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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ


समाज में व्याप्त भ्रष्ट व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करती मशहूर व्यंग की पुस्तक है हम भ्रष्‍टन के भ्रष्‍ट हमारे। 

बाकी जगह हो न हो लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में बिल्‍कुल सटीक बैठता है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ भले ही पारदर्शिता और भ्रष्‍टाचार मुक्‍त शासन की बात करते हों लेकिन वास्‍तविकता इसके उलट है। लखनऊ विकास प्राधिकरण की कथनी और करनी ऐसी है कि न कुछ किया जाता है न कुछ हो पाता है, केवल योजनाएं और जुबानी कार्रवाई में सारे मामले निपट जाते हैं। अब मौजूदा मामला राजधानी में अवैध निर्माणों का ही है। न्यायालय से लेकर सरकार तक को गुमराह किया जा रहा है। 

इसकी हकीकत पूर्व कबीना मंत्री गायत्री प्रजापति के अवैध निर्माण पर हुई कार्रवाई में साफ हो गया। एलडीए उपाध्यक्ष ने इस पूरे निर्माण में अपरोक्ष रूप से शामिल रहे अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की और शासन को पत्र भेजा। हुआ क्या, दोषी ठहराए गए अभियंता दूसरे जिलों में स्थानांतरित हो गए। कार्रवाई सिफर है और विभाग शासन की राह ताक रहा है।


अब जरा देखिए। हरदोई रोड पर एक साल पहले जारी ध्वस्तीकरण के आदेश प्राधिकरण के होशियार अभियंता दबाए बैठे रहें और उनके वरिष्ठ अधिकारी अपने कर्मियों की करतूत छिपाने में जुटे हैं। परिणाम यह कि हरदोई रोड पर जामा मस्जिद के सामने चार मंजिला अवैध निर्माण ही नहीं हुआ बल्कि उसमें बिना पार्किंग के ही शापिंग माल भी खुल गया। खास बात यह है कि जिन जिम्मेदार अभियंताओं की संरक्षण में हुआ, वे इसे पुराना मकान ही बता रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि मकान और व्यावसायिक कांप्लेक्स में अंतर क्या होता, ये शायद अभियंता केवल वसूली के वक्त ही याद रखते हैं। इसी तरह सरांय माली खां, सुभाष मार्ग, यहियागंज, नादान महल मार्ग, हरदोई रोड़, सीतापुर रोड़ पर ना असंख्‍य अवैध निर्माण हो रहे हैं।


बदल गए गॉड फादर


सपा सरकार के जाते ही जैसे ही भाजपा की सरकार बनी यह अवैध निर्माण वालों ने अपनी निष्‍ठा भी बदल ली। एलडीए के अधिकारी भी अब भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं के आगे नतमस्तक है। गोलदरवाजे से लेकर चौक की तंग गलियों में इसी तरह से संरक्षणदाता खड़े हो गए हैं। नतीजा यह है कि अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं।


पुराने लखनऊ के चौक में स्थित गोलदरवाजे का ऐतिहासिक महत्‍व है। इस सिग्‍नेचर बिल्‍डिंग में कई दुकानदार भाजपा संरक्षण में मनमानी पर उतारू हैं। परंपरा मिष्‍ठान भंडार जैसे कुछ दुकानदार तो फुटपाथ तक आ गए और शिकायत करने पर सीधे शरण में पहुंच रहे हैं। पूर्व भाजपा सांसद को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि ट्रैफिक जाम हो रहा है कि सड़क पर अतिक्रमण हो रहा है। उन्‍हें तो अपने शरणागत का ख्‍याल रखना से मतलब है। इसी निष्ठा का नतीजा ऐशबाग के रामनगर में बीते दिनों चला बुल्‍डोजर था। स्वामिभक्त अधिकारियों ने न्‍यायालय के स्टे आर्डर को भी दरकिनार कर दिया। स्‍थानीय लोगों ने न्‍यायालय का आदेश दिखाते हुए विरोध किया तो उनपर लाठी चार्ज तक हो गई। मामला तूल न पकड़ने पाए इसके लिए कार्रवाई के अगले दिन से ही मामले पर लीपापोती शुरू हो गई।


"एलडीए का अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। कुछ स्थानों पर अभियंताओं ने गलत जानकारी दी गई हैं, ऐसे लोगों को भी चिन्हित किया जा रहा है। दोषियों को राजधानी बाहर भेजा जा रहा है और इससे व्यवस्था में खासा सुधार होगा।"

जयशंकर दुबे

सचिव, लखनऊ  विकास प्राधिकरण


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