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स्कूली वाहनों की जांच में भी खेल

Rising At 8am | 09-Apr-2018 | Posted by - Admin

 

  • अनुबंधित निजी वाहनों का पता नहीं

  • स्कूलों में खोजे नहीं मिल रहें वाहन 

   
Reality of Schools van in Lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

परिवहन विभाग की मेहरबानी से मासूम स्कूली बच्चे कमाई का जरिया बन गए हैं। इन्हें स्कूल पहुंचाने वाले स्कूली वाहनों के परमिट में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। निजी वाहन चालकों को स्कूली परमिट जारी कर दिए जबकि स्कूलों में जांच के दौरान अधिसंख्य स्कूलों ने अनुबंधित वाहनों से इंकार कर दिया है। खास बात यह है कि दो दिन की जांच में सारी हकीकत सामने आने के बाद परिवहन विभाग अनुबंधित निजी वाहनों की जांच करने के बजाए फिलहाल स्कूलों के नाम दर्ज वाहनों की जांच करने की रस्म अदायगी कर रहा है। उन्हें 14 अप्रैल तक वाहनों को दुरुस्त कराने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। मगर अनुबंधित निजी वाहनों की जांच के लिए आगे जब आदेश होंगे, उस वक्त जांच करने का दावा किया जा रहा है।

 

लाखों रुपये का घोटाला –कमाई 

दरअसल, निजी वाहनों को स्कूल परमिट देने की आड़ में परिवहन विभाग में लाखों रुपये का घोटाला चल रहा है। इसकी बानगी देखिए। चौपटिया में रहने वाले एक वाहन  स्वामी के पास फोर्स कंपनी की तमाम गाड़ियां हैं। ये गाड़ियां हजरतगंज से लेकर सीतापुर रोड तक कई स्कूलों में चल रही हैं। इसके अलावा इसके वाहन स्वामी और उसके साथियों के पास मारुति वैन भी बड़ी संख्या में है। खास बात यह है कि परिवहन विभाग ने इन वाहनों को परमिट तो दे दिए हैं लेकिन विभाग के पास यह जानकारी नहीं है कि ये वाहन किन स्कूलों के अनुबंध पत्र पर दिए गए। यह सीधे तौर पर घोटाले का प्रमाण है।

कारण है कि किसी भी निजी वाहन को स्कूल परमिट स्कूल के अनुबंध पत्र पर ही जारी किया जाता है। ऐसे में वाहन की परमिट तथा पंजीयन पत्र पर ही अनुबंध अंकित होना चाहिए। मगर ऐसा नहीं होता है। दफ्तर में परमिट शाखा में तैनात दलाल और फिटनेस ग्राउंड पर तैनात एजेंटों के भरोसे पूरा खेल होता है। सूत्रों के मुताबिक स्कूल परमिट धारक वाहनों में अधिसंख्य में अनुबंध पत्र गायब हो चुके हैं जबकि उनके परमिट चल रहे हैं। एक बार स्कूल परमिट मिलने के बाद दोबारा अनुबंध पत्र की जांच होती है न इसकी तस्दीक की जाती है कि वाहन पर स्कूल का नाम है अथवा नहीं। मगर रिश्वत और घूस के दम पर फिटनेस जरूर जारी कर दी जाती है।

 

इस तरह के प्रकरण पहले भी सामने आ चुके हैं। जब कानपुर रोड पर एक इंजीनियरिंग कालेज की बस के हादसाग्रस्त होने पर उसमें छोटी-छोटी क्लास के बच्चे सफर मिले थे।  परिवहन अधिकारियों ने स्कूल परमिट होने की दलील तो दी थी लेकिन इंजीनियरिंग कालेज की बस में प्राइमरी के बच्चों के बारे में जांच दाखिल दफ्तर कर दी गई। कमोबेश परिवहन मंत्री व शासन के आदेश के बाद स्कूली वाहनों की जांच में भी यही खेल चल रहा है। दरअसल दो दिन से चल रही जांच में साढ़े तीन सौ के करीब स्कूली वाहनों की जांच की गई लेकिन इनमें नाममात्र को भी अनुबंधित वाहन नहीं है।

गोमतीनगर में जांच करने वाले गए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी राघवेंद्र सिंह के मुताबिक एक स्कूल में बसों की जांच हुई लेकिन उन्होंने अपने यहां अनुबंध वाहन होने से इंकार कर दिया। इसी तरह से रायबरेली रोड, आलमबाग, पीजीआई, इंदिरानगर आदि क्षेत्रों के नामचीन स्कूलों में गिनती भर की बसें मिलीं। बाकी स्कूल प्रशासन वहां स्कूल के वाहनों से इंकार दिया। यही नहीं, इन स्कूलों ने अनुबंध पर चलने वाली मारुति वैन या अन्य वाहनों से इंकार कर दिया।

