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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

शासन के आदेश पर शुरू हुई स्कूली वाहनों की जांच मियाद पूरी होने के बाद भी अभी अधूरी है। दरअसल दो दिन छुट्टी पड़ जाने के कारण वाहनों की जांच नहीं हो सकीं। स्कूलों के नाम पर पंजीकृत वाहनों की जांच ही पूरी न हो पाने की वजह अब निजी वाहनों की जांच भी लटक गई है। दरअसल राजधानी में डेढ़ हजार से अधिक निजी वाहन स्कूली परमिट लेकर संचालित हो रहे हैं।

 

नियमों के उल्लंघन में भी ये वाहन कहीं आगे हैं लेकिन परिवहन विभाग की जांच से पल्ला झाड़ता रहा है। खास बात यह है कि एक तरफ अधिकारी मोटरयान नियमावली में किसी प्राइवेट वाहन को स्कूल परमिट दिए जाने का प्रावधान होने से इंकार कर देते हैं लेकिन उसके बावजूद हजारों वाहनों को पूरे प्रदेश में स्कूल परमिट जारी किए गए हैं। अब इन वाहनों की जांच के नाम पर विभाग के अधिकारी संसाधनों से लेकर तमाम बंदिशों की दलील देते हैं।

दरअसल प्रदेश सरकार के आदेश पर अप्रैल प्रथम सप्ताह में स्कूलों के नाम पर पंजीकृत वाहनों की जांच के आदेश हुए थे। इसके तहत 15 अप्रैल तक करीब 1500 वाहनों की जांच होनी थी और उन्हें फिट होना था। अधिकारियों ने पहला खेल किया कि स्कूल वाहनों को ही दो श्रेणी में बांट दिया। यानी स्कूलों से अनुबंधित निजी वाहनों को जांच से अलग कर केवल उन वाहनों की सूची तैयार की गई जो स्कूल के नाम पर ही पंजीकृत थे। उसके बाद स्कूल परिसरों में उनकी जांच की गई। जांच के दौरान कमी पाए जाने पर वाहनों को नोटिस जारी किया गया। उन्हें एक सप्ताह में वाहन दुरुस्त कराने को भी कहा गया। जबकि निजी अनुबंधित वाहनों की जांच शुरू नहीं हो सकीं।

 

दफ्तर में ही तैयार नहीं है सूची

स्कूलों के अनुबंध पत्र पर स्कूली परमिट पर संचालित हो रहे वाहनों की सूची आरटीओ दफ्तर में भी तैयार नहीं हो पा रही है। खास बात यह है कि इन वाहनों को स्कूल परमिट स्कूल के अनुबंध में मिले हैं लेकिन इसका पंजीकरण निजी वाहनों के तौर पर किया गया है। यही वजह है कि पिछले एक सप्ताह में चली जांच में तमाम स्कूलों ने अपनी जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि निजी वाहनों से भी पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने निजी वाहनों को अभिभावकों के कांट्रैक्ट पर बताए। खास बात यह है कि  अगर ऐसा है तो फिर वाहनों को स्कूल परमिट किस आधार पर दिए गए और इन वाहनों को टैक्स में रियायत दिए जाने का जिम्मेदार कौन हैं और इससे होने वाली टैक्स हानि का जिम्मेदार कौन है।

 

"स्कूलों के नाम पर पंजीकृत वाहनों की जांच चल रही है और इसमें अस्सी फीसद वाहनों की जांच हो चुकी है। जबकि निजी वाहनों की भी जांच होगी। इसके लिए निजी वाहनों की सूची तैयार कराई जा रही है। जल्द ही उनकी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा सघन जांच अभियान भी शुरू किया जाएगा। बिना मानकों के चल रही गाडियों को बंद कराया जाएगा।"

अनिल कुमार मिश्रा

उप परिवहन आयुक्त (लखनऊ)

 

"स्कूलों में अनुबंधित निजी वाहनों की सूची अभी दफ्तर में ही तैयार नहीं है। जिन वाहनों की सूची मिली थी, उनकी जांच हो रही है। निजी वाहनों की भी जांच की जाएगी और इसके लिए उनकी जांच कराई जाएगी। यह जांच आकस्मिक और छापामार होगी। मानक के विपरीत संचालित वाहनों को जब्त किया जाएगा।"

विदिशा सिंह

संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन)

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