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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

नन्हें मासूम बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले वाहनों को परमिट दिए जाने में भी खेल हो गया। बिना किसी अनुबंध के ही निजी बस, वैन, जीप और टेंपो ट्रैवलर को स्कूल परमिट जारी कर दिए गए। जबकि निजी वाहन को स्कूल परमिट बिना स्कूल के अनुबंध के दिया ही नहीं जा सकता है। बावजूद यह काम आऱटीओ दफ्तर में धड़ल्ले से चर रहा है। खास बात यह है कि तमाम अधिकारी इसे कांट्रैक्ट परमिट पर बच्चों को ले जाने की बात कहते हैं लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के बाहर भी बताते हैं। स्कूल परमिट की गलत व्याख्या पर लाखों रुपये का खेल हर महीने चल रहा है।

यही नहीं, हर साल फिटनेस जांच के लिए पहुंचने वाली गाड़ियों का अनुबंध पत्र नहीं देखा जाता है। वजह भी स्कूल या दफ्तर के दलाल वाहन को पास करा लेते हैं और एवज में जिम्मेदार अधिकारी की जेब गर्म हो जाती है। पिछले दिनों कुशीनगर हादसे के बाद मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद नियमों की पड़ताल के बाद यह सारा गोरखधंधा सामने आ गया है। उधर मामले को तूल पकड़ते देख संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार ने स्कूल परमिट जारी करने पर रोक लगा दी है।

खास बात यह है कि आरटीओ दफ्तर में लगातार स्कूल परमिट जारी किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की आंख में धूल झोंकने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पिछले दिनों शासन के आदेश पर जांच के निर्देशो को दरकिनार करते हुए अधिकारियों ने केवल वाहनों के लिए आदेश को बताया जो स्कूल के नाम पर दर्ज थे। लिहाजा स्कूल कांट्रैक्ट प्राइवेट वाहनों की जांच की ही नहीं गई। कुशीनगर हादसे में स्कूल कांट्रैक्ट और बिना रिजस्ट्रेशन की बात सामने आने पर अब अधिकारी सभी निजी कांट्रैक्ट स्कूली परमिट संचालित वाहनों की जांच का दम भर रहे हैं।

 

मिलीभगत से बन गए स्कूल वाहन चालक सिंडीकेट

पुराने शहर के चौपटिया, चौक में कई स्कूल वाहन संचालक है, अब सिंडीकेट बन गए हैं। एक एक वाहन स्वामी के पास दर्जनों वाहन हैं। जिन्हें चलाने वाले न प्रशिक्षित है और न बाकी मानक पूरे करते हैं लेकिन उनकी नई गाड़ियां हजरतगंज के कांवेंट स्कूलों सहित तमाम स्कूलों में लगी हैं। इनंमे कई वाहन ऐसे हैं जो बामुश्किल साल – दो साल पुराने हैं। इनमें जीप तक शामिल हैं और उन्हें स्कूल परमिट भी हासिल हो गए। अब परिवहन विभाग इन वाहनों को परमिट जारी किए जाने की जांच कराने का दम भर रहा है।

अनुबंध नहीं तो रद होंगे स्कूल परमिट

संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार ने सभी प्रवर्तन दलों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एसपी ट्रैफिक पत्र भेज कर शासन के आदेश अनुपालन में स्कूली वाहनों की जांच करने को कहा है। पत्र में कहा गया है कि मारुति वैन और निजी स्कूल वाहनों में स्कूलों के अनुबंध जरूर जांचें जाएं। अनुबंध पत्र न होने पर वाहन जब्त कर उनकी रिपोर्ट परिवहन विभाग के भेजी जाए। ऐसे वाहनों का स्कूल परमिट रद कर उनसे वाहन के पंजीकरण से लेकर अब तक पूरा टैक्स वसूला जाएगा।

 

“स्कूली वाहन परमिट कांट्रैक्ट पर ही जारी किया जाता है। स्कूली से कांट्रैक्ट पर वाहनों पर स्कूल का नाम लिखा जाता है और स्कूल भी इसमें वाहन स्वामी के समान जिम्मेदार होता है। उनके कह देने भर से  वह अपनी जिम्मेदारी से विमुख नहीं सकता है। अगर उसके संज्ञान में नहीं है तो स्कूल का नाम लिखे वाहन बच्चे लेकर स्कूल कैसे आ रहे हैं। ऐसे सभी वाहनों के अनुबंध पत्र की जांच और उनके परमिट के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।”

बीके सिंह

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन)

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