तरह जहरीली शराब के कारण लोगों की मौत हुईं लेकिन आबकारी विभाग ने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की, शराब बिक कहां  रहीं थी।

 

कानपुर में जहरीली शराब का कारोबार एक व्यवस्थित सिंडीकेट कर रहा है। हालांकि इस पूरे में मामले में समाजवादी पार्टी के एक पूर्व विधायक और उनके दो नातियों का नाम सामने आया है। दोनों मुख्य आरोपियों नीरज सिंह व विनय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। सवाल यह है कि सरकारी आवंटित ठेकों पर जहरीली कच्ची शराब बिक रही थी, उस वक्त आबकारी विभाग क्या कर रहा था। हालांकि हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्शन मोड को देखते हुए स्वयं प्रमुख सचिव आबकारी कल्पना अवस्थी ने भी कानपुर पहुंच हादसे के पीड़ितों के परिवार वालों से मुलाकात की। दोषियों पर सख्त कार्रवाई का दावा किया लेकिन कहीं इस बात जिक्र तक नहीं किया गया कि सरकारी ठेके से बिक्री के लिए कौन लोग दोषी है। सरकारी ठेके की जांच आखिर कब हुई थीं।

इसके पहले आजमगढ़ में जहरीली शराब के कारण 35 लोगों की मौत हुई थीं। वहां पर मुख्य आरोपी मुलायम को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहां भी सामने आया था कि वह रिटेलर के माध्यम के से अवैध देशी शराब की बिक्री करता था। उसके पहले लखनऊ में खदरा क्षेत्र में जहरीली शराब का प्रकोप सामने आया था लेकिन उसमें भी सारी कार्रवाई मुआवजा देने तथा कुछ आबकारी निरीक्षकों को निलंबित करने भर की कार्रवाई हुई। आगे कोई जांच नहीं की गई। नतीजा यह रहा कि सिंडीकेट बदस्तूर काम करता रहा है और गुजरे एक साल में करीब सौ लोगों को जहरीली शराब लील चुकी है।

 

संगठित है अवैध शराब कारोबार

कानपुर में अवैध शराब कांड के बाद जांच में सामने आया कि कानपुर देहात सहित आसपास के कई जिलों में इस मौत की घुट्टी की सप्लाई हो रही थी। व्यवस्थित तरीके से इसके पहुंच सरकारी ठेकेदार अपने यहां से बेच रहे थे। समाजवादी पार्टी नेता के नातियों के यहां से भी कच्ची शराब का जखीरा तो मिला है लेकिन यह शराब कहां बन रही थी, इसकी जानकारी मिलना बाकी है। हालांकि शराब कारोबारी इसके पीछे पुलिस व आबकारी विभाग के भ्रष्टाचार को मुख्य कारण मानते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस अवैध शराब की बिक्री में पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारी भी हिस्सा बांट करते हैं। इस कारण से सरकारी दुकानों पर इस तरह की अवैध शराब की बिक्री होती है। हादसा होने पर कुछ अधिकारी निलंबित कर दिए जाते हैं लेकिन बाद में वह फिर बहाल हो जाते हैं। जबकि इस मौत की घुट्टी के कारण तमाम परिवार तबाह हो जाते हैं।

दोषी पाए गए तो मृत्यु दंड

जहरीली शराब से हुई करीब एक दर्जन मौत के बाद शासन –प्रशासन इस बार सख्त रुख अख्तियार किए हुए हैं। आईजी कानपुर के मुताबिक इस घटना को लेकर आबकारी अधिनियम की धारा 70 ए के तहत वाद दर्ज किया गया है। इसमें दोष सिद्ध होने पर मृत्यु दंड का प्रावधान है।

 

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