Bhojpuri Film Balamua Tohre Khatir Will Release on 31 August

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

पूर्वी यूपी के देवरिया जिले में एक कस्बा है भटनी। इस भटनी इलाके में खूखून्दू ब्लॉक है। इस ब्लॉक में एक गांव है जिसका नाम है नूनखार। यहां के रहने वाले मोहन त्रिपाठी भटनी के चीनी मिल में टाइम कीपर थे। चीनी मिल की ओर से मोहन त्रिपाठी को रहने के लिए एक घर मिला था। इस घर में वो अपनी पत्नी गिरिजा त्रिपाठी के साथ रहते थे। इसी घर में मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान की शुरुआत हुई थी। 26 फरवरी 1993 को चिट फंड कंपनी के तहत इस संस्था का रजिस्ट्रेशन हुआ था। मोहन त्रिपाठी की पत्नी गिरिजा त्रिपाठी इस संस्थान का काम देखने लगीं। वो महिलाओं को सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण देने लगी। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाए जाने की भी ट्रेनिंग शुरू हुई। इसके बाद महिलाओं को शिक्षा देने का भी काम शुरू हुआ। वहीं मोहन त्रिपाठी चीनी मिल में काम करते रहे।

 

मिल बंद हुई और जम के संपत्ति बनाई

2002 में चीनी मिल बंद हो गई। उसपर ताला लटक गया। इसके बाद मोहन त्रिपाठी की नौकरी भी चली गई और फिर पूरा परिवार देवरिया चला आया। यहां गिरिजा त्रिपाठी का देवरिया के कई और संस्थाओं के संचालकों से संपर्क हुआ और फिर गिरिजा त्रिपाठी ने देवरिया में मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान की शुरुआत की। देवरिया आने के बाद गिरिजा त्रिपाठी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

धीरे-धीरे गिरिजा त्रिपाठी को बाल गृह, बालिका गृह, शिशु गृह के साथ ही गोरखपुर और देवरिया में वृद्धाश्रम चलाने का भी लाइसेंस मिल गया। इन सारी संस्थाओं को चलाते हुए गिरिजा त्रिपाठी ने अकूत संपत्ति इकट्ठी की और उस पैसे से देवरिया के रजला इलाके में एक बड़ा प्लाट खरीद लिया। इसी प्लाट में गिरिजा त्रिपाठी ने अपना दो मंजिला घर बनवाया और मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान को भी यहीं पर शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद गिरिजा त्रिपाठी ने उसरा बाजार में वृद्दाश्रम खोलने के लिए भी जमीन का बड़ा प्लाट खरीदा और वहां वृद्धाश्रम चलाने लगीं।

 

बच्‍ची थाने पहुंची और खुल गया मामला

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान में 5 अगस्त की शाम तक सबकुछ पहले की ही तरह चल रहा था। शाम को 13 साल की एक बच्ची संस्थान के फर्स्ट फ्लोर पर खड़ी थी। बच्ची को देखकर संस्थान चलाने वाली गिरिजा त्रिपाठी ने उसे नीचे बुलाया और ग्राउंड फ्लोर की सफाई करने का आदेश दिया। बच्ची सफाई करने लगी। इसी दौरान गिरिजा त्रिपाठी का मोबाइल बजा। वो फोन लेकर बात करने लगी। बात करने के दौरान बच्ची को ग्राउंड फ्लोर से सीधे बाहर भागने का मौका मिल गया। बच्ची के मुताबिक जब गिरिजा त्रिपाठी बात करने में व्यस्त हो गई, उसने एक सेकेंड भी देर नहीं की और वहां से भागकर महिला थाना पहुंच गई।

 

दिल दहलाने वाला बयान

बच्‍ची ने बताया- ”हर रोज शाम चार बजे के करीब बड़ी-बड़ी गाड़ियों में लोग आते थे। कभी लाल, कभी सफेद और कभी काली गाड़ी आती थी। मैम उन गाड़ियों में दीदी को ले जाती थीं। दीदी लोग अगले दिन सुबह वापस आती थीं। जब वो वापस आती थीं तो रोती हुई दिखती थीं। जब हम लोग पूछते तो कोई भी दीदी कुछ भी नहीं बताती थी। छोटे-छोटे बच्चों से पोछा लगवाया जाता था। जब बच्चे पोछा लगाने और सफाई करने से इन्कार कर देते थे, तो छोटी मैडम और बड़ी मैडम पिटाई करती थीं। इतना ही नहीं हम लोगों को खाना भी नहीं दिया जाता था।”

सील हो गया संस्‍थान

जब बच्ची ने पुलिस के सामने मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान का कच्चा-चिट्ठा बताया तो पुलिस तुरंत ही हरकत में आ गई। पूरी पुलिस फोर्स संस्थान पहुंची और वहां की जांच शुरू कर दी। संस्थान पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 24 लड़कियों को छुड़ाया। वहां पर रजिस्टर में 42 लड़कियों के होने की बात लिखी थी, लेकिन 18 लड़कियां गायब हैं। पुलिस ने जब गिरिजा त्रिपाठी और मोहन त्रिपाठी से पूछताछ की तो वो कुछ खास बता नहीं सके, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

