Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

कुछ तो वजह रहीं होंगी, वर्ना कोई बेवफा नहीं होता।

 

राजनैतिक दलों की सूरत और सीरत में यह शेर हर वक्त नुमायां होता है। शायद ऐसे ही कुछ कारण रहें कि पिछले दो दशक से भाजपा के धुर विरोधी और मोदी –अमित शाह को खूनी तक करार देने वाले पुराने समाजवादी नेता बुक्कल नवाब आज भाजपाई बन गए। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी को देखें, मुख्तार अंसारी से लेकर गायत्री प्रजापति सरीखे लोगों के सहारे दागियों पर निशाना साधते साधते सरकार बनने के बाद दागी बुक्कल नवाब पार्टी में शामिल करा लिए गए। यह भले ही राजनैतिक मजबूरी हो लेकिन हकीकत यह है कि इससे आम आदमी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

अब जरा कथित नवाबी खानदान से तालुल्क रखने वाले बुक्कल नवाब के राजनैतिक कैरियर पर नजर डालें। करीब 25 साल से समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे के तौर पहचान बनाने वाले बुक्कल नवाब भाजपा विरोधी सुरों के कारण ही सपा में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। वहीं विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी में पारिवारिक टकराव के दौरान भी वह अखिलेश यादव के खेमे में मजबूती से डटे हुए थे। फिर अचानक उनका भाजपा नीतियों के प्रति ऐसा रुझान बढ़ा कि उन्होंने अपना एमएलसी पद ही त्याग दिया। वहीं, बुक्कल नवाब सहित बाकी सपा –बसपा के अन्य दो नेताओं को भाजपा में शामिल किए जाने की बात से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी सोमवार को इंकार करते रहे लेकिन उनकी रवानगी से पहले ही भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में ही तीनों नेताओं को भाजपा की सदस्यता दे दी गई। इससे भाजपा का चरित्र भी उजागर होने लगा है। दरअसल प्रदेश सरकार ने अपने तीन मंत्रियों को विधानपरिषद पहुंचाने का रास्ता बना लिया और बदले में अब इन नेताओं के गुनाह माफ कर दिए जाएंगे। शायद ही राजनीति का दस्तूर रहा है और यह भी साफ हो गया कि भ्रष्टाचार और दागियों से दूरी का प्रपंच केवल चुनावी एजेंडा भर था।

नदी की जमीन भी बना ली थी मिल्कियत

 

एमएलसी बुक्कल नवाब का नाम चर्चा में उस वक्त ज्यादा रहा जबकि गोमती नदी की डूब की जमीन का आठ करोड़ मुआवजा उनके द्वारा ले लिया गया। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया। तहसील से लेकर राजस्व विभाग तक दस्तावेजों का पता नहीं है। इतना ही नहीं, शीश महल व घंटाघर के आसपास के कई अपार्टमेंट नवाब के परिवार वालों के हैं। इनमें घंटाघर हेरीटेज जोन में बने निर्माण तो आवास मंत्री ने सुरेश पासी ने अवैध पाए थे और उन पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। सरकार का दवाब कुछ ऐसा था कि नवाब साहब का ह्रदय परिवर्तन होने लगा था। उसके बाद ही वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने की अपील व उसका खर्च वहन करने की घोषणा करके भी सुर्खियों में रहें। इसी तरह से प्रतापगढ़ कुंडा के विधायक एवं समाजवादी पार्टी से नजदीकी माने जाने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के रिश्तेदार व निकट माने जाने वाले यशवंत सिंह के भाजपा में पहुंचने से पर्दे के पीछे चल रहे तमाम घटनाक्रमों की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। केवल वहीं नहीं, अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने के वक्त सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की मुखालफत करने वाले समाजवादी पार्टी में कई दिग्गज भी इसी बहाने भाजपा में अपनी इंट्री कराने के गणित में जुट गए हैं।

इसमें गलत क्या . .

 

भाजपा कार्यालय में समाजवादी पार्टी के दो तथा बसपा एक एमएलसी के भाजपा में शामिल होने की बावत पूछने पर नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इसमें गलत क्या है। अगर कोई अपनी मर्जी व नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल होना चाहता है तो अच्छा है। इसमें पहले कुछ तय नहीं था। हालांकि बुक्कल नवाब की छवि की बावत पूछे गए सवाल को टाल गए।


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