Abram Shouted At Photographers For No Pictures

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस का रवैया होने की दलील देने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार अब सीएम सचिवालय के एक प्रमुख सचिव के कारण चारों तरफ से घिरी नजर आ रही है। यह अलग बात है कि इसके पहले भाजपा सरकार के कई मंत्री–विधायक अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं और सरकार उन्हें दरकिनार करती रही है। लेकिन ताजा मामले में तो सरकार चारों तरफ से घिर गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए मुख्य सचिव मामले तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। हालांकि रातभर चले हाई वोल्टेज के बाद अभिषेक गुप्ता अपने बयान से पलटे।  उसने लिखित माफीनामा में हस्ताक्षर करते हुए प्रमुख सचिव पर लगाए गए अपने आरोप वापस ले लिए। माफीनामा अभिषेक के नाना ओम प्रकाश गुप्ता की ओर से दिया गया है।  

 

दरअसल, मामला हरदोई के अभिषेक गुप्ता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने हरदोई पेट्रोल पंप के लिए जमीन ली थी। इस जमीन पर पेट्रोल पंप के लिए उन्होंने एनओसी मांगी थी। उनका आरोप है कि इसके एवज में प्रमुख सचिव एसपी गोयल ने 25 लाख रुपये की मांग की थी और पैसा न मिलने पर फाइल रद्द करने की बात कही थी। इससे आहत अभिषेक ने इस संबंध में गत अप्रैल महीने में राज्यपाल के यहां शिकायत की थी। राज्यपाल ने पूरे मामले पर गत 30 अप्रैल 2018 को सीएम सचिवालय को पत्र भेज कर प्रकरण की जांच कराने को कहा था। मगर उसके बाद से यह पत्र दबा रहा। मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब अभिषेक ने राज्यपाल द्वारा जारी पत्र सार्वजनिक कर दिया।

गुरुवार को इस मामले के सामने आते ही भाजपा की तरफ से अभिषेक गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई और प्राथमिकी में पार्टी के नेताओं के नाम गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए शुक्रवार को अभिषेक हिरासत में ले लिया। मगर इस पूरे प्रकरण ने सरकार के लिए बेचैनी जरूर पैदा कर दीं। दरअसल इस मामले में जिस तरह से भाजपा नेता प्रमुख सचिव की पैरवी और बचाव करते दिखे, उससे दाल में काला होने की आशंकाएं बढ़ गई। बिना जांच ही अभिषेक गुप्ता पर प्राथमिकी और फिर हिरासत में लिए जाने सरकार भी विपक्षियों के निशाने पर आ गई है। इस बात का भी किसी के पास जवाब नहीं है कि आखिर एक महीने तक राज्यपाल का पत्र सीएम सचिवालय में कैसे दबा रहा। हालांकि भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी के मुताबिक अभिषेक गुप्ता नेताओं के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। अब फंस गए तो एक अधिकारी पर आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ, अभिषेक के परिवारीजन इसे सरकार का  असली रूप बता रहे हैं। उनके मुताबिक अभिषेक के घूस न देने के कारण ही उसे प्रताड़ित किया जा रहा है।

 

हटाए गए थे मंत्री के दो निजी सचिव

खास बात यह है कि इस घटना के सामने आने के दो दिन पहले ही प्रदेश सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल के दो निजी सचिव को भ्रष्टाचार के आरोप मे हटाया गया था। यह कार्रवाई भी मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद हुई थी। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के जूते –मोजे और बस्तों की आपूर्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। उस वक्त भी भ्रष्टाचार का मामला उठा था। इसी तरह के कई और मामले भी लंबित हैं लेकिन उन पर सरकार चुप्पी साधे हुए हैं।

भ्रष्टाचारियों की पनाहगाह बनी भाजपा

गोमती नदी में डूब की जमीन पर करोड़ों रुपये की प्रतिपूर्ति लेने वाले समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी अब भाजपा के एमएलसी है। भारतीय जनता पार्टी में क्या पहुंचे, उनके सारे गुनाह साफ हो गए। कलेक्ट्रेट से लेकर राजस्व विभाग तक चल रही फाइल अचानक ही गुम हो गईं। हुसैनाबाद ट्रस्ट की जमीनों को बेचने के मामले में जांच के दायरे में फंसे शिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी भी फिलहाल जांच से दूर हैं। राम मंदिर बनवाने के लिए पूरी शिद्दत से प्रयास रत है। गोमती रिवर फ्रंट, जनेश्वर मिश्र पार्क आदि के घोटाले फाइलों में दब चुके हैं। जबकि चुनाव के बाद सरकार बनते ही भाजपा के ही मंत्री कुदाल लेकर रिवर फ्रंट और हेरीटेज जोन में खुदाई कर भ्रष्टाचार गिनाते घूम रहे थे। उसके बाद अचानक ऐसी तस्वीर बदली की सारा भ्रष्टाचार गुम हो गया।

 

अखिलेश ने साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस पूरे प्रकरण में प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रिश्वत देना और रिश्वत मांगना दोनों अपराध हैं, फिर केवल एक पर कार्रवाई कैसे। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री और नेता भी भ्रष्टाचार की बात कहते आए हैं और अब तो वह प्रमाणित भी हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, बलिया के विधायक सुरेंद्र कुमार भी अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार पर का आरोप लगा चुके हैं।

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