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दहशतगर्दी से दूर, अरे ये शानदार हिंदुस्‍तान है . .               

| Last Updated : 2018-03-03 12:10:28

       

  • 9वीं पास कश्मीरी युवक जीविका के लिए पहुंचा लखनऊ


Story of Kashmiri Boy selling For His Life Style


दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

राजधानी के प्रतिष्ठित हनुमान सेतु मंदिर के सामने फुटपाथ पर टूटी –फूटी हिंदी बोलता एक गोरा चिट्टा युवक सूखे मेवे, अखरोट – बादाम बेच रहा था। दोपहर के तीन बजे, माथे से निकलता पसीना लेकिन चेहरे पर मुस्कान। लोग इस युवक से मोल भाव भी कर रहे थे और सामान भी खरीद रहे थे। दरअसल,  जाहिद नाम का यह युवक कश्मीर का निवासी है और परिवार के पालनपोषण के लिए यहां सूखे मेवे बेचने आया था। बातचीत में जहीद ने बताया कि उसे तो मालूम ही नहीं था, कश्मीर के बाहर हिंदुस्तान इतना अच्छा है। यानी वहां के माहौल से निकलने के बाद उसने जो महसूस किया, वह उसने हमारे साथ शेयर किया। 

 

कश्‍मीर के कुलगाम जिला के धन्नोकांडी में रहने वाले जाहिद नाइक ने बताया कि आतंकवादियों के चलते उनके यहां हालात बेहद खराब हैं। आय के सीमित साधनों के चलते लोगों में बेरोजगारी भी खूब है। उनके पिता गुलाम हसन नाइक सेब और अखरोट की खेती भले ही करते हो लेकिन महीने का खर्चा चला पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि वह चार पैसे कमाने के लिए लखनऊ चले आए। यहां पर आने के बाद लगा जैसे किसी नई दुनिया में आ गए हों। ना धमाकों की आवाजें ना गोलियों का डर भले ही यहां हमारा घर नहीं है लेकिन किसी घर से कम नहीं। जाहिद ने बताया कि वह पिछले दो महीने से लखनऊ में है। यहां के लोगों से मिलने, बातचीत और माहौल किसी खुमार से कम नहीं है। कई बार तो माल बेचना तक भूल जाता है। टकटकी लगाकर मेट्रो के निर्माण देखते हुए बताता है कि ऐसे भी कुछ बनता है, इसका तो इल्हाम तक उसे नहीं था।

वो आतंकी मंजर-

जाहिद ने बताया कि उसके गांव में ही सरकारी हाईस्‍कूल है। वह 2014 में कक्षा सातवीं का छात्र था। स्‍कूल में कक्षाएं चल ही रही थीं कि अचानक पास में ही एक तेज धमाका हुआ और दो मंजिला इमारत ढ़ह गई। जब तक कोई कुछ समझ पाता कि हमारे अध्‍यापकों ने हम लोंगों को बेसमेंट में छिपाने लगे। हालांकि कुछ ही देर बाद वहां पर सेना की कई गाडि़यां आ गईं। देखते ही देखते सेना और आतंकियों के बीच गोलियों को तड़तड़ाहट भी सुनाई देने लगी। इसी बीच सेना ने हमलोगों को सुरक्षित निकालते हुए अपनी गाडि़यों से घर पहुंचाया। तब से लेकर आज तक वह मंजर मुझे नहीं भूला है। 

 

कश्‍मीर इंडिया का है-

पाकिस्‍तान और कश्‍मीर में रहने वाले कुछ लोग भले ही कश्‍मीर के आजादी की बात करते हो लेकिन 1700 गांव की आबादी वाले गांव से आए जाहिद और उसके चाचा रहमान इस बात से सहमत नहीं है। उन्‍होंने बताया कि कश्‍मीर तो इंडिया का ही है। पाकिस्‍तान बिना मतलब ही अपने सैनिकों को मरवा रहा है। कश्‍मीर में जिस दिन शांति आ जाएगी उस दिन हमारा घर भी लखनऊ के तरीके हो जाएगा। हमारी सड़कों पर खून के धब्‍बे नहीं होंगे, गोलियों, तोपों की आवाजें नहीं गाडि़यों का शोर सुनाई देगा। रोजगार होगा और किसी भी पत्‍थरबाज या उनके नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होगी।

