Home Rising At 8am Reality Of Sale In Lucknow Market

प्रिंस विलियम और केट मिडलटन बने माता पिता, बेटे का जन्म

हमें उम्मीद है आने वाले समय में कुछ नक्सली सरेंडर करेंगे: महाराष्ट्र DGP

दिल्ली: मानसरोवर पार्क के झुग्गी-बस्ती इलाके में लगी आग

कांग्रेस का लक्ष्य है "हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी साथ ले डूबेंगे": मीनाक्षी लेखी

कावेरी जल विवाद: विपक्षी पार्टियों का मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन

सेल के खेल में सरकार ही फेल

Rising At 8am | 27-Jan-2018 | Posted by - Admin

 

  • सेल के नाम पर बिना बिल की धड़ल्ले से बिक्री

  • हर शोरूम में अलग तरीके से हो रही बिलिंग

   
Reality of Sale in Lucknow Market

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सर्दियां समाप्त होने को हैं और बाजारों में सेल की धूम है। वस्त्रों से लेकर रोजमर्रा के उत्पाद आकर्षक छूट पर मिल रहे हैं। छूट भी बीस से लेकर पचास फीसद तक की। इनकी बिलिंग हो रही है कि उसमें इस छूट का परिभाषा ही अलग हो गई है। यानी दो सामानों को खरीदने पर जिसका दाम ज्यादा उसके दाम। मगर सवाल यह है कि इसमें सरकार को फायदा क्या हो रहा है। जी हां, सेल के इस खेल में सरकार पूरा टैक्स वसूलने में पूरी तरह से फेल दिखाई दे रही है। अधिकारी भी मानते हैं कि यह मामला बहुत कांप्लीकेटेड हो जाता है और ऐसे में रिटर्न आने के बाद ही पता चल पाता है कि वास्तविक टर्नओवर क्या रहा।

 

दरअसल पिछले दिनों में कामर्शियल टैक्स विभाग ने पांच करोड़ रुपये के कंबल मंगाकर उन्हें हाथो हाथ बेचे जाने का मामला पकड़ा था। व्यापारी पंजीकृत होने तथा रास्ते में मालवाहक पकड़े जाने के बाद विभाग को इसकी भनक लग पाई। अन्यथा बाजार में इस तरह के उत्पाद भरे हुए हैं। हर चौराहे से लेकर पार्क, फुटपाथ तक पर जैकेट से लेकर कंबलों की दुकान सजी है। खुली बिक्री हो रही है लेकिन रसीद या बिल नदारद है। सवाल यह है कि बिना प्रपत्र बिकने वाला माल आ कहां से रहा है। विभागीय निगरानी व्यवस्था क्या है। गोदामों से निकल कर सीधे बाजार में माल पहुंच रहा है और उसकी बिक्री भी हो रही है।

फिर जीएसटी का मायने क्या

जीएसटी के तहत किसी भी सामान के निर्माण के बाद ही उस पर टैक्स लग जाता है। उसके बाद यह जितने हाथों से गुजरता हुआ उपभोक्ता तक पहुंचता है, वहां टैक्स का प्रावधान है। मगर जो सामान शोरूम पर निर्धारित कीमत पर आ रहा है, वह फ्री कैसे मिल सकता है। यानी इसमें झोल जरूर है और उसकी वजह सरकार भी तलाशना नहीं चाहती है। सरकार की कमजोरी के चलते अब तो बड़ी –बड़ी ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर सेल का खेल चल रहा है।

पटरी बाजारों में खुला खेल

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद सरकार को मिलने वाले राजस्व में भले भी कमी आ गई है लेकिन खास बात यह है कि इससे नंबर दो बाजार कहीं ज्यादा फलाफूला। रेलवे से लेकर ट्रांसपोर्ट कर बिना टैक्स का माल धड़ल्ले से राजधानी ही नहीं बल्कि सभी जिलों में पहुंच रहा है। सरकार केवल पंजीकृत व्यापारियों की निगरानी में लगी है जबकि इसके समानानांतर व्यवस्था कहीं ज्यादा सुनियोजित तरीके से मजबूत हो गई। कपड़ों से लेकर इलेक्ट्रानिक व दवाओं का काम धड़ल्ले से बिना टैक्स चल रहा है और सरकार केवल सख्ती करने की दलीलें देती दिखाई दे रही है।

 

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555







TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll

Merchants-Views-on-Yogi-Government-One-Year-Completion

Loading...




Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news