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सड़क पर शक्ति का परीक्षण

| Last Updated : 2018-03-28 10:07:43

 

  • बिजली कर्मियों ने तेज किया आदोंलन
  • नौ अप्रैल से तीन दिवसीय कार्यबहिष्कार

Strike by Employees of Power Corporation in Lucknow


दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ ।  

प्रदेश में राजधानी लखनऊ सहित पांच शहरों की बिजली आपूर्ति निजी हाथों में दिए जाने को लेकर आंदोलित बिजली कर्मियों का विरोध –आंदोलन तेजी पकड़ने लगा है। निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में बिजली कर्मचारी सड़क पर उतर आए हैं। खास बात यह है कि निजीकरण के फैसले को महज कुछ बड़े घरानों को फायदा पहुंचाने की साजिश भर करार दिया जा रहा है। इसकी वजह भी है। दरअसल प्रदेश में फिलहाल आगरा की बिजली निजी हाथों में हैं और वहां बिजली आपूर्ति देख रही अहमदाबाद की कंपनी टोरेंट करीब सवा तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से सरकार को बिजली मूल्य का भुगतान कर रही है। अब सरकार ने जिन शहरों को निजीकरण का फैसला किया है, वहां पर बिजली की वसूली करीब साढ़े छह रुपये प्रति यूनिट है। यानी टोरेंट द्वारा की जा रही वसूली लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, मुरादाबादा आदि में बिजली राजस्व की वसूली से आधी भी नहीं है। आपूर्ति में सुधार हुआ है तो फिर निजीकरण का फैसला कैसे।

उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के समिति शैलेंद्र दुबे के मुताबिक विभाग की सीएजी रिपोर्ट कहती है कि टोरेंट को आगरा की बिजली दिए जाने के बाद घाटा में जबरदस्त इजाफा हुआ है। बावजूद इसके सरकार उसकी जांच कराने तक को तैयार नहीं है। यही नहीं, आनन फानन लाभ वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में दिए जाने का फैसला कर लिया गया। सरकार की मंशा सुधार की है तो पहले उन इलाकों को दिया जाना चाहिए था नुकसान और घाटा ज्यादा है न कि जिन क्षेत्रों में पिछले कुछ समय में बदलाव आया है। वहां पर बिजली व्यवस्था लाभ में पहुंच गई है और सरकार अब निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए निजीकरण का फैसला कर रही है। वहीं आंदोलन में शामिल उत्तर प्रदेश पावर आफीसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेष वर्मा तथा अध्यक्ष केबी राम ने बताया कि सरकार केवल निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह का काम कर रही है और इससे औद्योगिक अशांति फैल जाएगी। सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेगी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदेश के बिजली कर्मचारी इस तरह से किसी तुगलगी फैसले को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।

नौ अप्रैल से तीन दिवसीय कार्यबहिष्कार

उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने नौ अप्रैल से तीन दिवसीय कार्यबहिष्कार की घोषणा की है। इसके पूर्व समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि सरकार द्वारा निजीकरण का फैसला वापस लिए जाने तक कर्मचारियों का आंदोलन अब वापस नहीं होगा। निर्धारित योनजा के तहत बिजली कर्मचारियों का आंदोलन लगातार जारी रहेगा और नौ अप्रैल से तीन दिवसीय कार्यबहिष्कार शुरू किया जाएगा। इस फैसले को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

संगठनों ने दिखाई शक्ति

प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में उठी चिंगारी के बाद अब सभी विभागीय व जनसंगठन भी इसमें शामलि हो गए हैं। मंगलवार को आय़ोजित कार्यबहिष्कार अभियंता संघ, विद्युत सहायक संघ, जूनियर इंजीनियरर्स संगठन, पावर आफीसर्स एसोसिएशन सहित कई सामाजिक संगठन भी एक दूसरे के साथ कंधा से कंधा मिलाए दिए। खास बात यह है कि कर्मचारियों के इस जोश के आगे के सरकार और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन भी बैकफुट पर ही दिखा। कई भाजपा नेताओं ने निजीकरण की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी पर ही करने का आरोप तक लगाया।

 

 



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