लोगों का दिमाग खराब है-

जाहिद ने बताया कि जो लोग पत्‍थर बाजी करते हैं उनका दिमाग खराब है। इसी लिए वह ऐसी हरकतें करते हैं। उन्‍हें चैन- सुकून से मतलब ही नहीं है केवल दहशत फैलाना ही उनका मकसद है। उनके चाचा रहमान भी हामीं भरते हुए कहा कि इंडिया को पाकिस्‍तानी आ‍तंकियों से खतरा नहीं है असली खतरा तो कश्‍मीर में बैठे लोगों से है। वह कश्‍मीरी युवाओं को सेना पर पत्‍थर तो कभी कांच की बोतलें फेंकने को कहते हैं लेकिन कभी खुद ऐसा नहीं करते और ना ही अपने बच्‍चों को करने के लिए बोलते हैं।

 

लखनऊ आना था तो नींद नहीं आई-

जाहिद के मुताबिक जब उसके चाचा रहमान ने लखनऊ चलने के लिए कहा तो वह तुंरत तैयार हो गया। क्‍योंकि रहमान ने लखनऊ की कई ऐसी बातें उसे बताईं थी जो किसी परी लोक से कम नहीं थी। उसे जहां जाना था भले ही उसका घर नहीं था, शहर भी अनजान था लेकिन इस सपने को वह जीने के लिए इतना उतावला हो गया था कि खुशी के कारण रात भर नींद ही नहीं आई। जब तीन दिन की ट्रेन यात्रा के बाद वह लखनऊ पहुंचा तो उसने जितना सोंचा था उससे भी कहीं ज्‍यादा शानदार नजर आया।

मेट्रो के काम को देखने पर ग्राहक भी लौटे-

लखनऊ मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है। हनुमान सेतु के नीचे गोमती नदी के किनारे मेट्रो पिलर भी खड़े किए जा रहे हैं। जाहिद के लिए यह सब बिल्‍कुल नया था। उसने कभी ऐसी मशीने देखी ही नहीं थी और ना ही इस तरह से काम करते लोगों को देखा था। उसने बताया कि वह मेट्रो काम को बड़े ही कौतूहल भरी नजरों से देखता है। इस काम के कारण तो कई बार उसके ग्राहक भी चले गए लेकिन मेट्रो का काम देखने में उसे बहुत सुकून मिलता है।

 

दोस्‍तों को बताऊंगा खूबसूरत है देश-

पहली बार कश्‍मीर से बाहर निकले जाहिद ने बताया कि लखनऊ आने से पहले कई शहर और स्‍टेशन, गांव और लोगों को देखा है। यह सब इतना शानदार है कि इसे आसानी से बताया ही नहीं जा सकता। मैं अपने दोस्‍तों आदिल और मुदस्सिर को बताऊंगा कि हमारा इंडिया बेहद खूबसूरत है। जब मैं कक्षा आठ में था तो मेरे पिता जी देश के बारे में बताते थे लेकिन यह जानकारी भी बहुत कम थी। अब अपने दोस्‍तों से भी कहूंगा कि वह भी कश्‍मीर के बाहर निकल कर देश को देखें और जाने। अपनी मां अफरोजा और भाइयों तारिक, अफजल और मुसैम को भी यहां की ढ़ेरों कहानी सुनाउंगा।

 

ऐसा सकून घर में भी नहीं-

कश्‍मीर में मेरा भले ही घर है लेकिन जैसा सकून मुझे लखनऊ में मिला वैसा सुकून मेरे घर में भी नहीं मिला। मेरे लिए यहां पर ना तो रहने का सही ठिकाना है और ना ही खाने का प्रबंध लेकिन लोगों को देखकर लगता है कि काश हमलोगों के यहां भी लखनऊ जैसी शांति हो जाए। इस शहर के लोग बहुत अच्‍छे हैं ग्राहक भी बहुत अच्‍छे आते हैं जैसे ही लोगों को पता चलता है कि हम लोग कश्‍मीर से आए हैं तो सूखा मेवा खरीदने पर कुछ ज्‍यादा पैसे भी मिल जाते हैं।

 

सेना का व्यवहार-

भारतीय सेना का व्‍यवहार बहुत अच्‍छा है कई बार तो हमारे गांव में सेना वालों ने राहत-बचाव कार्य किया है। बर्फबारी के दौरान भी सेना ने खूब मदद की है। जो लोग भी सेना के बारे में गलत बोलते हैं वह खुद गलत हैं और जब तक ऐसे लोग कश्‍मीर में हैं तब तक कश्मीर में शांति नहीं हो सकती है। इस दौरान सैनिकों की संख्‍या भी बढ़ी है जिससे वहां पर घटनाओं में रोक लगी है। उम्‍मीद है आने वाले दिनों में सेना और अच्‍छा करेगी जिससे हम लोगों को बेहतर जिंदगी जीने को मिलेगी।

 



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