Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ

 

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बंगले का विवाद कम होता नहीं दिख रहा है। बंगले से टोटी उखाड़े जाने से लेकर वहां पर कई स्थानों और तोड़फोड़ के मामले में अब तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो सारे नुकसान का आंकलन करेगी। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना बंगला तो खाली कर दिया था, लेकिन तमाम सामान ले गए थे। इसे लेकर पिछले दिनों वह खासे चर्चा में थे।  

खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बंगला खाली करने के दौरान कई स्थानों पर तोड़-फोड़ व फर्श के टाइल्स क्षतिग्रस्त हुए थे। इसे लेकर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई थी। बंगला खाली करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री पर बंगले से नल की टोटियां तक खोल ले जाने के आरोप लगाए गए थे। बंगले के बहाने अखिलेश के खिलाफ मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ने मोर्चा खोल दिया था। इस पूरे प्रकरण ने सियासी रंग ले लिया था।

उल्लेखनीय है कि बंगला खाली करने के बाद बंगले की जांच लोकनिर्माण विभाग ने की थी और अपनी फौरी रिपोर्ट भी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। उसके बाद ही बंगले में हुए नुकसान के आंकलन के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने के निर्देश प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग ने दिए थे।

अब मामला न्यायालय में पहुंच जाने के बाद सरकार भी इस पूरे प्रकरण की जांच कराने जा रही है। राज्य संपत्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीम इस बात की जांच करेगी कि पूर्व मुख्यमंत्री ने कितनी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्ट आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री से नुकसान की प्रतिपूर्ति भी कराई जा सकती है।

बंगला खाली कराने की सियासत

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बंगला खाली करने का नोटिस मिलने के बाद दो साल का समय दिए जाने की मांग की थी। इसके प्रयास भी किए गए, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उन्हें बंगला खाली करना पड़ा। यही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री का बंगला खाली होने के बाद वहां पर जो टूट-फूट के साक्ष्य मिले, उससे सियासत भी तेज हो गई। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री बाकायदा प्रेस के सामने आए और उन्होंने राज्य संपत्ति विभाग से लिस्ट तक मांगी जो बंगला आवंटित करते वक्त दी गई थी। हालांकि, यह लिस्ट तो सामने नहीं आई लेकिन मामला उच्च न्यायालय में पहुंचने के बाद अब यह मामला फिर तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है।

 

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