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ऐतिहासिक चौराहे पर भ्रष्टाचार के सिग्नल

Rising At 8am | 25-Nov-2017 | Posted by - Admin

 

  • पुलिस बूथ के संरक्षण में होती चारों तरफ पार्किंग
  • ट्रैफिक पुलिस को मालूम नहीं, चौक पुलिस ने नकारा, नगर निगम ने झाड़ा पल्ला
   
Traffic Signals Without Traffic Police

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

मशहूर चौक चौराहा। भले ही इस चौराहे का जिक्र दुनिया भर में होता हो लेकिन हकीकत यह है कि कई दशकों बाद भी यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती नहीं हो पाई। अलबत्ता तीन दिन पहले चौक चौराहे पर ट्रैफिक सिगनल जरूर लग गए। सिगनल लगाने की मुख्य वजह भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी को बताया जा रहा है। कारण है कि चौराहे से महज पचास मीटर दूर स्थित चौक कोतवाली के क्षेत्राधिकारी को इसकी जानकारी तक नहीं है। ट्रैफिक पुलिस अधीक्षक इस बावत किसी जानकारी से इंकार करते हैं और नगर निगम की जोनल अधिकारी इससे नगर निगम से परे का काम बता देती है। सवाल यह है कि बना ट्रैफिक सिपाही सिगनल लगाने का औचित्य क्या है।

 

अब जरा चौक चौराहे पर गौर फरमाएं। चौराहे पर एक तरफ बहुमंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स विशम्मभर मेंशन हैं जिसकी भूमिगत पार्किंग के लिए बना बेसमेंट दुकानदार को बेच दिया गया है। नतीजा यह है कि मुख्य चौराहे पर पार्किंग स्टैंड बन गया। इसके ठीक सामने की तरफ मशहूर मिठाई की दुकान है जिसका चाट काउंटर सड़क पर लगता है और पूरी रोड पार्किंग की तरह इस्तेमाल होती है। चौराहे दूसरी तरफ देखें तो एक तरफ गोल दरवाजा है जिसके बरामदे में प्रभावशाली दुकानदारों का कब्जा है। गोलदरवाजे के सामने दोनों तरफ मक्खन वालों से लेकर फल –दूध के स्टाल मुख्य सड़क पर लगते हैं। इन दुकानों पर रुकने वाले लोगों के वाहन भी मुख्य सड़क पर खड़े रहते हैं और इस कारण अक्सर आवागमन तक बंद हो जाता है मगर नगर निगम से लेकर प्रशासन तक केवल कार्रवाई की दलीलें ही देता है।

दिन भर में कई बार जाम होने वाले चौक चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की मांग जमाने से हो रही है लेकिन अभी तक एक भी कांस्टेबिल आज तक तैनात नहीं हुआ। मगर इन सबके बीच पिछले दिनों चौक चौराहे पर कई सिगनल पोल लग गए। इस बावत जब नगर निगम की जोनल अधिकारी बिन्नो रिजवी से पूछा गया तो वह सीधे तौर पर मुकर गई। उन्होंने तो सवाल के जवाब में ही सवाल दाग दिया, बताइये नगर निगम का ट्रैफिक सिगनल से क्या मतलब। यह ट्रैफिक पुलिस वालों ने लगवाया होगा। सवाल यह है कि आखिर नगर निगम के पार्क में ट्रैफिक पुलिस ने पोल लगाने के लिए कोई अनुमति मांगी थी या नहीं, इसकी भी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।

 

दूसरी तरफ एसपी ट्रैफिक रविशंकर निम ने कहा कि सिगनल लगाने का काम नगर का होता है। चौक चौराहे पर सिगनल लगाने की बावत न कोई सूचना दी गई न ही वहां के लिए कोई प्रस्ताव दिया गया था। अब वहां सिगनल क्यों लगवाए गए, यह तो लगवाने वाले बताएंगे। केवल एसपी ट्रैफिक ही नहीं, बल्कि चौक चौराहे के नजदीक स्थित चौक कोतवाली के क्षेत्राधिकारी डीपी तिवारी ने कहा कि उन्हें तो मालूम ही नहीं है कि सिगनल कहां और कैसे लगें। न ही कोई इस संबंध में किसी ने सूचित किया।

केवल कमीशनखोरी का खेल

 

दरअसल जिम्मेदार विभागों के पल्ला झाड़ने के बाद अब यह पूरा मामला कमीशनखोरी व भ्रष्टाचार से जुड़ा दिख रहा है। कारण है कि सिगनल लगाने के नाम पर हुए होने वाले व्यय में तमाम अधिकारी पोषित होते हैं। जिम्मेदार एजेंसी को भी मुनाफा होता है, इस काऱण से ही सिगनल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि इसके पहले शहीद स्मारक, हाई कोर्ट तिराहा आदि स्थानों पर भी एजेंसी द्वारा लगाए गए सिगनल बेकार पड़े हैं। इनका किसी तरह से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। दूसरी तरफ चौराहे पर इस तरह से सिगनल लगाने की बावत अपर नगर आयुक्त मनोज कुमार से पूछा गया तो उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया। दूसरे नगर आयुक्त नंदलाल ने नगर आयुक्त के साथ दौरे का हवाला देकर इस बावत दो दिन बाद ही कुछ बता पाने की बात कहीं।

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