Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

मुन्ना बजरंगी, सुनील भाटी जैसे शातिर अपराधियों की मौजूदगी और जेल में बंद सीसीटीवी। जेल के अंदर नाइन एमएम पिस्टल की आमद और फिर दस गोली मार कर शातिर मुन्ना बजरंगी की हत्या। वह भी सुबह साढ़े छह बजे। यह किसी सुनियोजित नाटक या फिल्म कथा से कम नहीं है। बागपत जेल में हुई इस नृशंस हत्या के बाद अब इसमें सियासी साजिश से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। परिवार वाले विधायक से लेकर केंद्रीय मंत्री तक पर सवाल खड़े कर रहे हैं और विपक्षी इसे सरकार की लचर कानून-व्यवस्था का परिणाम बताते नहीं थक रहे।

जरायम की दुनिया के कुख्यात माफिया मुन्ना बजरंगी की वारदात करने का ढंग जितना नृशंस और सनसनीखेज रहा, उसका अंत भी कमोबेश ऐसा ही था। बागपत जेल में पूर्वांचल के कुख्यात डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की मौत के पीछे सियासी साजिश को नकारा नहीं जा सकता है। मृत बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह तो सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री, जौनपुर के बाहुबली सांसद सहित सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं पर हत्या कराने का शक जता रही हैं। दरअसल, पिछले दिनों ही सीमा सिंह ने अपने पति की हत्या की साजिश का संदेह जताया था और उनकी हत्या हो गई। जिसके बाद तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

दरअसल, मुन्ना बजरंगी की विधायक से दस लाख रुपये रंगदारी मांगने के मामले में बागपत में पेशी थी। पेशी के लिए उसे झांसी जेल से लाया गया था। रविवार रात वह बागपत जेल पहुंचा और सोमवार सुबह उसकी हत्या कर दी गई। मुन्ना को दस गोलियां मारी गईं और जेल में बंद पश्चिम उत्तर प्रदेश माफिया सुनील भाटी ने इसे स्वीकर भी कर लिया। यही नहीं, सुनील ने पिस्टल मुन्ना की ही होने की बात कही। इससे जेल में सुरक्षा से लेकर सारी व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं।

कभी मुख्तार अंसारी के नजदीकी के तौर पर जाने वाले मुन्ना बजरंगी ने 2005 में विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर सनसनी फैला दी थी। यही नहीं मुन्ना गैंग ने उसके पहले वाराणसी के मलदहिया में अनिल राय को भी स्टेशन से घर जाते समय छलनी कर दिया था। उसके बाद से ही मुन्ना बजरंगी सुर्खियों में था। सूत्रों के मुताबिक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद से ही जरायम की दुनिया में मुन्ना का डंका बजने लगा था। अपरहण और रंगदारी वसूली में भी मुन्ना का सिक्का चलने लगा।

करीब चालीस हत्याओं में आरोपी मुन्ना बजरंगी ने मुंबई से अपनी गिरफ्तारी करा कर राजनीति का कवच पाने की कोशिश में था। उसने अपना दल से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव हार गया था। जेल में होने के बावजूद वह निशाने पर था। इसी क्रम में दो साल पहले राजधानी के विकास नगर में उसके साले पुष्पजीत की हत्या हुई थी।

सीबीआइ जांच की मांग  

बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद परिवार वालों ने घटना की सीबीआइ जांच की मांग की है। मृत मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह व साले ने सीधे तौर पर इसे शासन-प्रशासन और विरोधियों की साजिश करार दिया है। मुन्ना बजरंगी के साले के मुताबिक हत्यारोपित सुनील भाटी ने मुन्ना की ही पिस्टल से हत्या करने की बात कही है, लेकिन यह असंभव है। क्या मुन्ना झांसी से ही पिस्टल लेकर बागपत पहुंचा था। यही नहीं, सुनील और मुन्ना दोनों अलग बैरक में थे, फिर उनमें झगड़ा कैसे हो गया कि आमने सामने आकर गोली मार दीं।

इस पूरी हत्या के पीछे गाजीपुर से ताल्लुक रखने वाले एक केंद्रीय मंत्री, जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह सहित कई नेता शामिल थे। मुन्ना के परिवार वालों का आरोप है कि कृष्णानंद राय के नजदीक लोग लगातार मुन्ना ही हत्या की साजिश कर रहे थे। इसकी भनक लगी थी और शासन-प्रशासन व मीडिया को अवगत कराया गया था, लेकिन कुछ न हुआ। नतीजा यह रहा कि जेल में ही मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई।

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