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न खुदा ही मिला, न विसाल ए सनम

Rising At 8am | 29-Jul-2017 | Posted by - Admin

  • अपने नेताओं को भी एकजुट न रख सकी सपा
  • बिखरने लगा चंद विपक्षियों कुनबा

   
The situation of SP after the resignation of Bukkal Nawab

दि राइजिंग न्यूज़  

संजय शुक्ल

लखनऊ।

न खुदा ही मिला न विसाल ए सनम न इधर के हुए न उधर के हम।

समाजवादी पार्टी के मौजूदा हालात कुछ इसी तरह के नजर आ रहे है। जिन विधान परिषद सदस्य बुक्कल नवाब को पार्टी से दूसरी बार विधान परिषद भेजा, वही प्रेशर पालीटिक्स का शिकार होकर बेवफा हो गए। पार्टी में भगदड़ जैसी हालात दिखाई पड़ रहे हैं। अर्से से पार्टी से जुड़े रहने वाले नेता ही अब अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। सपा से इस्तीफा देने वाले एमएलसी बुक्कल नवाब ने तो समाजवादी पार्टी को अखाड़ा तक करार दे डाला। ऐसे में अखिलेश यादव पार्टी में एका बनाए रख पाएं न ही अपने नेताओं भरोसे में रख सकें। इससे सत्तारूढ़ सरकार विपक्ष को तहस नहस करता दिख रहा है। रही सही कसर पूर्व कबीना मंत्री एवं सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के दिल्ली दौरे से पूरी होती दिख रही है। ऐसे में समाजवादी पार्टी में बिखराव दिख रहा है और जल्द ही इसमें और तोड़ फोड़ देखने को मिल सकती है।

अब जरा बुक्कल नवाब पर ही गौर करें। अखिलेश यादव की सरकार के दौरान विधान परिषद सदस्य रहे बुक्कल के ऊपर गोमती नदी की डूब की जमीन को पुश्तैनी जमीन करार दे करीब आठ करोड़ मुआवजा लेने का आरोप है। इसकी जांच चल रही है। घंटाघर हेरीटेज जोन के निर्माण के दौरान उनके तीन अपार्टमेंट भी खड़े हो गए। बिना नक्शा बने इस अपार्टमेंट को पिछले दिनों सील भी कर दिया गया था। उसके बाद से ही बुक्कल नवाब पर दबाव बढ़ रहा था। यही नहीं। उनके खिलाफ तीन मुकदमे भी दर्ज हैं। एक एक बाद बढ़े रहे इस दबाव का असर भी अब सामने हैं। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद मुलायम सिंह की मुखालफ करने में वह पीछे नहीं थे। उस वक्त भी कारण उनके यही कारनामे थे और इस समय भी कमोबेश वही हालात है। तब अखिलेश के पास कमान थी, इस कारण बैर नहीं लिया जा सकता था और अब भाजपा की सरकार है। नतीजतन वह पाला बदल अब भाजपा में जाने को मचल रहे हैं।

 

इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि सभापति को इस्तीफा देने के बाद बुक्कल नवाब सबका साथ –सबका विकास का दावा करते हुए भाजपा की प्रशंसा कर रहे हैं। बुलावा मिलने पर भाजपा में जाने को भी मचल रहे हैं लेकिन भाजपा से फिलहाल उनको बुलावा नहीं मिला है। भाजपा के नेता भी उन्हें बुलाने में फिलहाल हिचक रहे हैं। इस कारण से इनकी स्थिति खराब होती जा रही है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुक्कल नवाब सहित दो एमएलसी के इस्तीफों को राजनैतिक भ्रष्टाचार करार दे रहे हैं और बुक्कल नवाब पर दबाव बनाए जाने की दलील दे रहे हैं।

 

भाजपा को भी छवि प्यारी

 

अहम सवाल यह है कि बुक्कल नवाब पर तीन मुकदमे हैं। पुश्तैनी जमीन के नाम पर उनके ऊपर सरकारी धन हड़पने के आरोप हैं और फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। ऐसे में अपनी छवि को लेकर जनता में पैठ बनाने वाली भाजपा उन्हें पार्टी में शामिल करेगी, यह यक्ष प्रश्न है।  ऐसे में बुक्कल नवाब द्वारा भेंट की गई कुर्सी पाने के बावजूद भाजपा उनसे दूरी बनाएं रखे तो इसमें हैरानी नहीं होगी।

"बुक्कल नवाब ने पार्टी से इस्तीफा असंतुष्ट होने के कारण दिया है। इसमें कोई दवाब जैसी बात नहीं नजर आती है। वह पार्टी में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा किया जाएगा। फिलहाल तो इस तरह की कोई बात नहीं है।"

शलभ मणि त्रिपाठी

प्रवक्ता

भारतीय जनता पार्टी 


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