Abram Shouted At Photographers For No Pictures

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए दलित वोटो को लुभाने के लिए भाजपा की पदोन्नति में आरक्षण का प्रलोभन अब तूल पकड़ता जा रहा है। आलम यह है कि पदोन्नति में आरक्षण की मांग को लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति और सर्वजन हिताय संघर्ष समिति आमने सामने हैं। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति जहां मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से इस पर स्थिति साफ करने की मांग कर रही है तो सर्वजन हिताय समिति ने 17 जून से आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर दी है।

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले प्रमोशन में आरक्षण के लिए केंद्र सरकार को कानून के तहत कार्रवाई के लिए कहा है। दो दिन पूर्व पहले जारी इस आदेश के बाद ही प्रमोशन में आरक्षण को लेकर तकरार भी तेज हो गई है। सर्वजन हिताय संघर्ष समिति के संयोजक ई. एससी दुबे के मुताबिक कोर्ट के आदेश को लेकर केवल भ्रम फैलाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित राज्यों में लागू प्रमोशन में आरक्षण व्यवस्था समाप्त की जा चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के आदेश का हवाला देकर इसे हवा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा अन्य राजनैतिक दलों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। ऐसा नहीं होता है तो 17 जून से इसके विरुध दो दिवसीय आंदोलन शुरु किया जाएगा। शुरुआत में सभी सांसदों –विधायकों को ज्ञापन देकर मांग की जाएगी कि वह स्पष्ट करें कि वह प्रमोशन में आरक्षण का विरोध करेंगे। संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि यह लाखों कर्मचारियों – अधिकारियों से जुड़ा मामला है और इस पर गलत फैसला लेने पर देश भर के करीब तीन करोड़ कर्मचारी अपने वोट से सरकार को करारा जेब देंगे।

दूसरी तरफ आरक्षण बचाओ समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार आरक्षण अधिनियम की धारा 3/7 को बहाल कर लागू कर सकती है। अब सरकार को इस पर फैसला लेना है। प्रदेश के आठ लाख से अधिक कर्मचारी –अधिकारी अपनी इस मांग को लेकर हर संघर्ष के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद पिछली बार एक महीने में दो लाख दलित कर्मचारी –अधिकारियों को पदावनत कर दिया गया था। अब सरकार दलित कर्मचारियों को कोई राहत देना चाहती है तो उसे तत्काल इस पर फैसला लेना चाहिए। इस संबंध में समिति संयोजक ने मख्यमंत्री से मिलने के समय भी मांगा है।

दलित वोट की राजनीति में उलझी भाजपा

सियासी फायदे के लिए दलित वोटों को साधने के लिए पदोन्नति में आरक्षण पर विचार करने भारतीय जनता पार्टी अब अपने ही जाल में उलझी दिखाई दे रही है। दरअसल दलित कर्मचारी अब इसे लेकर आशांवित हैं जबकि सामान्य जाति के कर्मचारी –अधिकारी इसे अपने अधिकारों पर कुठाराघात मान रहे हैं। वह इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। यानी अगर प्रमोशन में आरक्षण लागू हुआ अथवा नहीं दोनों में भी भाजपा को करारा विरोध झेलना पड़ेगा। मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और अब भाजपा के ही नेता इस पर कुछ बोलने से बच रहे हैं। मामला गंभीर इतना है कि भाजपा छोड़ बाकी सियासी दल भी फिलहाल इस मुद्दे पर बात करने से कतरा रहे हैं।

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