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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में तमाम विकास योजनाओं का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। इसी क्रम में ताजा उदाहरण आलमबाग स्थित अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बना बस अड्डा। बस अड्डा भले ही अपने निर्धारित समय से करीब आठ महीने बाद बनकर तैयार हुआ है लेकिन 12 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्घाटन करने से पहले समाजवादी पार्टी के नेता –कार्यकर्ता बस अड्डे पर पहुंच गए। ढोल बजा और लोगों में मिठाई बांटी गईं। बस अड्डे को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विकास के प्रति सोच का प्रतीक करार दिया गया।

 

दरअसल, यह पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले कुछ ऐसा ही गाजियाबाद में मेट्रो के उद्घाटन और एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के पूर्व देखने को मिला था। दरअसल विकास के इन कामों को भुनाने में हर सियासी पार्टी लगी हुई है। पिछले चार साल से बन रहे बस अड्डे का निर्माण कार्य अब पूरा हो गया है। बस अड्डा वाहनों के संचालन के लिए तैयार है। उद्घाटन भी मुख्यमंत्री करने जा रहे हैं। इसी प्रतिस्पर्धा में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता बस अड्डे के उद्घाटन के पहले जश्न मनाने पहुंच गए।

समाजवादी पार्टी के नेता अजय त्रिपाठी मुन्ना के मुताबिक हकीकत में बस अड्डा हो या फिर मेट्रो देन तो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की है। उनके प्रयास से ही इनका निर्माण शुरु हुआ। अब इनका काम पूरा हो रहा है तो भाजपा उसे अपने विकास करने वाली नीति का हिस्सा करार देने में लगी है। मगर पब्लिक सब जानती है।

 

आधुनिक सुविधाओं से लैस है बस अड्डा

करीब साढ़े 4.35 अरब रुपये लागत से थ्री पी माडल पर बना आलमबाग बस अड्डा आधुनिक सुविधाओं से लैस है। बस अड्डे के बेसमेंट में ही बसों की पार्किंग है जबकि ग्राउंड तल से बसों का संचालन होगा। बस पार्किंग के नीचे एक बेसमेंट पार्किंग आम लोगों के लिए पार्किंग होगी। बस अड्डे के प्रथम तल पर एसी वेटिंग हाल, फूडकोर्ट होगा। जबकि दूसरी मंजिल पर अधिकारियों के कक्ष होंगे। बस अड्डे के बगल में ही व्यावसायिक कांप्लेक्स होगा और उसमें माल, होटल, रेस्त्रां व अन्य प्रतिष्ठान होंगे। यह काम भी अंतिम चरणों में चल रहा है।

करीब आठ महीने लेट हुआ तैयार

आलमबाग बस अड्डा करीब आठ महीने देरी से तैयार हुआ है। खास बात यह है कि बस अड्डे के लिए करार करते वक्त समयबद्धता और देरी होने पर लगी पेनाल्टी को लेकर रोडवेज के अधिकारी हर तरह से फायदे में होने का दम भरते थे लेकिन उसके बाद भी बस अड्डा करीब आठ महीने देरी से तैयार हुआ। दो बार मेट्रो के कार्य के कारण निर्माण में समय अधिक लगने की बात कही गई लेकिन उसके बाद पिछले तीन महीने में क्यों पूरा नहीं हुआ। सत्रों के मुताबिक इस देरी पर नियमानुसार करोड़ों रुपये की पेनाल्टी बनती है लेकिन रोडवेज के बाजीगर अधिकारियों ने उसका भी गोलमाल कर दिया। अधिकारी एक दूसरे पर निरीक्षण करने का आरोप लगाते रहें। इसका सीधा फायदा कार्यदायी संस्था को मिला।

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