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Rising At 8am | 17-Jul-2017 | Posted by - Admin


  • वाहनों में लगने वाली रेडियम भी लगाई जा रही है काटकर
  • एक व्यवसायी से वसूली और सेटिंग से चल गोरखधंधा 

   
Special Coverage: Corruption in law and Order of Vehicles Done by Government Officials

 

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

शहीद पथ पर स्थित परिवहन विभाग का वाहन परीक्षण ग्राउंड और उसी के बाहर पान की दुकान के बाहर लगे तख्त पर वाहनों में सुरक्षा के मद्देनजर लगने वाली रेडियम स्ट्रिप के कारोबारी। फिटनेस ग्राउंड पर सोमवार को मोटर ड्राइविंग स्कूल के वाहन भी जांच के  लिए पहुंचे थे, इसलिए दुकान भी लगी थी लेकिन कारों पर 50 एमएम की पट्टी को बीच से काट कर दो हिस्से में लगाया जा रहा था। जबकि नियमानुसार ऐसा हो ही नहीं सकता है। वाहन एक्ट में भी छोटे वाहनों के लिए 20 मिलीमीटर तथा, ट्रक –बस जैसे वाहनों के लिए 50 एमएम चौड़ी लाल, सफेद व पीली रेडियम पट्टी का प्रावधान हैं।

 

दरअसल रेडियम पट्टी लगाने की व्यवस्था इस कारण से है कि कम रोशनी में किसी तरफ से मामूली प्रकाश पड़ने पर ये पट्टी चमकती हैं और पीछे से आने वाले वाहनों को उसका आभास हो जाता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इसे वसूली का धंधा बना लिया है। इस कारण से फिटनेस ग्राउंड पर ही इसका खुला खेल चल रहा है और इस पूरे खेल में विभाग के अधिकारियों से लेकर फिटनेस ग्राउंड पर वाहनों का परीक्षण करने वाले संभागीय निरीक्षक पूरी तरह से संलिप्त हैं। खास बात यह है कि इस संलिप्तता का प्रत्यक्ष प्रमाण वाहनों में रेडियम पट्टी लगाने वाला कर्मी आलोक खुद है जो स्वीकार करता है कि वाहनों में चौड़ी पट्टी को काट कर छोटे वाहनों पर लगाई जा रही हैं। इसकी जानकारी आरआई को भी है। यही नहीं, वसूली के खेल में टूरिस्ट वाहनों पर लाल-नीली पट्टियां भी लगवाई जा रही हैं जबकि एक्ट में कहीं पर भी इसका उल्लेख नहीं है।

 

 

संदिग्ध कंपनी को ही प्राश्रय

 

फिटनेस ग्राउंड के बाहर जिस कंपनी के प्रतिनिधि से रेडियम पट्टी लगवाई जा रही है, उस कंपनी को मिला अप्रूवल ही संदिग्ध हैं। खास बात यह है कि रेडियम स्ट्रिप लगाने वाली कंपनी को एक्ट के एनेक्जर 4,5 व 6 अप्रूव होना अनिवार्य है लेकिन वर्तमान अधिकारियों की मिलीभगत से जो कंपनी काम कर रही है, वहीं संदिग्ध है। उसकी जांच के भी कई बार आदेश हुए लेकिन अधिकारियों के भ्रष्टाचार के चलते रिपोर्ट दबा ली गई। यही नहीं, कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों को सुविधा शुल्क पहुंचा कर जमकर वसूली की जा रही है।

 

ठिकाने लगा दी जांच

 

पूर्व परिवहन आयुक्त के रवींद्रनायक ने वाहनों में सुरक्षा के मद्देनजर लगने वाली रेडियम पट्टियों की गुणवत्ता की शिकायत सामने आने के बाद इसकी आकस्मिक जांच कराने के आदेश मुख्यालय पर तैनात एक महिला अधिकारी को दिए थे। इसके पहले इन्हीं अधिकारी फंड न होने का तर्क दिया था। इसके मद्देनजर परिवहन आयुक्त ने एक लाख रुपये कंटेनजेंसी फंड देने का भी निर्देश दिया था लेकिन उसके बाद भी जांच कराई ही नहीं गईं। नतीजा यह है की रेडियम स्ट्रिप के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है।

 

 

"रेडियम पट्टी की काट लगाया नहीं जा सकता है। ऐसे करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि व संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह बात मेरी जानकारी में भी नहीं है और कंपनी के अप्रवूल की दोबारा जांच कराई जाएगी। इसमें गड़बड़ी मिली तो कंपनी संचालक पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।"

आरपी सिंह

संभागीय निरीक्षक


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