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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर का दौरा करने पहुंचे थे, उसी कालेज में पिछले पांच दिन में लगभग 63 बच्चों की मौत हो गई। बच्चों की मौत की वजह बनी अक्सीजन की कमी। दरअसल जिस दिन मुख्यमंत्री अस्पताल का दौरा कर रहे थे, उसी दिन यानी 10 अगस्त को 23 बच्चों ने दम तोड़ दिया। जबकि उसके पहले मरने वाले बच्चों की संख्या अधिकतम सात थीं। इसी दिन आक्सीजन का लो प्रेशर होने की बात भी सामने आईं। इन 23 मौतों के बाद अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी और आनन फानन फैजाबाद, गोंडा आदि स्थानों से आक्सीजन गैस के सिलेंडर मंगाए जाने लगें। अस्पताल में दो दिन में दो सौ से अधिक सिलेंडरों की आपूर्ति हुई लेकिन सरकार के मुस्तैद मंत्री आशुतोष टंडन आक्सीजन की कमी से इंकार करते रहें। यही नहीं, मुख्यमंत्री योगी के दौरे पर पहुंचने के पहले चापलूसी में पहुंचने वाले ये नेता मुख्यमंत्री की रवानगी के बाद गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गए। अब पांच दिन में 63 मौतों का मामला बाल संहार कहा जा रहा है। इसके गुनाहगार की तलाश भी हो रही है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या इसमें खुद को संवेदनशील बताने वाली प्रदेश सरकार अपने मंत्रियों पर कार्रवाई कर पाएगी। ये देखने वाली होगी।

दरअसल शुक्रवार को बच्चों की मौत के मामला तूल पकड़ने लगा तो सरकार के मुस्तैद मंत्री हरकत में आएं। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह और उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा मंत्री आशुतोष टंडन शनिवार को गोरखपुर पहुंचे। उसके बाद भी घटना के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसपल राजीव मिश्रा तथा गोरखपुर डीएम राजीव रौतेला को ही जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन प्रमुख सचिव चिकित्सा, महानिदेशक स्वास्थ्य तथा प्रदेश सरकार के मंत्री आशुतोष टंडन जो आक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी के पत्र को दबाए बैठे रहें, उन पर क्या कार्रवाई करेंगे। सवाल अहम हैं और जवाब प्रदेश ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय भी मांग रहा है।

वैसे इस हादसे के ठीक पहले मुख्यमंत्री के दौरे और मंत्रियों की गंभीरता पर भी तमाम सवाल खड़े हो जाते हैं। दरअसल आक्सीजन की आपूर्ति करने वाली पुष्पा सेल्स ने छह महीने से बकाया करीब 63 लाख रुपये का भुगतान कराने के लिए पिछले कई महीने से लगातार पत्र दिखे। इन पत्रों में बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल, डीएम गोरखपुर, स्वास्थ्य निदेशक, प्रमुख सचिव चिकित्सा को बकाए का भुगतान कराने को कहा गया था। मगर महीनों तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं गत एक अगस्त को प्रमुख सचिव से लेकर मेडिकल कालेज प्रिंसपल को पत्र देने के बाद कंपनी ने उच्च शिक्षा चिकित्सामंत्री आशुतोष टंडन को भी पत्र देकर उन्हें आक्सीजन आपूर्ति रोके जाने संबंधी जानकारी देते हुए, भुगतान कराने की मांग की थी। कंपनी के मुताबिक पत्र मिलने के करीब दो दिन बाद मंत्री आशुतोष टंडन मुख्यमंत्री के दौरे के वक्त गोरखपुर गए थे। मेडिकल कालेज भी गए लेकिन आक्सीजन सप्लाई को लेकर चल रहे अवरोध की बावत मुख्यमंत्री को अवगत कराया न मेडिकल प्रशासन को चेतावनी दी। नतीजा यह रहा कि आक्सीजन खत्म होने की नौबत आ गई। इसका परिणाम सामने हैं।

कंपनी पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी

 

बच्चों की मौत के बाद आक्सीजन की आपूर्ति को सामान्य बताने वाले मंत्री अब पूरी घटना का ठीकरा आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पर फोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं। राजधानी की पुष्पा सेल्स के कई ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की। देर शाम तक कंपनी के संचालक पुलिस के हाथ नहीं लगे थे।

सवालों में मुख्यमंत्री

 

गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में सात दिन में 63 बच्चों की मौत के मामले में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब सवालों में हैं। पहली बार संसद पहुंचने पर योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल इंसेफ्लाइटिस के कहर को लेकर रो तक पड़े थे। इस कारण से उनसे उम्मीद की जा रही थी कि सत्ता में आने पर कम से कम गोरखपुर में अब मासूम इस बीमारी से नहीं मरेंगे। मगर मुख्यमंत्री की संजीदगी शनिवार को स्वास्थ्यमंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बयां कर दी। उन्होंने प्रेस वार्ता में पिछले कई महीनों में होने वाले बच्चों की मौत की संख्या खुद ही गिना दी। मकसद केवल इस पूरी घटना पर से ध्यान भटकाना तथा जिम्मेदारी से बचना था।

बच्चों की मौत के लिए सीधे तौर पर प्रदेश सरकार ही जिम्मेदार हैं। भाजपा के मंत्रियों की लापरवाही ही इतने बच्चों की मौत का सबब है। देखना होगा कि सख्त प्रशासन का दावा करने वाली सरकार अपने दोषी मंत्रियों व अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करती है।

अखिलेश यादव

पूर्व मुख्यमंत्री

 

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