Film on Pulwama Attack in Bollywood

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

केंद्रीय विद्यालय अलीगंज। मंगलवार सुबह करीब पौने सात बजे संभागीय परिवहन अधिकारी संजय नाथ झा स्कूल के बाहर गेट पर ही थे। एक स्कूटर सवार अभिभावक अपने दो बच्चों के साथ पहुंचे। खुद के सिर पर हेलमेट न बच्चों के सिर। परिवहन अधिकारी ने उन्हें रोक लिया। बच्चों की सुरक्षा का हवाला दिया। बताया कि बच्चों के साथ लेकर भी इस तरह नियमों की अनदेखी होगी तो बच्चे आगे क्या सीखेंगे। अभिभावक को भी बात समझ में आई। उन्होंने गलती स्वीकार की और भविष्य में हेलमेट लगाकर चलने का संकल्प दोहराया।

 

 

दरअसल, 29 वें सड़क सुरक्षा सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को राजधानी के तीस स्कूलों में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को सुरक्षित वाहन चलाने की संकल्प दिलाया। बच्चों की सभा में उन्हें संकल्प दिलाया गया। कई स्कूलों में पेंटिंग-निबंध की प्रतियोगिता हुई और उसमें बच्चों को पुरस्कृत किया गया। संभागीय परिवहन अधिकारी अशोक कुमार सिंह और संजय नाथ झा ने बताया कि बच्चों को संकल्प दिलाने के साथ ही स्कूल प्रशासन से भी कहा गया कि वे सुनिश्चित कराएं जो बच्चे दोपहिया वाहनों से आते हैं, वे हर हालत में हेलमेट लगा कर आएं। बच्चों के पास ड्राइविंग लाइसेंस जरूर हों। इसके लिए स्कूल स्तर से निगरानी की जाएं और अगर बच्चे नियम नहीं मान रहे हैं तो उसकी सूचना उनके अभिभावकों को दी जाएं।

 

 

बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए परिवहन विभाग के तीस अधिकारी राजधानी के विभिन्न स्कूलों में गए। आरटीओ अशोक कुमार सिंह, आरटीओ विदिशा सिंह, आरटीओ संजयनाथ झा, एआरटीओ प्रवीन कुमार, एआरटीओ बीके अस्थाना, पीटी नागेंद्र वाजपेयी, पीटीओ अनीता सहित परिवहन विभाग के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अमर सहाय, आरके त्रिपाठी आदि ने सुबह स्कूलों में बच्चों की असेम्बली में उन्हें सुरक्षित ढंग से वाहन चलाने का संकल्प दिलाया।

 

 

भविष्य को जागरूक कर वर्तमान में सुधार

दरअसल, स्कूली बच्चों के जरिए यातायात सुधार और सड़क सुरक्षा दशकों पुरानी है। जानकारों के मुताबिक यूरोप के कई देशों में ट्रैफिक जाम, एक्सीडेंट में अचानक वृद्धि होने पर वहां पर तमाम उपाय ट्रैफिक सुधार के लिए किए गए। तमाम उपायों के बाद जब इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा तो वहां पर बच्चों को शिक्षित व जागरूक करने की रणनीति तय की गई। इसके लिए वहां स्कूलों में बच्चों को यातायात नियम व कानूनों की जानकारी देने की व्यवस्था की गई। इसका अपेक्षित असर भी देखने को मिला। उसके बाद धीरे-धीरे अब तमाम विकसित व विकासशील देशों में ट्रैफिक के मद्देनजर स्कूली बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसकी व्यवस्था अपने यहां भी है, लेकिन हकीकत यह भी है कि इसकी निगरानी की इंतजाम कोई नहीं हैं।

 

 

पहले सबक ही नियम तोड़ने का

एक तरफ बात होती है कि यातायात नियमों और सुरक्षा की, लेकिन हकीकत में अभिभावकों के लाड़ प्यार में बच्चे पहला सबक ही नियम तोड़ने का लेते हैं। इसकी हकीकत किसी भी जगह पर देखी जा सकती है। पहले घर से बच्चों को अभिभावक ही बिना हेलमेट या फिर बिना लाइसेंस स्कूल भेजते हैं। लाइसेंस बनवाने में भी वास्तविकता को दरकिनार कर गलत जानकारी पर लाइसेंस हासिल किया जाता है। उसके बाद बच्चा हेलमेट लगाए है नहीं लगाए है, कोई देखने वाला नहीं रहता। स्कूलों में भी इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। तमाम अभिभावक तो खुद स्कूल ले जाते वक्त ही बच्चों को गाड़ी चलाना भी सिखा डालते हैं। ऐसे में हादसों की आशंका हमेशा बनी रहती है।

 

 

 

बिना लाइसेंस-हेलमेट न हो स्कूल आने की इजाजत

अपर परिवहन आयुक्त (सड़क सुरक्षा) गंगाफल ने बताया कि ट्रैफिक हादसों पर अंकुश लगाने के मकसद से सभी स्कूलों को जिलाधिकारियों-मंडलायुक्तों के जरिए पत्र भेजा जाएगा। इसमें कहा जाएगा कि बिना हेलमेट-लाइसेंस बच्चों को दोपहिया वाहन से स्कूल नहीं आने दिया जाएगा। इसके लिए स्कूल के गेट पर सूचना या होर्डिंग लगवाए जाएं। इसके साथ ही इसे सुनिश्चित कराने के लिए विभाग द्वारा इसकी आकस्मिक जांच भी कराई जाएगी। बिना ड्राइविंग लाइसेंस-हेलमेट के बच्चे आते मिलने पर स्कूलों को भी नोटिस दिया जाएगा।

 

 

 

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement