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Rising At 8am | 04-Sep-2017 | Posted by - Admin


  • बदहाल ट्रैफिक बढ़ा रहा जेब पर बीस फीसद भार
  • बिना प्लानिंग ट्रैफिक व्यवस्था बन रही सिरदर्द


   
Traffic Jam in Lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

हजरतगंज चौराहे से डालीगंज पुल की दूरी चार किमी से भी कम है लेकिन इस दूरी को तय करने में वाहनों को पहुंचने में तीस से 45 मिनट का समय लग रहा है। इतना ही नहीं, इस दूरी को तय करने में स्टार्ट गाड़ी में ईंधन व्यय भी बढ़ जाता है। हजरतगंज के अलावा फैजाबाद रोड पर बादशाह नगर क्रासिंग से मुंशीपुलिया चौराहे तक साढ़े तीन किमी की दूरी का हाल भी कमोबेश यही रहता है। डालीगंज पुल से मेडिकल कालेज और बुलाकी अड्डा तिराहे तक हालात और खराब हैं। दिन भर जाम के कारण वाहनों की लंबी कतार लगीं रहती है। दरअसल यह जाम केवल सड़क पर दर्द नहीं दे रहा बल्कि इसका सीधा असर आपकी जेब पर भी पड़ रहा है। एक तो पिछले एक महीने में पेट्रोल आठ रुपये प्रति लीटर से अधिक महंगा हो गया और दूसरा जाम अब गाड़ी की दम निकाल रहा है।

शहनजफ रोड स्थित एक मोटर कंपनी के विशेषज्ञ के मुताबिक बहुत स्लो स्पीड में वाहन चलने तथा ज्यादा समय तक एसी के साथ स्टार्ट खड़ा रहने के कारण वाहन का माइलेज बीस फीसद तक कम हो जाता है। इसके अलावा उसके इंजन पर बोझ भी बढ़ता है। वाहन का माइलेज बीस फीसद गिरने का मतलब है कि जेब पर उतना ही ज्यादा बोझ। मगर साल दर साल गहराती इस समस्या को लेकर फिलहाल राजधानी में किसी विभाग के पास कोई प्लानिंग नहीं है। नतीजा यह है कि सड़क संकरी होती जा रही है जबकि वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राजधानी में हर साल करीब 1.35 लाख वाहन हर साल उतर रहे हैं। तीन साल पहले यह गति 90 हजार से एक लाख के बीच थी लेकिन पिछले तीन सालों में वाहनों की बिक्री में काफी तेजी आई है।

वन व्यवस्था से परहेज

 

वैसे तो परिवहन विभाग स्मार्ट ट्रैफिक और स्मार्ट सिटी के लिए कागजी कार्रवाई में जुटा रहता है लेकिन हकीकत में विभाग सारा ठीकरा ट्रैफिक पुलिस के मत्थे मढ़ कर किनारे हो लेता है। वहीं वीआईपी खिदमत में व्यस्त रहने वाली ट्रैफिक पुलिस को भी इससे सरोकार केवल तब होता है, जब कोई वीआईपी आने जाने वाला हों। अन्यथा पुलिस केवल तमाशबीन बनी रहती है। लोगों जाम से जूझा करते हैं।

ऊपर मेट्रो लेकिन नीचे पुरानी व्यवस्था

 

राजधानी में बहुप्रतीक्षित मेट्रो मंगलवार को शुरू हो जाएगी। खास बात यह है कि ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक ट्रेन का रूट एलीवेटेड है यानी ट्रेन सड़क से ऊपर चलेगी लेकिन नीचे के लिए फिलहाल कोई प्लानिंग प्रशासन के पास है न पुलिस या परिवहन विभाग के। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि मेट्रो चलने के बाद कानपुर रोड पर क्या जाम से कुछ राहत मिलेगी। मगर ऐसा होता नजर नहीं आता है। काऱण है कि ट्रैफिक पुलिस के सारे इंतजाम महज उद्घाटन समारोह तक के लिए हैं। मेट्रो स्टेशनों पर भी कोई पार्किंग का इंतजाम नहीं है। यानी यात्री जिन वाहनों से आएंगे, वे भी स्टेशन के पास ही पार्क होंगे और ऐसे में कानपुर रोड पर जाम बढ़ना स्वाभाविक है।

 

मेट्रो चलेगी लेकिन सड़क के हालात जस के तस

 

मेट्रो के संचालन का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्वरित, किफायती सेवा उपलब्ध कराने के साथ ही सड़क से वाहनों का लोड कम करना है। लेकिन कम से कम परिवहन विभाग और प्रशासन को इससे फिलहाल कोई सरोकार नहीं है। ऐसे में जो दूरी मेट्रो में तीस रुपये में पूरी होगी, वहीं आटो –टेंपो में 12 रुपये में होगी। साथ ही वांछित स्थान पर उतरने की सुविधा के साथ। मेट्रो से ट्रैफिक व्यवस्था को कितना बदलाव होगा, यह विचारणीय सवाल है।

जाम में फंस गए डीएम

 

कलेक्ट्रेट से बलरामपुर अस्पताल भले ही करीब एक किमी दूर है लेकिन वहां तक जाने में जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा भी परेशान हो गए। दरअसल उनकी गाड़ी तथा स्कार्ट की गाड़ी नारी शिक्षा निकेतन चौराहे से मुड़ते ही जाम में फंस गई। उसके बाद स्कार्ट के जवानों से तत्परता दिखाते हुए जाम में फंसे वाहनों को निकलवाया। तब जाकर कहीं डीएम साहब अस्पताल पहुंच पाएं।  

जितने विभाग उतने बहाने

 

यातायात पुलिस अधीक्षक रविशंकर निम ट्रैफिक जाम व सड़क पर अतिक्रमण के लिए सीधे तौर पर क्षेत्रीय पुलिस को जिम्मेदार ठहरा लेते हैं। जबकि ट्रैफिक की कोई प्लानिंग से इंकार कर देते हैं। वहीं अतिक्रमण के लिए साल में कई बार रोस्टर जारी करने वाले नगर निगम के प्रवर्तन अधिकारी अभियान चलाने के बजाए पटरी बाजार व ठेलों से होने वाली कमाई के प्रति ज्यादा सजग रहते हैं। यही हाल, ट्रैफिक पुलिस का भी है। डालीगंज पुल हो या फिर निशातगंज चौराहा, हजरतगंज चौराहा हो या फिर चारबाग। यहां तो ट्रैफिक पुलिस वसूली की खातिर बकायदा टेंपो स्टैंड से लेकर ई रिक्शा के स्टैंड पर पटरी दुकानें लगवा रही है। ये दुकानें केवल उसी दिन हटती, जब किसी वीआईपी को गुजरना होता है।

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