Sonam Kapoor to Play Batwoman

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

डालीगंज चौराहा – शाम साढ़े छह बजे डालीगंज पुल चौराहे पर सड़क पर रखा ट्रैफिक पुलिस टिन शेड और उससे कुछ दूर पर खड़ी सफेद रंग की जिप्सी। टिन शेड के बाहर लगी कुर्सियां और वाहनों की जांच। जांच में भी दूसरे जिलों के वाहनों को लेकर खासी सतर्कता। चौराहे पर पुलिस का कब्जा तो उसके ठीक बगल और सामने टेंपो वालों का कब्जा। बुद्ध पार्क से डालीगंज पुल की ओर जाने वाले रास्ते में कतार में खड़े कई टेंपो और पीछे निकलने की मशक्कत में लगे वाहन।

 

जी हां, सबसे व्यस्त समय पर राजधानी की स्मार्ट पुलिसिंग का यह नजारा अमूमन रोज ही देखा जा सकता है। केवल डालीगंज पुल ही नहीं, निशातगंज, चारबाग, पकरी का पुल चौराहा (व़ंदावन योजना) और अवध चौराहा आलमबाग। यहां पर पुलिस और टेम्पो चालकों के बीच का याराना इतना घनिष्ठ दिखता है कि पुलिस को इसकी भी फिक्र नहीं रहती कि ट्रैफिक चल रहा है या फिर लोग जाम में फंस रहे हैं। अलबत्ता स्टैंड जरूर आबाद रहते हैं। दरअसल इससे यह तो एकदम साफ हो जाता है कि कहीं न कहीं पुलिस और इन वाहन स्टैंड संचालकों के बीच कोई तालमेल जरूर है। पुलिस देख कर अनदेखी करती है और राहगीर खामियाजा भुगतते हैं। मगर इसे रोकने वाला कोई नहीं है।

हर रूट पर धड़ल्ले से वसूली दरअसल इस नजरें इनायत की फीस निर्धारित है। टेंपो संचालन से जुड़े ड्राइवर ही बताते हैं कि हर रूट पर ट्रैफिक पुलिस का हर गाड़ी से पैसा फिक्स है। इस कारण से कोई रोकटोक नहीं है। आईटी चौराहे से लेकर निशातगंज और मेडिकल कालेज क्रासिंग से लेकर आईआईएम तक कहीं किसी तरह का कोई अंकुश नहीं। खास बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस बड़े अधिकारियों या प्रशासन के निर्देश पर जांच भी करती है तो उसके निशाने पर वह वाहन रहते हैं, जो नियमानुसार ठीक है या फिर उनमें मामूली कमी है। वर्ना अवैध वाहन तो पुलिस को कभी मिलते ही नहीं है न ही दिखते हैं। खास बात यह है कि अमूमन ट्रैफिक पुलिस ये काम परिवहन विभाग का बता कर पल्ला झाड़ लेती है। वाहन छोड़ने के भी तमाम हथकंडे ट्रैफिक पुलिस लाइन में उन वाहनों को सहजता से छोड़ दिया जाता है जिनमें एक भी कागज न हों।

 

उसका भी रास्ता पुलिस ने निकाल लिया है। इसके लिए बाकायदा एक एफआईआर मांगी जाती है और उसके साथ प्रार्थनापत्र। एफआईआर वाहन के कागज गिरने या खोने की होती है जबकि प्रार्थनापत्र में मामूली धारा के उल्लंघन की माफी। लिहाजा वाहन कुछ रुपये शमनशुल्क लेकर छोड़ दिया जाता है। यह अलग बात है कि इस पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए पांच से सात हजार रुपये जरूर मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस कर्मी जरूर ले लेते हैं।

“चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मी इस तरह की हरकत कर रहे हैं तो गलत है। इसके लिए आकस्मिक निरीक्षण कर सख्ती की जाएगी। इसके बाद भी जो कर्मी इस तरह के कामों में शामिल दिखा तो कार्रवाई की जाएगी।”

शीतला पांडेय

यातायात निरीक्षक

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