 

विभाग ने तैयार कर दिए स्कूली वाहन माफिया

परिवहन अधिकारियों के भ्रष्टाचार के चलते हर परिवहन विभाग को लाखों रुपये टैक्स की चपत लगी रही है। इस कारण से स्कूली वाहनों की आड़ में स्कूल माफिया पनप रहे हैं। हर इलाके में ये अनुबंध पर चल रहे निजी वाहन अभिभावकों के साथ ही विभाग के लिए चुनौती बन गए है। जांच होने पर यह हड़ताल कर देते हैं। जबकि बच्चों के कारण इन पर सख्त कार्रवाई भी नहीं हो पाती। स्कूल परमिट होने के कारण इनमें टैक्स सामान्य मुकाबले करीब आधा लगता है लेकिन इसका लाभ किसी भी अभिभावक को नहीं मिलता है।

सात से नौ किमी दूर से बच्चे लाने पर भाड़ा 1800 से 2000 रुपये मासिक लिया जा रहा है। जबकि वाहन में बच्चों की संख्या भी सीटिंग क्षमता की दोगुनी होती है। इसमें परिवहन अधिकारियों को मोटा हिस्सा मिल रहा है और यही कारण है कि इनकी जांच से अधिकारी परहेज करते हैं। उधर, इस बावत जानकारी करने के लिए संभागीय परिवहन अधिकारी विदिशा सिंह से संपर्क का प्रयास किया तो पूरे दिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। जबकि उप परिवहन आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि किसी भी वाहन को स्कूल परमिट है तो बिना किसी स्कूल के अनुबंध के नहीं मिल सकता। अधिकारी भी भी इससे बच नहीं सकते। इन वाहनों का टैक्स आधा होता है और इन वाहनों की भी जांच की जानी है। इसका रिकार्ड तैयार करना और फिर वाहनों की जांच की जानी है। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।   

 

कई स्कूलों में हुई जांच

ऐआरटीओ राघवेंद्र सिंह के मुताबिक, सोमवार को जांच के दूसरे दिन 266 स्कूली वाहनों की जांच की गई, इनमें 100 वाहनों को मानक पूरा कराने के नोटिस जारी किये गए हैं। शासन के आदेश पर स्कूली वाहनों के खिलाफ चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत सोमवार को इंदिरानगर, चिनहट, बख्शी का तालाब, पीजीआई और रायबरेली रोड पर स्थित करीब एक दर्जन से ज्यादा स्कूलों में वाहनों की जांच की गई। कमी मिलने वाले वाहनों को लेकर स्कूल प्रशासन को नोटिस जारी कर उसे ठीक कराने के आदेश दिए गए और 14 अप्रैल के बाद दोबारा जांच की चेतावनी दी गई। हालांकि तमाम स्कूलों ने अपने यहां से किसी भी स्कूली वाहन के अनुबंधित होने से इंकार कर दिया। जांच अधिकारियों के मुताबिक अधिसंख्य स्कूलों में दो से लेकर छह तक बसें मिल रही हैं। केवल बीकेटी स्थित एक कालेज में पचास से अधिक बसें पंजीकृत हैं। शेष स्कूलों ने महज बसें को ही अपना वाहन बताया है। बच्चों को लाने वाले अन्य वाहनों से उन्होंने किनारा कर लिया।

स्कूल से अनुबंध कर स्कूल परमिट लेकर चल रहे निजी वाहनों की सूची तैयार कराई जा रही है। इन वाहनों की भी जांच की जाएगी। वाहनों के अनुबंध पत्र की भी जांच की जाएगी। साथ ही इस बात की तस्दीक की जाएगी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी सारी गाइड लाइन का पालन हो रहा है अथवा नहीं। अनुबंध पत्र या मानक पूरा न होने पर उन्हें सीज कराया जाएगा।

अशोक कुमार सिंह

संभागीय परिवहन अधिकारी

 

फिलहाल जांच उन वाहनों की हो रही है जो स्कूलों के नाम पर दर्ज हैं। स्कूलों में अनुबंध पर जो वाहन दर्ज है, उनकी जांच अभी नहीं की जा रही है। इस जांच के पूरा होने के बाद निजी वाहनों की जांच की जाएगी। यही नहीं, जांच उन्हें किन स्कूलों से अनुबंध पत्र दिए हैं, उन्हें भी देखा जाएगा। अगर अनुबंध पत्र नहीं मिलते हैं तो वाहनों स्कूल परमिट रद किया जाएगा।

राघवेंद्र सिंह

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी

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