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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

खनन माफियाओं और ओवरलोड वाहनों को बिना जांच निकलवाने वाले हाईवे माफियाओं से मुकाबिल परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी एन्टीक असलहों से लैस हैं। असलहे ऐसे हैं जो शायद तमाम प्रवर्तन कर्मियों ने खुद भी एक दो बार देखें हों। ये असलहे चलते हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी अधिकारियों को ही नहीं। हद तो यह है कि उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश अलग हुए करीब डेढ़ दशक हो रहे हैं लेकिन परिवहन विभाग की चार रायफल व एक रिवाल्वर अभी उत्तराखंड में ही है। अधिकारी दलील दे रहे हैं कि अभी तो प्रदेश की तमाम संपत्तियां ही विभाजित नहीं हो पाई हैं, ऐसे में हो सकता है कि असलहे भी वहां हों।

दरअसल परिवहन विभाग में हाईवे पर जांच अभियान के दौरान ट्रांसपोर्टरों के साथ भिड़ंत की घटनाएं आए दिन होती रहती है। परिवहन अधिकारी भी माफियों के असलहों से लैस होने की दलील देते हैं लेकिन उनके पास इसका जवाब नहीं है कि विभागीय प्रवर्तन सिपाहियों के पास कितने असलहे हैं। उन्होंने आखिरी बार कब असलहे चलाए थे या प्रशिक्षण लिया था, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। अधिकारी भी इससे बिलकुल बेफिक्र हैं।

1970 माडल बंदूक तो 61 माडल रिवाल्वर

 

परिवहन विभाग के असलहे अब एंटीक खजाना बन गए हैं। परिवहन विभाग के पास उपलब्ध डेढ़ दर्जन 32 बोर  रिवाल्वर में एक देहरादून के नाम पर 1970 में आवंटित हुई थी। उसके बाद से यह रिवाल्वर कहां हैं, अधिकारी ही नहीं जानते। इसी तरह से विभाग के पास 92 बंदूकें है, उनमें चार बंदूक अब उत्तराखंड में है। परिवहन विभाग की इन बंदकों में करीब एक दर्जन तो 1970 माडल की है। यह चलती है या नहीं, इसका भी किसी को ज्ञान नहीं है। यही नहीं, ये तमाम असलहे फिलहाल कहां है, यह भी जानकारी फिलहाल मुख्यालय पर नहीं उपलब्ध है।

एक दशक पहले हुआ था प्रशिक्षण

 

पुलिस लाइन से मिली जानकारी के मुताबिक परिवहन विभाग के प्रवर्तन कर्मियों का प्रशिक्षण वर्ष 2006 में सीतापुर में हुआ था। उस वक्त पूरे प्रदेश भर परिवहन विभाग की प्रवर्तन शाखा से महज 50 लोग प्रशिक्षण लेने पहुंचे थे। उसके बाद दोबारा कभी प्रशिक्षण हुआ नहीं। न ही परिवहन विभाग ने प्रशिक्षण दिलाने के लिए कभी विचार किया। लिहाजा प्रवर्तन कर्मी केवल डंडा हवलदार के रूप में ही काम करते दिख रहे हैं।

"परिवहन विभाग के प्रवर्तन सिपाहियों व अधिकारियों को मिले असलहे कहां है, इसकी सूची तलब की गई है। असलहे किस हालत में है, ये बता पाना मुश्किल है क्योंकि जरूरी है कि पहले पता चले कि उनकी अद्यतन स्थिति क्या है। जो असलहे उत्तराखंड में है, वे उस वक्त आवंटित किए गए थे, जब प्रदेश का विभाजन नहीं हुआ था। इसकी स्थिति पता की जाएगी। इसके साथ ही विभागीय असलहों का पूरा विवरण तैयार कराया जा रहा है।"

वीके सिंह

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन)

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