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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

नीति आयोग के दिशा निर्देश के बाद प्रदेश में 94 कम महत्वपूर्ण विभागों को समाप्त कर उन्हें 37 विभागों में मर्ज करने का मामला फिलहाल स्थगित हो गया है। हालांकि विभागों के मर्जर को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे थे। विभाग कम होने के बाद मंत्रियों की संख्या में भी कटौती किए जाने के तर्क दिए जा रहे थे लेकिन फिलहाल इस सब पर ब्रेक लग गई है।

 

नीति आयोग ने जनता से जुड़े कार्यों के त्वरित निस्तारण के लिए तमाम ऐसे विभाग को मूल विभागों में मर्ज करने का सुझाव दिया था, जो बना तो दिए गए लेकिन उनका काम स्पष्ट नहीं है। इससे जनता तक सरकारी लाभ पहुंचने की प्रक्रिया भी कई बार प्रभावित होती है। इसी के मद्देनजर प्रदेश में कम महत्वपूर्ण 94 विभागों को समाप्त कर उन्हें 97 विभागों में मर्ज करने का प्रस्ताव बना था। गुरूवार को इस प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष किया। मगर मुख्यमंत्री इससे सहमत नहीं हुए। लिहाजा दोबारा प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

जोड़ तोड़ में बढ़ते गए विभाग

प्रदेश में मंत्रीमंडल का आकार जैसे जैसे बड़ा हुआ, वैसे वैसे विभागों में विभाग बनने लगे हैं। यानी पार्टी के नेताओं को खुश करने के लिए उनके लिए विभागों का गठन होता गया। गठबंधन की सरकारें बनने के साथ ही विभागों में विघटन कर नए विभाग का गठन और नए पद सृजित करने की परंपरा चल पड़ी है। इसके बाद विभाग भी बढ़ते गए। अब नीति आयोग ने ऐसे विभागों को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं जिनकी प्रासंगिकता ज्यादा नहीं है और और वे सीधे तौर पर कम भी नहीं कर रहे हैं।

नए सिरे से तैयार होगा प्रस्ताव

नीति आयोग के निर्देश के बाद विभागों के मर्जर का प्रस्ताव अब नए सिरे से तैयार होगा। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की असहमति के बाद इस प्रस्ताव को दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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