Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।  

 

लोकदल प्रत्याशी हसन कंवर का सपा-रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन को समर्थन देने के बाद कैराना लोकसभा उपचुनाव कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। दरअसल, देवर–भाभी के इस गठजोड़ के बाद भाजपा की वोट विभाजन का गणित भी बिगड़ गया है। जबकि कर्नाटक चुनाव में हार और उसके पहले गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीटों पर उपचुनावों की हार के बाद इसे प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा से जोड़ देखा जा रहा है। ऐसे में वर्तमान स्थितियों में भाजपा अब गन्ना-जिन्ना और पलायन के इर्द-गिर्द ही सिमट कर अपने वोट बैंक को सहजने की कोशिश कर रही है।

दरअसल, पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनाव अमूमन धर्म-जाति के नाम पर ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द रहते हैं। विगत लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद स्व. हुकुम सिंह ने पलायन का मुद्दा उठाया था और भाजपा इसे भुनाने में कामयाब भी रही। हालांकि, पलायन करने वालों की कोई सूची आजतक सामने नहीं आई है और न ही भाजपा नेता इस बारे कोई स्पष्ट बात कर पा रहे हैं। इसी तरह गन्ना किसानों की जमीन कहे जाने वाले कैराना में गन्ना उत्पादक किसान तमाम परेशानियों से जूझ रहे हैं। किसानों का हजारों करोड़ रुपये मिलो पर बकाया है। नतीजन वर्तमान मुद्दों को छोड़ हर पार्टी अब इसी आधार पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण के प्रयास में लगी है।

कैराना लोकसभा संसदीय सीट पर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और रालोद के बीच गठबंधन से सत्तारूढ़ भाजपा सरकार मुश्किल में थी। साथ ही लोकदल के प्रत्याशी के तौर पर कंवर हसन के पर्चा भरने के बाद भाजपा को मत विभाजन का लाभ मिलने के अनुमान लगाए जा रहे थे। मगर ऐन वक्त पर कंवर हसन ने अपनी भाभी और सपा रालोद प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा कर दी। ऐसे में अब पश्चिम उत्तर प्रदेश में काफी जाट वोट भी गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में जाने के आसार बन गए हैं। ऐसे में गठबंधन का प्रत्याशी भाजपा की प्रत्याशी एवं पूर्व सांसद स्व. हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह पीछे दिख रही हैं।

गन्ना जिन्ना और पलायन

कैराना में एक बार फिर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए सियासत धार्मिक और भावनात्मक जमीन तैयार करने में जुट गई है। पहले भाजपा के प्रचारक नेता का कैराना में भाजपा के हराने पर पाकिस्तान में खुशी मनाए जाने का भाषण दिया था। यह भाषण सोशल मीडिया में भी खूब चला। अब गुरुवार को योगी आदित्यनाथ ने अपनी सभा में गन्ना को प्राथमिकता करार देते हुए जिन्ना की तस्वीर को न लगने देने की घोषणा कर दी।

दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि कैराना ही नहीं, नूरपुर में भी भाजपा की जमीन खिसकने लगी है। सरकार अपनी उपलब्धि बताने के बजाए केवल जातीय और धार्मिक भावनाएं भड़काने में लगी है ताकि किसी भी तरह से वोट का ध्रुवीकरण हो सके। यही कारण है कि कैराना में बेरोजगारी, बदहाल सड़क, किसानों की स्थिति की बात केवल रस्म अदायगी के तौर पर दिख रही है।

 

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