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एक शासनादेश और बदल गई जांच

Rising At 8am | 31-May-2017


  • पेट्रोल पंप संचालकों के आगे नतमस्तक सरकार
  • हाईकोर्ट की सख्त रुख के बाद भी अधिकारी बेबस

story of petrol scam in lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस रवैया, कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं की ये दलीलें हर मंच पर सुनाई दे रहीं थी लेकिन सरकार बने तीन महीने ही गुजरे हैं लेकिन हकीकत सामने दिखने लगी है। यानी हाथी के दांत खाने और दिखाने के और। अब इस बात की तस्दीक पेट्रोल पंपों पर घटतौली और तेल चोरी के प्रकरण की सुनवाई कर रही उच्च न्यायालय ने भी की है। मगर सरकार को उसकी फिक्र तक नहीं है। सरकार का आदेश हुआ और चोर पाक साफ हो गए। यानी चोरी के बावजूद चौकस धंधा।

 

यह बदलाव आया गुजरी दो मई के बाद। यूपी पुलिस एसटीएफ ने पिछले महीने पेट्रोल पंप पर घटतौली के लिए चिप लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ ने आनन फानन कई पेट्रोल पंप पर छापा मारा और चिप बरामद कर ली। तीन दिन के अंदर राजधानी में ही करीब एक दर्जन पेट्रोल पंप घटतौली में पकड़े गए। सात पेट्रोल पंप सीज हो गए। पेट्रोल पंप मालिकों व स्टाफ के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 सहित विभिन्न धाराओं में केस भी दर्ज हो गए। कई लोग जेल गए जबकि पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष बीएन शुक्ला सहित कई पंप संचालक फरार हो गए। एसटीएफ ने राजधानी में अन्य दर्जनों पंप पर चिप लगी होने का दावा किया। मगर इस कार्रवाई के विरोध में पेट्रोल पंप संचालकों ने सरकार को धुड़की दी तो सरकार उनके कदमों में लोट गई। आनन फानन केवल जांच करने का आदेश जारी हो गया। मुकदमा दर्ज किया जाना भी बंद हो गया।

 

कातिल के हाथों ही इंसाफ

अब सरकार का क्या कहें, पेट्रोल पंप वालों के दबाव में इस कदर आ गई कि जिन विभागों की मिलीभगत से पंप पर डिस्पेंसर में चिप लगाई गई। उन्हीं विभागों को पेट्रोल पंप की जांच सौंपी गई है। इसमें मुख्य रूप से बांट –माप विभाग और तेल कंपनियों की सर्विस कंपनियां हैं। सवाल यह है कि ये विभाग अगर इतने मुस्तैद होते तो यह घटतौली का खेल चल ही क्यों रहा था। कारण है कि जितने भी  पेट्रोल पंप है, उन पर बांट माप विभाग की सील गई हुई और बिना बांट माप विभाग व तेल कंपनियों के सहयोग से डिस्पेंसर में चिप लगाया जाना संभव ही नहीं है। मगर शासन ने अब पेट्रोल पंप की जांच की कमान इन्हीं को दी है। अब इनकी जो जांच हो रही है, वह भी सामने हैं।


शासनादेश के आगे प्रशासन पंगु

जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा तथा एसएसपी दीपक कुमार के मुताबिक दो मई के बाद जिन पंप की जांच हुई, उनके खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज किया गया है। उनकी केवल रिपोर्ट बनाई जा रही है। यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और उसके बाद कार्रवाई वहीं से होगी। सरकार के इस शासनादेश का ही चमत्कार है कि चिप मिलने के बावजूद पेट्रोल पंपों से पेट्रोल की बिक्री हो रही है और मालिक माल गिन रहे हैं। यानी अब यह तय हो चुका है कि होना कुछ नहीं है।

 

सरकार ने ही निकाला कानून का जनाजा

एक अपराध, एक धारा और दो कार्रवाई। जी हां, प्रदेश की भाजपा सरकार का कमाल है। इसकी मिसाल तमाम पेट्रोल पंप पर देखी जा सकती हैं। जहां पर दो डिस्पेंसर पर सील लगी है, जिन्हें प्रशासन में घटतौली पर सील कर दिया है लेकिन बाकी से पेट्रोल-डीजल बिक रहा है। ऐसे सवाल यह है कि पहले जिन लोगों को पकड़ा गया है और नामजद किया गया, उनके साथ नरमी क्यों नहीं। हालांकि जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा इसे शासन स्तर का मामला बताते हैं। उनके मुताबिक जिले 152 पेट्रोल पंप की जांच कराई जा रही है। जल्द ही सभी पेट्रोल पंप की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। आगे की कार्रवाई शासन ही तय करेगा।

 

कंपनियों ने डीलरों से बनाई दूरी

उधर प्रशासन के दवाब और जांच का सामना कर रहे पेट्रोलियम डीलर बुधवार को इंडियन आयल कार्पोरेशन के दफ्तर पर अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे। कोर्ट के रुख को देखते हुए आयल कंपनी के अधिकारियों ने डीलरों से दूरी ही बनाए रखीं। डीलरों के पहुंचने की सूचना के बाद गोमती नगर स्थित इंडियन आयल कार्पोरेशन दफ्तर के मुख्यद्वार पर ताला लगा दिया गया। कंपनी के इस आचरण के बाद इस बात की साफ इशारा करती है, इस पूरे गोरखधंधे में कंपनी भी कहीं न कहीं शामिल है और अब कोर्ट से बचने के लिए वह डीलरों के साथ खड़े होने को भी तैयार नहीं है। 

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