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दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ। 

 

बहुत प्रचलित मिसाल है, देर आयद, दुरुस्त आये। विधानसभा चुनाव में चारों खाने शिकस्त मिलने के बाद समाजवादी पार्टी अपने खामियों को दूर करने की मशक्कत में लग गई है। इसी का परिणाम है कि समाजवादी पार्टी से दूरी बना रहे शिवपाल सिंह यादव की पार्टी में वापसी हो रही है। उनका पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनना भी तय माना जा रहा है। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि शिवपाल तो पार्टी में पहले से ही हैं।

 

दरअसल पिछले साल विधानसभा चुनाव के पहले यादव परिवार की कलह के कारण समाजवादी पार्टी कई खेमे में बंट गई थीं। पार्टी के कई कद्दावर नेता साइड लाइन कर दिए गए। उनमें तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी शामिल थे। पार्टी का सम्मेलन बुलाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बना दिया गया। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को भी उनके पद से हटा दिया गया। उसके बाद ही शिवपाल सिंह पार्टी से दूरी बनाए हुए थे। कई बार शिवपाल द्वारा समाजवादी पार्टी से अलग पार्टी बनाए जाने के भी कयास लगाए गए। मगर अब तस्वीर बदलती दिख रही है।

वर्तमान परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक दूसरे करीब आ चुकी है। ऐसे में समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक शिवपाल का महत्व बढ़ा है और पार्टी की मजबूती की खातिर उन्हें भी अब पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव पद दिया जाना लगभग तय हो गया। दरअसल शिवपाल की परिवार और पार्टी में खटक का सीधा असर विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में दिखा था। यहां पर समाजवादी पार्टी को भाजपा की लहर के साथ शिवपाल लाबी की मुखालफ झेलनी पड़ी थी। इसका परिणाम भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं था। इसके अलावा पार्टी में मुलायम और शिवपाल के खिलाफ अखिलेश यादव मजबूती देने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल भी अब समाजवादी पार्टी से विरत होकर भाजपा के साथ हैं। इस तरह से शिवपाल का पार्टी विरोध भी काफी कम हो चुका है।

 

जमीनी कार्यकर्ताओं पर अच्छी पकड़

समाजवादी पार्टी में शिवपाल सिंह यादव आज भी जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े नेता माने जाते हैं। शिवपाल के समर्थक आज भी पार्टी में बहुत हैं और इस कारण से लोकसभा चुनाव में शिवपाल और अखिलेश के साथ साथ होने का असर कार्यकर्ताओं को ऊर्जा प्रदान करेगा। शिवपाल के जरिए समाजवादी पार्टी अपना परंपरागत वोट फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है और इसमें बहुजन समाज पार्टी का सहयोग रहता है तो फिर भाजपा के लिए यूपी फतह की राह आसान नहीं होगी। हालांकि इस संबंध में फिलहाल शिवपाल यादव खामोश हैं लेकिन अखिलेश यादव जरूर उन्हें पहले से ही पार्टी में बता रहे हैं।

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