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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

मुजफ्फरपुर में ब्रजेश ठाकुर की ओर से चलाए जा रहे बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि हो चुकी है। इस मामले में मुजफ्फरपुर पुलिस की ओर से पॉक्सो कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। अब सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है और इसके लिए सीबीआइ की टीम ने मुजफ्फरपुर में डेरा डाल रखा है। सीबीआइ के एसपी जेपी मिश्रा के नेतृत्व में 12 अफसरों की टीम इस पूरे कांड की जांच कर रही है।

 

लेकिन 34 बच्चियों से हुए रेप के मामले में पुलिस ने कोर्ट में 16 पन्नों की जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें कई ऐसी बातें लिखी हैं जिन्हें पढ़कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस यातना गृह में उन 34 बच्चियों पर क्या बीती होगी। 28 जुलाई को कोर्ट में पेश चार्जशीट के मुताबिक इस बालिका गृह में एक कमरा ऐसा भी था, जो ऑपरेशन थियेटर था। बच्चियों से लगातार रेप होता था और अगर इस दौरान कोई बच्ची गर्भवती हो जाती थी, तो इस ऑपरेशन थियेटर में उसका गर्भपात कर दिया जाता था। पुलिस को इस बालिका गृह से 67 किस्म की नशीली दवाइयां भी मिली हैं, जिनका इस्तेमाल कर बच्चियों के साथ रेप किया जाता था।

हंटर अंकल, मूंछ वाले अंकल, तोंद वाले नेताजी

पाक्सो कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाली अपर लोक अभियोजक संगीता साहनी के मुताबिक पुलिस और कोर्ट को दिए बयान में बच्चियों ने तीन लोगों से सबसे ज्यादा डरने की बात बताई है। इन तीन लोगों में हंटर वाले अंकल, मूंछ वाले अंकल और तोंद वाले नेताजी हैं। पुलिस के मुताबिक फोटो देखने के बाद बच्चियों ने हंटर वाले अंकल के तौर पर ब्रजेश ठाकुर की शिनाख्त की है, जबकि मूंछ वाले अंकल और तोंद वाले नेताजी की शिनाख्त की कोशिश जारी है। हालांकि अब मामला सीबीआइ के पास चला गया है, तो इसकी जांच भी अब सीबीआइ ही करेगी।

 

चार्जशीट के मुताबिक रात में जब बच्चियां सोने के लिए कमरे में जाती थीं, तो उन्हें बिना कपड़ों के ही सोने के लिए कहा जाता था। चार्जशीट में इस बात का भी जिक्र है कि पुरुषों के अलावा बालिका गृह की महिला कर्मचारी भी बच्चियों का यौन शोषण करती थीं। अगर कोई बच्ची यौन शोषण का विरोध करती थी, तो हंटर वाला अंकल यानी कि ब्रजेश ठाकुर बच्चियों के प्राइवेट पार्ट पर लात मार देता था।

पुलिस की लापरवाही

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 बच्चियों से रेप का खुलासा भले ही टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के ऑडिट के बाद हुआ है, लेकिन ये बालिका गृह बनने के बाद से ही विवादों में रहा है। अगर वक्त रहते पुलिस ने इस बालिका गृह के खिलाफ ऐक्शन ले लिया होता, तो आज ये नौबत नहीं आई होती। 2013 में जब इस बालिका गृह की शुरुआत हुई थी, तो उसके कुछ ही दिन के बाद 14 दिसंबर 2013 को यहां से चार बच्चियां भाग गई थीं। उस वक्त मुजफ्फरपुर के नगर थाना में बालिका गृह के अधीक्षक की तरफ से 15 दिसंबर 2013 को आवेदन दिया गया था। 16 दिसम्बर 2013 को तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार ने आवेदन को बतौर शिकायत दर्ज कर लिया था। कानूनी भाषा में इस दर्ज शिकायत को सनहा कहा जाता है। सनहा दर्ज होने के बाद जितेंद्र कुमार ने न तो बालिका गृह की जांच की और न ही बच्चियों की तलाश के लिए कुछ किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक उस वक्त ब्रजेश ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया।

 

बालिका गृह से भागने वाली ये लड़कियां दिल्ली, इटावा, मधुबनी के फुलपरास और मुजफ्फरपुर की अहियापुर की रहने वाली थीं। चारों बच्चियां बालिका गृह की छत फांदकर दूसरे छत पर चली गई थीं और फिर उन छतों से होते हुए वो भाग गई थीं। अब जब इस बालिका गृह की जांच शुरू हुई है, तो 2013 का ये मामला भी खुल गया है। इस मामले में तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार की भूमिका को भी संदिग्ध पाया गया है। मुजफ्फरपुर के टाउन डीएसपी ने 24 जुलाई को ही जितेंद्र कुमार पर ऐक्शन लेने के लिए मुजफ्फरपुर एसएसपी हरप्रीत कौर को रिपोर्ट भेज दी है। हालांकि इस मामले में जितेंद्र कुमार ने भी सफाई दी है। जितेंद्र का कहना है कि जो लड़कियां भागी थीं, वो वापस आ गई थीं। बालिका गृह की ओर से भी ऐसा ही बताया गया था, इसलिए सिर्फ सनहा ही दर्ज किया गया था। हालांकि मुजफ्फरपुर पुलिस ने प्राथमिक जांच में जितेंद्र को दोषी पााया है और ऐक्शन लेने के लिए एसएसपी को रिपोर्ट भेज दी गई है। लेकिन अब मामला मुजफ्फरपुर पुलिस की जद से आगे निकलकर सीबीआई के पास पहुंच गया है। अब इंतजार सीबीआई की कार्रवाई का है, ताकि इन 34 बच्चियों को न्याय मिल सके और उनसे दरिंदगी करने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

 

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