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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश सरकार ओवर लोडिंग को लेकर सख्त है। परिवहन विभाग द्वारा हर महीने अभियान चलाकर ओवर लोड वाहनों को बंद किया जाता है लेकिन इस पर लगाम नहीं लग रही है। धड़ल्ले से ओवरलोडिंग का आलम यह है कि बांदा में पुलिस ने शुक्रवार को अभियान चलाकर 145 ओवर लोड ट्रकों को सीज कर दिया। दो दर्जन से ज्यादा वाहन चालक पुलिस देख वाहन छोड़ भाग गए। मगर सवाल यह है कि आखिर ये ओवर लोड वाहन टोल प्लाजा पर क्यों नहीं रोके जा रहे हैं।

 

परिवहन अधिकारियों के मुताबिक टोल प्लाजा पर नियमानुसार ओवर लोड वाहन रोक लिए जाने चाहिए। नियमानुसार क्षमता से अधिक का माल प्लाजा पर ही उतार लिए जाने का प्रावधान हैं। मगर प्रदेश में कहीं पर टोल प्लाजा पर इस तरह की रोक –टोक नहीं हो रही है। इस बावत परिवहन आयुक्त द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को कई पत्र भी भेजे गए लेकिन उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। अब इस प्रकरण को शासन के समक्ष लाने की तैयारी हो रही है। दरअसल टोल प्लाजा पर निर्धारित क्षमता से अधिक माल होने पर दस गुना पेनाल्टी लिए जाने का प्रावधान है और भारत सरकार के नियम में शुमार है लेकिन प्रदेश में टोल प्लाजा पर इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

दरअसल प्रदेश में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा बन चुके हैं। इनका संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। नियमानुसार यहां पर ओवर लोड वाहनों की रोक कर उनसे क्षमता से अधिक लोड को उतरवाया जाना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। दरअसल एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि टोल प्लाजा टेंडर कर निजी ठेकेदारों को दे दिए जाते हैं। वहां पर व्यवस्था वहीं संभालते हैं। इस कारण से इस पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।

 

मनमाने ढंग से हो रही है वसूली

प्रदेश में टोल प्लाजा पर ठेकेदार मनमाने ढंग से पेनाल्टी की वसूली कर रहे हैं। दरअसल यह सामने आया अपर आयुक्त द्वारा विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरे वाहन चालकों के बयान के बाद। अपर परिवहन आयुक्त बीके सिंह के मुताबिक किसी टोल प्लाजा पर 245 रुपये प्रति टन के हिसाब से शुल्क वसूला जा रहा है तो कहीं पर आठ सौ। कहीं पर दस गुना पेनाल्टी नहीं वसूली जा रही है। इसकी जानकारी एनएचएआई अधिकारियों को भी दी गईं लेकिन इसके बाद भी वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा ओवरलोडिंग धड़ल्ले से चल रही है।

शासन स्तर से होगी कार्रवाई

एनएचएआई प्रबंधन के लचर रवैये को देखते हुए अब पूरे प्रकरण में शासन से हस्ताक्षेप की मांग की गई है। अपर परिवहन आयुक्त ने बताया कि पिछले दिनों में एनएचएआई अधिकारियों की प्रमुख सचिव परिवहन व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में आश्वासन जरूर दिया गया लेकिन कार्रवाई सिफर ही रहीं। लिहाजा इस पूरे प्रकरण को अब शासन के जरिए एनएचएआई के समक्ष रखा जाएगा। अपर परिवहन आयुक्त वीके सिंह के मुताबिक टोल प्लाजा पर ही ओवर लोड वाहन रोके जाने लगेंगे तो यह समस्या काफी हद तक नियंत्रण में आ जाएगी।

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