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दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

हर महीने करीब करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान। उसके बाद भी चालीस फीसद व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम खराब। कई क्षेत्रों में ईटीएम की कमी। बावजूद इसके हर महीने करीब डेढ़ –पौने दो करोड़ की बिलिंग और उसमें कटौती के बाद एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान। यह प्रदेश इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएमएस) का नमूना। हालांकि इसका काम देखने वाली संस्था ट्राइमैक्स को पिछले तीन महीने से भुगतान नहीं किया गया है। लेकिन अब ट्राइमैक्स द्वारा एमएसटी का पैसा रोडवेज को न देने का मामला सुर्खियों में है।

 

ट्राइमैक्स के साथ रोडवेज का अनुबंध 2019 तक का है। इस अनुबंध के तहत ट्राइमैक्स द्वारा बसों में वीटीएस बाक्स, ईटीएम मशीनें, यात्री सुविधा, पूछताछ काउंटर आदि स्थापित करने थे। इसके एवज वर्तमान समय में कंपनी को करीब 38 पैसा प्रति टिकट के हिसाब से भुगतान हो रहा है। इस 38 पैसे के भुगतान में सारा खेल हो रहा है। हर टिकट पर कंपनी को 38 पैसा मिलता है भले ही बस में ईटीएम –वीटीएस बाक्स हो या नहीं। कमी होने पर क्षेत्र स्तर पर भुगतान में कटौती कर ली जाती है और यह कटौती अधिकारियों द्वारा की जाती है। उसके बाद भुगतान की संस्तुति कर मुख्यालय भेजा जाता है। यहां पर नियमानुसार करीब 25 फीसद भुगतान रोक कर कंपनी को भुगतान कर दिया जाता है। खास बात यह है कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर कंपनी के काम शुरू करने के समय से चल रही कटौती जारी है और कमी भी बरकार है। कई साल बीत गए। मगर कंपनी को कटौती के साथ भुगतान भी हो रहा है। या यूं कहें कि जो वस्तु है ही नहीं, उसका भी भुगतान किया जा रहा है। यह घपला करोड़ों का है।

आईटीएमएस की हकीकत यह यह है कि तमाम दावों के साथ शुरु हुई योजना में प्रदेश में कोई भी बस अड्डा पिछले पांच साल में अप टू मार्क नहीं है। राजधानी में पहले आलमबाग बस अड्डे को अपग्रेड करने की बात हुई और दूसरे ही साल उसे थ्री पी माडल पर विकसित करने को दे दिया गया। बाकी शहरों में इतना कोई काम भी नहीं हुआ। प्रदेश कुछ प्रमुख शहरों के बस अड्डों को छोड़ दिया जाएं तो आज भी स्थिति बहुत ज्यादा नहीं बदली है। मगर कंपनी को करीब सवा करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान हर महीने हो रहा था।

 

खास बात यह है कि कंपनी द्वारा पिछले साल अनुबंधित बसें बढ़ने पर ईटीएम व वीटीएस बाक्स की खरीद के लिए पांच करोड़ रुपये का एडवांस भी हासिल कर लिया गया। जबकि इस तरह के किसी एडवांस का प्रावधान अनुबंध में था ही नहीं। बावजूद इसके कंपनी को एडवांस मिल गया। एडवांस मिलने के बाद भी महीनों तक ईटीएम नहीं मिले न ही बसों में वीटीएस बाक्स मिलें। इसके बाद वर्ष 2018 की शुरुआत के साथ ही बसों में वीटीएस बाक्स बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन करीब पांच महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लखनऊ क्षेत्र की ही करीब 1100 बसों में पचास फीसद में वीटीएस काम नहीं कर रहे हैं। लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक ईटीएम सभी बसों में होने का दावा करते हैं जबकि राजधानी के बाहर दूसरे जिलों में ईटीएम भी नहीं मिल रहे हैं। कई तमाम शिकायतें कर्मचारी –अधिकारी कर चुके हैं।

सामने आया एमएसटी में विवाद

ट्राइमैक्स कंपनी और रोडवेज अधिकारियों की मिलीभगत का मामला फैजाबाद में सामने आने के बाद रोडवेज प्रबंधन के कान खड़े हो गए हैं। फैजाबाद में इस मामले की खुलासा होने के बाद वहां के सहायक प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया। सहायक प्रबंधक व ट्राइमैक्स कंपनी के मुलाजिम के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में जांच के आदेश दे दिए गए हैं। ट्राइमैक्स कंपनी के प्रतिनिधि एवं पूर्व रोडवेज अधिकारी आरपी सिंह के मुताबिक एक मामला फैजाबाद में सामने आया था और बाकी जगह जांच हो रही है।

 

तीन महीने से भुगतान नहीं

रोडवेज की एमआईएस शाखा की प्रबंधक शचि कालरा के मुताबिक ट्राइमैक्स कंपनी को पिछले तीन महीने से भुगतान रोक दिया गया है। कंपनी को बसों में वीटीएस व ईटीएम लगाने का अपना काम पूरा करने को कहा गया है। इसके साथ ही एमएसटी की जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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