 

पुलिस ने संस्थान को सील कर दिया है। पुलिस ने गिरिजा और मोहन की बेटी और संस्थान की अधीक्षिका कंचनलता को भी 7 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया। वहीं छुड़ाई गई सभी 24 लड़कियों का मेडिकल करवाया गया है। इन बच्चियों के मेडिकल के लिए 6 अगस्त को एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया था, जिसके हेड देवरिया के सीएमओ डॉ. धीरेंद्र कुमार हैं। सीएमओ के साथ ही महिला डॉक्टरों की टीम भी बच्चियों की जांच कर रही है।

विदेश भेजी गईं बच्चियां

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान में यौन शोषण की बात सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी अंजू गुप्ता को लखनऊ से हेलिकॉप्टर के जरिए 6 अगस्त को देवरिया भेजा गया। वहां बच्चियों से पूछताछ के दौरान बस्ती की रहने वाली एक युवती ने बताया कि इस संस्थान से अब तक एक बच्चे और तीन बच्चियों को विदेश भेजा गया है।

 

बच्ची के मुताबिक नवंबर 2017 में दो विदेशी पुरुष और दो विदेशी महिलाओं की टीम संस्थान में आई थी। वहां से चारों लोग एक नाबालिग बच्चे और तीन लड़कियों को अपने साथ ले गए, लेकिन वो अब भी वापस नहीं लौटे। युवती के मुताबिक वो सभी विदेशी स्पेन के रहने वाले थे। युवती के मुताबिक संस्थान से हर रोज रात को चार-पांच लड़कियों को बाहर भेजा जाता है। वो लड़कियां अगली सुबह वापस आती हैं। युवती के मुताबिक करीब दो महीने पहले एक लड़की को रात में कार से बाहर भेजा गया था, लेकिन वो अब भी नहीं लौटी है।

 

तीन साल में भेजी गईं 707 बच्चियां

मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह की मान्यता पहले से भी संदिग्ध है। देवरिया के एसपी रोहन पी कनय के मुताबिक जब पूरे प्रदेश में पालना घोटाले की सीबीआई जांच हुई थी, तो उस वक्त मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह का नाम भी घोटाले में सामने आया था। इसके बाद सरकार की ओर से 2015 में ही इस संस्था का फंड रोक दिया गया था।

महिला बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव रेणु कुमार की ओर से 2017 में ही इस संस्था को बंद करने का निर्देश दिया था। इसके बाद शासन के आदेश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने 28 महिलाओं के साथ ही वहां रह रहे सात बच्चों को गोरखपुर शिफ्ट करने के लिए पत्र लिख दिया। हालांकि मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह पहले की ही तरह चलता रहा। संस्थान के आधिकारिक तौर पर बंद होने के बाद भी लगातार तीन साल तक पुलिसवाले यहां पर बच्चियों को भेजते रहे। घर से भागी हुई या गुमशुदा कुल 707 लड़कियों को पुलिसवालों ने तीन साल के दौरान इस संस्थान में पहुंचाया था।

 

संस्थान के रिकार्ड के मुताबिक इन 707 बच्चियों में से 697 बच्चियों को परिवार वालों के पास वापस भेज दिया गया। 10 लड़कियां इसी संस्थान में रह रही थीं और इन लड़कियों के लिए सरकार की ओर से पैसे नहीं दिए जा रहे थे। सूत्रों की माने तो मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह को इलाके के बड़े-बड़े लोग मोटा पैसा देते थे, जिसकी वजह से गिरिजा त्रिपाठी सरकारी पैसे न मिलने के बाद भी संस्था को चला रही थी।

28 जुलाई को भी पहुंची थी पुलिस

तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने 28 जुलाई 2018 को मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह को शिफ्ट करवाने के लिए पुलिस टीम भेजी थी। पुलिस की टीम जब वहां पहुंची, तो मां विंध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह की अधीक्षक कंचनलता पुलिस से उलझ गई। पुलिस टीम इतनी परेशान हुई कि जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने 31 जुलाई को अधीक्षक कंचनलता और संचालिका गिरिजा त्रिपाठी के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज कर लिया।

 

इसके बाद गिरिजा त्रिपाठी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस पर फंसाने का भी आरोप लगाया। गिरिजा ने महिला एवं बाल विकास विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वीकृति के बाद भी विभाग की ओर से संस्था को फंड नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी पर आरोप लगाते हुए गिरिजा त्रिपाठी ने कहा था कि प्रभात गलत सूचनाएं दे रहे हैं, इसलिए वो आमरण अनशन करेगी।

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